प्रदेश की सरकार शिक्षक दिवस के मौके पर बिहार के 74 टीचर को राजकीय सम्मान दे रही है। जिसमें भागलपुर की भी दो शिक्षिका शामिल है। मध्य विद्यालय शंकरपुर चौवनिया, नाथनगर में कार्यरत शिक्षिका शालनी और डॉ अमृता का नाम इसमें हैं। डॉ. शालिनी फरवरी 2014 से स्कूल में बतौर शिक्षिका कार्यरत हैं। जनवरी 2025 से ये शिक्षिका की भूमिका निभा रही हैं।

 

 

नन्हे बच्चों की मुस्कान इन्हें आकर्षित करती है और इसी वजह से उन्होंने शिक्षण काम को ही अपना जीवन बना लिया। उनकी खासियत है कि वे बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखकर वास्तविक जीवन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समस्याओं से जोड़कर शिक्षा देती हैं। बच्चे टीचर की कक्षा में बेहद खुश स्कूल में उनके वर्ग कक्ष की अलग ही पहचान है। बच्चे टीचर की कक्षा में बेहद खुश रहते हैं। वे ‘लोकास्ट–नो कास्ट’ की तर्ज पर सामग्री तैयार करती हैं, ताकि शिक्षा सस्ती, सुलभ और सबके लिए आकर्षक हो सके। टीचर-डे मनाया गया है।

 

टीचर-डे मनाया गया है। पढ़ाई का तरीका इतना आसान होता है कि बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि आनंद मानते हैं। डॉ. शालिनी सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने विद्यालय के पोषक क्षेत्र में विशेषकर महिलाओं और किशोरियों के बीच काम किया है।

 

वे मासिक धर्म सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जागरूकता फैलाती हैं। इसके लिए उन्होंने समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर भी लगाए, जिनसे सैकड़ों महिलाएं लाभान्वित हुईं। सामान्य शिक्षिका से राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर तक का सफर तय किया। वॉट्सऐप ग्रुप से जिले के सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रखंड और जिला स्तरीय अधिकारी व एनजीओ सदस्य जुड़े हैं।

 

इससे शिक्षा विभाग की योजनाएं सीधे विद्यालयों तक पहुंचती हैं। डॉ. शालिनी ने बिहार सरकार की शिक्षक संदर्शिका के लेखन और संपादन काम में भी अहम भूमिका निभाई है। वे डाइट की ओर से तैयार किए गए दीक्षा कोर्स में भी शामिल रही हैं। उनकी प्रस्तुति खेलो-बोलो-भाषा सीखो को जिला और राज्य स्तर पर खूब सराहा गया। कोशिश करने वालों की हार नहीं होती शालनी ने बताया कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

 

 

इसलिए हमेशा नया करती रहती हैं। वे टीचर्स ऑफ बिहार मंच से जुड़ी हैं और उसे ‘Pinterest’ पर मॉडरेट भी करती हैं। उनके लेख, कविताएं, कहानियां और आलेख स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। सिर्फ शिक्षिका ही नहीं, वे एक लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। स्कूल के हेड मास्टर परेश कुमार झा समेत शिक्षक पंकज मनी, राजेश कुमार, मोहम्मद जफर अली, पप्पू कुमार, पुनीत त्रिपाठी, श्वेता कुमारी और निलेश रंजन ने उन्हें बधाई दी।

 

 

ग्राम पंचायत शंकरपुर चौवनिया के मुखिया अशोक कुमार ने कहा कि “यह हमारी सिर्फ शिक्षिका नहीं बल्कि छोटी बहन हैं।” वार्ड मेंबर हीरालाल, रंजीत ठाकुर, भारत भूषण, पूर्व मुखिया जगदीश कुमार समेत ग्रामीणों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। स्कूल की रसोइया ने भी दिया आशीर्वाद स्कूल की रसोइया लक्ष्मी, अनीता और अन्य महिलाओं ने भी उन्हें आशीर्वाद दिया। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नाथनगर कुमार मनोज और अकाउंटेंट गौरव कुमार झा ने भी इस सम्मान के लिए शुभकामनाएं दीं। टीचर का मायका बांका के अमरपुर प्रखंड, खरदौरी गांव है। ससुराल खगड़िया का परबत्ता प्रखंड, ठुठ्ठी सिरजापुर गांव है।

 

वर्तमान में ये विवेकानंद कॉलोनी, किला घाट सराय में रहती हैं। डॉ. शालिनी कहती हैं“मैं उस शहर से हूं, जो तिलकामांझी और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसी गौरवशाली विरासत से जुड़ा है। मेरा सपना है कि समाज में नई शिक्षा से जुड़ी बदलाव लाऊं। मैं ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल में नामांकित कर बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशा और लैंगिक भेद जैसी कुरीतियों को खत्म करने की दिशा में काम करना चाहती हूं। मैं दीपक की तरह जलती रहूं, ताकि अंधेरा की कोई परछाईं मेरे क्षेत्र में नहीं दिखे।