वैशाली पुलिस महकमे में बड़े खुलासे की उम्मीद : गोपनीय रीडर और दिवा पदाधिकारी पर भारी भ्रष्टाचार के आरोप ,बिहार पुलिस महानिदेशक को भेजा गया शिकायत पत्र,डीजीपी ने डीआईजी को सौंपी जिम्मेदारी ,डीआईजी ने एसपी से कहा कि आरोपों की जांच करायें  यथा शीघ्र।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय

वैशाली जिला बल के सैकड़ों पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने सामूहिक रूप से एक पत्र पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना को भेजा है। इसमें गोपनीय रीडर पु.अ.नि. अजय सिंह और दिवा पदाधिकारी पु.अ.नि. मनोज कुमार पर गंभीर भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप लगाए गए हैं।

दलालों के माध्यम से उगाही और जबरन पैसा वसूली का आरोप

शिकायत पत्र में कहा गया है कि दोनों अधिकारी दलालों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से पुलिसकर्मियों से भारी-भरकम रकम की डिमांड करते हैं। बिना पैसे के किसी की पोस्टिंग या पदस्थापन नहीं की जाती। यहां तक कि पहले से तैनात कर्मियों को भी बिना कारण पद से हटा दिया जाता है और पैसे लेकर दूसरों को पोस्टिंग दे दी जाती है।

सात महीने से चल रहा पोस्टिंग–उगाही का खेल

आरोप है कि गोपनीय रीडर अजय सिंह पिछले सात महीने से थाना अध्यक्षों की पोस्टिंग और अन्य पदस्थापन के लिए मोटी रकम वसूल रहे हैं। पुलिस अधीक्षक का भय दिखाकर कई पुलिस अधिकारियों से वसूली की जा चुकी है।

संपत्ति में 10 गुना बढ़ोतरी

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि फरवरी 2025 से अब तक अजय सिंह ने अपनी संपत्ति को 10 गुना बढ़ा लिया है। पीड़ित पुलिसकर्मियों का कहना है कि निगरानी विभाग पटना से जांच कराई जाए तो अवैध संपत्ति का पूरा खुलासा हो जाएगा।

ट्रांसफर के बाद भी कर रहे हैं दलाली

दोनों अधिकारियों का तबादला करीब दो माह पूर्व मुजफ्फरपुर कर दिया गया था। इसके बावजूद वे वैशाली में रहकर कथित रूप से दलाली और उगाही का खेल जारी रखे हुए हैं।

पुलिस बल में भय और आक्रोश

पत्र में कहा गया है कि इस कदाचार और भ्रष्टाचार से वैशाली जिला बल के अधिकांश पुलिसकर्मी आक्रोशित हैं, लेकिन पदहटाए जाने और प्रताड़ित होने के डर से खुलकर सामने नहीं आ पा रहे।

पुलिस विभाग की छवि पर कलंक

शिकायतकर्ता पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट कहा है कि इस तरह के अधिकारी पुलिस विभाग की छवि धूमिल कर रहे हैं। साथ ही अनुरोध किया गया है कि दोनों अधिकारियों को वैशाली जिला से मुक्त किया जाए, ताकि पुलिसकर्मी भयमुक्त होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

यह मामला बिहार पुलिस की कार्यशैली और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि पुलिस मुख्यालय इस सामूहिक शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।

वैशाली पुलिस में भ्रष्टाचार का बम:

डीजीपी के कड़े रुख के बाद DIG ने दिए जांच के आदेश

गोपनीय रीडर अजय सिंह और दिवा पदाधिकारी मनोज कुमार पर भारी आरोप

वैशाली जिला पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार और उगाही के गंभीर आरोपों पर बड़ा कदम उठाया गया है। तिरहुत क्षेत्र, मुजफ्फरपुर के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) ने वैशाली पुलिस अधीक्षक को आदेश जारी कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है

दलालों के जरिये उगाही और पोस्टिंग का खेल

DIG कार्यालय को भेजी गई सामूहिक शिकायत में आरोप है कि 

 गोपनीय रीडर पु.अ.नि. अजय सिंह और दिवा पदाधिकारी पु.अ.नि. मनोज कुमार पुलिसकर्मियों से दलालों के माध्यम से पैसा वसूलते हैं।

 बिना पैसा लिए पोस्टिंग नहीं की जाती, पैसे न देने वाले कर्मियों को बेवजह तंग और तबाह किया जाता है।

DIG का स्पष्ट आदेश – DSP स्तर पर जांच कर रिपोर्ट दें

 दिनांक 16अगस्त 2025 के तहत जारी आदेश में DIG ने कहा है कि शिकायत पत्र में दर्ज आरोपों की जांच पुलिस अधीक्षक स्वयं करें या किसी पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराएं।

जांच प्रतिवेदन सुस्पष्ट मंतव्य के साथ शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

भ्रष्टाचार से त्रस्त पुलिस बल

शिकायत पत्र में कहा गया है कि वैशाली के अधिकांश पुलिसकर्मी इस खेल से पीड़ित हैं।
• बिना पैसा दिए कोई पदस्थापन संभव नहीं।
• दलालों के जरिये मोटी रकम की वसूली हो रही है।
• ट्रांसफर के बाद भी दोनों अफसर वैशाली में रहकर दलाली कर रहे हैं।

पुलिस महकमे की साख पर सवाल

यह मामला सिर्फ वैशाली ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार पुलिस महकमे की छवि पर सवाल खड़ा करता है। अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह पुलिस विभाग के भीतर फैले पोस्टिंग कारोबार और भ्रष्टाचार के नेटवर्क को उजागर करेगा।

अब सबकी नजरें वैशाली पुलिस अधीक्षक पर हैं कि वे इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से जांच कराकर जांच रिपोर्ट सौंपते हैं।