कसरौर कारकौली पंचायत के जिरात गांव में मुख्य सड़क की दुर्दशा, गंदे पानी का जमाव विकास के दावों की पोल खोलता नजारा
कसरौर कारकौली पंचायत के जिरात गांव में मुख्य सड़क की दुर्दशा, गंदे पानी का जमाव विकास के दावों की पोल खोलता नजारा
कसरौर कारकौली पंचायत के जिरात गांव में मुख्य सड़क की दुर्दशा, गंदे पानी का जमाव विकास के दावों की पोल खोलता नजारा
दस्तक7मिडिया, अमीत झा, गौड़ा बौराम।
दरभंगा जिले में स्थित गौड़ा बौराम प्रखंड के जिरात गांव की मुख्य सड़क साल भर जलजमाव की समस्या से जूझ रही है। यह सड़क न सिर्फ स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, बल्कि वीआईपी (VIP) सुप्रीमो मुकेश साहनी के पैतृक घर से गुजरने वाली यह सड़क विकास के खोखले दावों को भी उजागर करती है।
यह सड़क जिरात में मुकेश साहनी के घर से लेकर चुन्नी-मुन्नी पोखर मुख्य सड़क तक जाती है। सड़क पर नाले का गंदा पानी जमा रहता है, जिससे न सिर्फ राहगीरों को भारी बदबू का सामना करना पड़ता है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। यह सड़क बिरौल प्रखंड अंतर्गत सुपौल बाजार से भी जुड़ी है और वहां के मछली बाजार तक जाती है, जिससे इस पर आवाजाही काफी ज्यादा रहती है। इसके बावजूद, यह सड़क पिछले कई सालों से उपेक्षा का शिकार है।
स्थानीय लोग इस स्थिति से बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद विकास के नाम पर कुछ नहीं होता। यह सड़क नगर पंचायत बिरौल की सीमा से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है, फिर भी इसकी हालत बेहद खराब है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। एक तरफ वीआईपी सुप्रीमो मुकेश साहनी बिहार में उपमुख्यमंत्री पद की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने गांव की सड़क की यह हालत है। अगर वह अपने पैतृक निवास के बाहर जलजमाव की समस्या का समाधान नहीं करा सकते, तो बड़े स्तर पर विकास के वादे कैसे पूरे होंगे? यह मुद्दा न सिर्फ स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इस समस्या पर ध्यान देकर ही स्थानीय लोगों का विश्वास बहाल किया जा सकता है।