मिथिलांचल का यह जिला जहां कानून के साथ पुलिस ही करते हे खिलवाड़ ,मामले की होती हे लीपापोती ,खिरहर थाना क्षेत्र में प्रेम प्रसंग में आये युवकों /महिला की क्रूरता से हुई पिटाई मामले में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं ,सड़क दुर्घटना में हुई दों मौत के मामले में भी प्राथमिकी नदारत ,और भी कई मामले।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
मिथिलांचल का मधुबनी जिला एक ऐसा जिला जो अगर ,मगर और डगर पर चल रहा हे ,यहां की पुलिसिंग की बात करें तों भगवान भरोसे ही यह जिला हे ,पुलिस से न्याय की उम्मीद ही बेईमानी हे ऐसा लगता हे कि पुलिस के वरीय पदाधिकारियों को फिर से प्रशिक्षण देकर सरकार को जिला में तैनात करना चाहिये ताकि पुलिस के कार्य करने की शैली में गुणवत्ता आ सके।
दस्तक 7मीडिया इस कार्यशैली को लगातार उजागर करने की कोशिश करता हे ताकि बेहतर पुलिसिंग हो सके और गरीबों को न्याय मिले।अब हम तीन मामलों का जिक्र कर रहें हे जिसे देखने और सुनने के बाद आपको यकीन होगा ,यही नहीं मुख्यालय स्तर के पदाधिकारी इसे अवलोकन करेंगे तों जिले के पुलिसिया कार्यशैली का पता चलेगा।
मामला खिरहर थाना क्षेत्र के बंगरा गांव का
खिरहर थाना क्षेत्र के भाला बंगरा गांव में प्रेम -प्रसंग के मामले में एक वीडियो वायरल हुआ था ,जिसमें लड़के को बांधकर और लड़की को घसीटकर पीटा गया और यह पिटाई लंबे समय तक हुई ,लड़के की जान भी जा सकती थी।इस मामले में एसपी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी कि प्रेम प्रसंग का मामला हे ,दोनों पक्षों की ओर से कहा गया कि हमलोग कानूनी प्रक्रिया में नहीं आना चाहते हे इसे लेकर कोई विधि समस्या नहीं हे और मामला खत्म।
लेकिन एसपी के प्रतिवेदन में यह भी हे कि 04-09-25के रात 12बजे रात्रि में घटना घटी थी ,सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची थी ,दोनों को गिरफ्तार कर चिकित्सीय जांचों उपरांत थाने लाया गया ,सवाल यही हे कि घटना की रात और सुबह यानि उसी दिन या एक दिन बाद थानेदार द्वारा प्राथमिकी दर्ज क्यूँ नहीं की गई?दस्तक 7मीडिया ने इस घटना के दों दिन बाद उक्त वीडियो को लेकर खबर प्रकाशित किया और बताया कि प्रेम प्रसंग का मामला हे जिसमें लड़की से मिलने आये लड़के की बेतहाशा पिटाई की गई और लड़की को भी घसीटकर पीटा गया हे जो वीडियो मधुबनी पुलिस के पास हे।
खबर प्रकाशित होने के कुछ घंटे बाद यानि शाम होते एसपी का प्रेस विज्ञप्ति सामने आया,और कहा गया कि प्रेम प्रसंग का मामला हे और दोनों कानूनी प्रक्रिया में नहीं जाना चाहते हे।यानि दों दिनों तक खिरहर थाना की पुलिस इस मामले का इंतजार करती रही और मामला रफा -दफा। जबकि वायरल वीडियो में किस दरिंदगी से लड़के -लड़की को पीटा जा रहा हे यह वीडियो को देखने से पता चलता हे। ऐसे गंभीर मामले में थानाध्यक्ष को तुरंत संज्ञान लेकर अपने या घटनास्थल पर गये पुलिस कर्मियों के बयान पर प्राथमिकी दर्ज करना चाहिये और मारपीट कर रहें वैसे लोंगों पर कारवाई करनी चाहिये मगर ऐसा नहीं हुआ।
अब हाईकोर्ट के वकील ओम प्रकाश क्या कहते हे
कानून के जानकार उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ओम प्रकाश अपनी राय देते हुये कहते हे , यह मारपीट घर या बंद दरवाजे के अंदर नहीं हुआ हे ,घर से बाहर यानि पब्लिक प्लेस में काफी क्रूरता से मारपीट किया गया हे , लड़के को बांधकर बेल्ट से ,घुसे और लात से कई लोंगों द्वारा पीटा जा रहा हे ,दरअसल वह लड़का प्रेम प्रसंग में आया था और पकड़ा गया ,वहां के लोग इतने उत्तेजित थे कि मारने की नीयत पीट रहा था और ऐसे में उसकी जान भी जा सकती थी ,सूचना पर पहुंची पुलिस को ऐसे मे तों पुलिस के बयान पर ही प्राथमिकी दर्ज करना चाहिये जो नहीं हुआ।