खगरिया में राजस्व महा अभियान के तहत चल रहे नामांतरण कार्य को लेकर उत्साह नहीं दिख रहा है। 19 और 20 अगस्त को सात अंचलों के 58 पंचायतों में आयोजित विशेष शिविरों में मात्र 41 आवेदन ही प्राप्त हुए। चौंकाने वाली बात यह रही कि खगड़िया प्रखंड में एक भी आवेदन नहीं आया, जबकि अलौली, चौथम, बेलदौर और गोगरी प्रखंड में आवेदन की संख्या दहाई तक भी नहीं पहुंच सकी। केवल परबत्ता प्रखंड में 17 आवेदन मिले, जो बाकी जगहों की तुलना में कुछ बेहतर है।

अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की जमीन को अब तक नामांतरण नहीं करा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि कानूनी विवाद और पारिवारिक झगड़े की स्थिति में उत्तराधिकारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

क्यों जरूरी है नामांतरण

ADM आरती ने बताया कि उत्तराधिकार या बंटवारा आधारित नामांतरण कराने से जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट हो जाता है। इससे जमीन बेचने, खरीदने और रजिस्ट्री कराने में आसानी होती है। बैंक से लोन लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में कोई रुकावट नहीं आती। भविष्य में पारिवारिक विवाद और कानूनी लड़ाई से बचाव होता है।

जागरूकता पर जोर

ADM आरती ने कहा कि लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि वे समय रहते अपने भू-अभिलेख अपडेट करा लें। यह अभियान भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने और ऑनलाइन जमाबंदी सुधार को लेकर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपील की कि लोग इस अवसर का लाभ उठाकर अपने पूर्वजों की जमीन को कानूनी रूप से अपने नाम पर दर्ज कराएं।