सरकार से सरासर झूठ बोल गए डीएसडब्ल्यू व रजिस्ट्रार ,शिक्षा विभाग जाने से कतराते हैं संस्कृत विश्वविद्यालय के पदाधिकारी।कुलपति के आदेश के बिना ही निदेशक को भेज दिया पत्र, प्रतिकुलपति ने बताया गम्भीर मामला।
सरकार से सरासर झूठ बोल गए डीएसडब्ल्यू व रजिस्ट्रार ,शिक्षा विभाग जाने से कतराते हैं संस्कृत विश्वविद्यालय के पदाधिकारी।कुलपति के आदेश के बिना ही निदेशक को भेज दिया पत्र, प्रतिकुलपति ने बताया गम्भीर मामला।
सरकार से सरासर झूठ बोल गए डीएसडब्ल्यू व रजिस्ट्रार
शिक्षा विभाग जाने से कतराते हैं संस्कृत विश्वविद्यालय के पदाधिकारी
कुलपति के आदेश के बिना ही निदेशक को भेज दिया पत्र
प्रतिकुलपति ने बताया गम्भीर मामला
दरभंगा।
अपनी नाकामी व प्रशासनिक अराजकता को छुपाने के लिए संस्कृत विश्वविद्यालय के पदाधिकारी राज्य सरकार द्वारा पटना में आयोजित बैठक में जाने से कतराते हैं। वहां फजीहत न हो इसके लिए झूठ का भी सहारा लिया जाता है। ऐसा ही एक मामला प्रभारी कुलसचिव डॉ दीनानाथ साह एवं अध्यक्ष छात्र कल्याण डॉ शिवलोचन झा को लेकर सामने आया है।
दोनों पदाधिकारियों ने तथ्य छुपाते हुए उच्च शिक्षा निदेशक को सिर्फ इसलिए पत्र लिख दिया कि उन्हें पटना की बैठक में नही जाना पड़े। आश्चर्य तो यह कि कायदे से पत्र लिखने से पूर्व इसके लिए कुलपति डॉ शशिनाथ झा का आदेश भी नही लिया गया। इन सारे मामलों की जानकारी देते हुए प्रतिकुलपति डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह ने उच्च शिक्षा निदेशक समेत कुलपति को लिखा है।
ऐसा है पूरा मामला
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ रेखा कुमारी ने 14 अगस्त,23 को संस्कृत विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र लिखकर 16 अगस्त,23 को शिक्षा विभाग द्वारा आहूत बैठक में भाग लेने का निर्देश दिया था। निर्देशानुसार इस बैठक में परीक्षा नियंत्रक व अध्यक्ष छात्र कल्याण यानी डीएसडब्ल्यू को बुलाया गया था। इसमें विश्वविद्यालय द्वारा सभी स्ववित्तपोषित वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्सेज की लंबित परीक्षाओं पर विचार विमर्श होना था। पत्र में कहा यह भी गया था कि 30 नवम्बर,23 तक इन परीक्षाओं का रिजल्ट प्रकाशित करने सम्बन्धी निर्णय लेते हुए सभी क्रियाओं की विवरणी भी बनाकर बैठक में साथ लाना है। इसी बैठक में जाने से बचने के लिए डीएसडब्ल्यू डॉ झा ने यह कहते हुए झूठी रिपोर्ट कुलसचिव डॉ साह को उपलब्ध करा दी कि संस्कृत विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्सेज संचालित नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि विश्वविद्यालय में ऐसे कोर्सेज के लिए वर्षो पूर्व से व्यावसायिक शिक्षा केंद्र संचालित है और इसके निदेशक भी स्वयं डीएसडब्ल्यू डॉ शिवलोचन झा ही हैं। इस केंद्र की हालत खास्ता है और फिलहाल एक भी कक्षा चालू नहीं है। बताया गया कि सीसीए, कर्मकांड, कुंडली निर्माण , न्यास योग व तनाव प्रबंधन में छह मासीय सर्टिफिकेट कोर्स यहां चलाया जाता है। इसके अलावा कैम्पस में ही स्ववित्त पोषित शिक्षा शास्त्र विभाग भी संचालित है जहां नियमित कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में डीएसडब्ल्यू सह व्यावसायिक शिक्षा केन्द्र निदेशक रहते हुए डॉ झा द्वारा झूठी जानकारी उपलब्ध कराना किसी को भी विस्मित कर देता है जबकि विश्वविद्यालय में छात्र हित से जुड़े सभी मामलों को देखने की जिम्मेदारी इन्हीं की है। यहां उल्लेखनीय है कि कुलसचिव डॉ साह ने 16 अगस्त, 23 को इसी झूठी रिपोर्ट को आधार बनाकर उच्च शिक्षा निदेशक को यह लिखते हुए जवाबी पत्र भेज दिया कि संस्कृत विश्वविद्यालय में वोकेशनल कोर्सेज नहीं चल रहा है और न ही ऐसे कोर्सेज की परीक्षाएं लंबित हैं। इसलिए 16 को आयोजित बैठक से मुक्त करना चाहेंगे। यहां एक बड़ी गड़बड़ी यह हुई कि कुलसचिव द्वारा शिक्षा विभाग को भेजे उक्त पत्र का न तो प्रारूप ही कुलपति से अनुमोदित कराया गया और न ही पत्र प्रेषण के लिए उनसे अनुमति ली गई जबकि विश्वविद्यालय अधिनियम ऐसा नहीं कहता है। यानी कि डीएसडब्ल्यू व प्रभारी कुलसचिव ने मिलकर अपने स्तर से ही झूठी सूचना सरकार को भेज दी।
प्रतिकुलपति ने जताई आपत्ति, लिखा पत्र
इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए प्रतिकुलपति डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह ने उच्च शिक्षा निदेशक,पटना एवं कुलपति को लिखे पत्र में आपत्ति जताते हुए कहा है कि पदाधिकारियों द्वारा गलत सूचना प्रेषित करने से विश्वविद्यालय की गरिमा धूमिल हुई है। उन्होंने पुष्टि करते हुए यह भी लिखा है कि संस्कृत विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित कोर्सेज चलता है और इसकी परीक्षाएं भी यहां से ली जाती है। इसलिए सही तथ्यों का निष्पादन होना चाहिए। डॉ सिंह ने अपने पत्र के साथ विश्वविद्यालय में संचालित हो रहे स्ववित्त पोषित कोर्सेज सम्बन्धी कागजात भी संलग्न किया है। ताकि मामला स्पष्ट हो जाय। वहीं दूसरी ओर, कुलसचिव डॉ साह के संदर्भ में उन्होंने एक और खुलासा किया है कि शिकायत कोषांग के मामले में पहले भी इन्होंने अपनी स्वेच्छाचारिता दिखाई है।