उस महिला को भी मारा पीटा जा रहा हे,जो जघन्य हे।इस मामले में जिले के संबंधित पदाधिकारी समेत वरीय पुलिस पदाधिकारी की लापरवाही हे , जिन्होंने प्राथमिकी नहीं दर्ज कर कोई कारवाई नहीं की हे ।उन्होंने कहा कि अगर पिटाई से वह युवक मर जाता तों जवाबदेही किसकी बनती और धारा 302के तहत कारवाई होती अगर वह लड़का जिंदा बच गया या लड़की को जिस तरह पीटा गया तों भी धारा 323,324,307,506,354B के तहत कारवाई होनी चाहिये।छोटे अपराधों में समझौता संभव हे लेकिन ऐसे अपराध करने पर समझौता का कोई मतलब नहीं हे ,पुलिस न्यायालय नहीं हे ,खुद के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय के सुपुर्द मामले को करना चाहिये जो पुलिस ने नहीं किया हे।उन्होंने स्पष्ट कहा कि पब्लिक प्लेस में इस तरह की घटनाएं अगर सामने आती हे तों उससे कॉम्प्रोमाइज नहीं किया जा सकता पुलिस की यह लापरवाही हे जो झलक रही हे क्यूंकि घर के अंदर का यह घटना नहीं हे।
सुशील कुमार चौधरी राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के कहते हे
कि यह मामला जघन्य हे अगर प्रेम बस लड़का गांव पहुंच गया तों लोंगों को उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर देना चाहिये ,पुलिस कानून संगत कारवाई करती ,कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं हे।उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस कारवाई नहीं की, कोई बात नहीं ,कोई भी सामाजिक कार्यकर्ता अगर उच्च न्यायालय में मामला दर्ज कराते हे तों इस मामले में लापरवाही बरतने वाले सभी पुलिस अधिकारी पर न्यायालय संज्ञान ले सकती हे,क्यूंकि उस लड़के की पिटाई जान मारने की नीयत से हो रही हे और पुलिस द्वारा इसपर संज्ञान नहीं लिया गया ,इसमें दोनों पक्षों से समझौता का कोई मतलब नहीं हे।
दूसरा मामला हाल के दिनों में लद्निया थाना क्षेत्र का हे एक डकैती की घटना हुई ,इस मामले में कनीय पुलिस कर्मी /पदाधिकारी /चौकीदार को निलंबित किया गया ,एवं थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण पूछा गया ,कारवाई नदारद। जानकर कहते हे कि थाना क्षेत्र में किसी भी लापरवाही का जिम्मेदार थानाध्यक्ष पहले फिर कनीय पुलिसकर्मी /पदाधिकारी होता हे।गश्ती में अगर कोई लापरवाही बरत रहा हे तों इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती हे ?इसका मतलब हे कि थानाध्यक्ष द्वारा भी इस मामले में लापरवाही बरती गई इस कारण उनसे भी स्पष्टीकरण पुछा गया फिर कारवाई क्यूँ नहीं ?
खेर इसको भी छोड़िये अब कुछ माह पहले अरेर थाना क्षेत्र में गाड़ी की ठोकर से दों अलग अलग जगहों पर राहगीरों की जान गई ,लेकिन तात्कालीन थानाध्यक्ष नेहा निधि ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की ,सिर्फ सनहा दर्ज कर मामले को इतिश्री कर दिया ,यातायात डीएसपी ने इस मामले की जांच कर बिसफी थानाध्यक्ष पर कारवाई के लिये एसपी को पत्र लिखा,एसपी ने स्पष्टीकरण पूछकर थानाध्यक्ष पर काई कारवाई नहीं की।
एसपी का पत्र देखिये
इस कारण दोनों पीड़ित परिवार को सरकारी मुआवजा नहीं मिला अब सवाल यही हे कि इस दुर्घटना में कौन लापरवाह ,जिसके परिवार के सदस्यों की दुर्घटना में मौत हो गई और सरकारी मुआवजा नहीं मिला।सवाल यही कि इसके जिम्मेदार तात्कालीन थानाध्यक्ष नेहा निधि या फिर जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारी ,जिन्होंने थानाध्यक्ष के इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी कारवाई नहीं की। ऐसे कई मामले मधुबनी जिला के हे जो बारीकी से देखने पर गलतियां नजर आयेगी अगर ऐसे ही मधुबनी जिला की पुलिसिया कार्यशैली रही तों इस जिला के आम आदमी का भगवान मालिक हे।जबकि दरभंगा जिला में प्राथमिकी नहीं दर्ज करने पर कई थानाध्यक्ष नप गये हे।




