मधुबनी जिला के तात्कालीन एसडीपीओ के कार्यशैली का गंदा खेल ,शराब माफियाओं को बचाने में सारी हदें कर दी थी पार ,फिर भी नहीं हुई कोई कारवाई।एडीजी मुख्यालय के आदेश के बावजूद जांच रह गया ठंडे बस्ते में ,लेकिन कागज तों बोलता हें। इसीलिये तों बॉर्डर इलाके के थानों की लगती हें बोली।
मधुबनी जिला के तात्कालीन एसडीपीओ के कार्यशैली का गंदा खेल ,शराब माफियाओं को बचाने में सारी हदें कर दी थी पार ,फिर भी नहीं हुई कोई कारवाई।एडीजी मुख्यालय के आदेश के बावजूद जांच रह गया ठंडे बस्ते में ,लेकिन कागज तों बोलता हें। इसीलिये तों बॉर्डर इलाके के थानों की लगती हें बोली।
मधुबनी जिला के तात्कालीन एसडीपीओ के कार्यशैली का गंदा खेल ,शराब माफियाओं को बचाने में सारी हदें कर दी थी पार ,फिर भी नहीं हुई कोई कारवाई।एडीजी मुख्यालय के आदेश के बावजूद जांच रह गया ठंडे बस्ते में ,लेकिन कागज तों बोलता हें। इसीलिये तों बॉर्डर इलाके के थानों की लगती हें बोली।
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
मधुबनी जिला की पुलिस कागजी घोड़ा दौड़ाने में कैसे लुका -छुपी का खेल खेलती हें इन बातों का पर्दाफाश कागजों के ही अवलोकन से होगा ।इस जिला के पुलिसिया कितने करतूतों का दर परत खोला जाय ,जिंदगी भर लिखते रह जाएंगे लेकिन यह खेल समाप्त नहीं होने वाला खेल हें।इस खेल के आड़ में लाखों लाख का खेल होता हें।मधुबनी जिला का बॉर्डर इलाके का थाना इसी खेल के लिये मशहूर हें इसीलिये यहां थानों की बोली लगती हें और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लाख में वसूली भी होती हें।आम जनता का तों भगवान मालिक।
हम बात कर लेते हें तात्कालीन एसडीपीओ जयनगर के बारे में ,शराब के धंधे में लिप्त बड़े कारोबारी को उन्होंने कैसे प्राथमिकी में नामजद अभियुक्त बनाया और अपने पर्यवेक्षण टिप्पणी में कैसे बेगुनाह बता दिया था, यह जयनगर थाने में दर्ज कांड और पर्यवेक्षण टिप्पणी से पता चलेगा।
जयनगर एसडीपीओ ने चार दिसंबर 22को 11.45बजे गुप्त सूचना के आधार पर जयनगर कमला पुल के निकट से दस -ग्यारह मोटरसाइकिल को शराब के साथ खुद पकड़ा था लेकिन उसपर सवार सभी चालक पुलिस को देखते ही फरार हो गया था। एसडीपीओ के निर्देश पर थाना पुलिस ने इस मामले मे (482/22)मामला दर्ज किया। इस मामले मे पुअनि धीरेन्द्र सिंह के ब्यान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। नन्द कुमार गोइत पेसर ना मालूम ,नवीन गोइत एवं सुनील गोइत पिता नन्द कुमार गोइत ,उपेंद्र यादव पे उतिम यादव ,खन्ना मुखिया ,रोशन मुखिया दोनो पेसर गुदड़ी मुखिया तीनों साकिन कोरहिया ,लाल कुमार यादव पेसर राम चंद्र यादव साकिन डोरवार थाना जयनगर को अभियुक्त बनाया गया था इसके अलावे चार पांच अज्ञात थे।जब्ती सूची मे करीब दस ग्यारह मोटरसाइकिल को भी दर्शाया गया था ।
लेकिन जयनगर के तात्कालीन एसडीपीओ ने कुछ ही दिन बाद अपना कागजी घोड़ा दौड़ाया यानि पर्यवेक्षण टिप्पणी निकाला जिसमें तीन ऐसे लोग नामजद थे जो शराब के बहुत बड़े कारोबारी थे।इनका शराब नेपाल में तों बिकता ही था लेकिन बिहार के कोने कोने भी अवेध तरीके से सप्लाई किया जाता था।जयनगर अनुमंडल का हर बच्चा इस नाम से परिचित थे ।जयनगर से सटे नेपाल में शराब माफियाओं का लाईसेंसी दुकान था।प्राथमिकी मे दर्ज नामजद नन्द कुमार गोइत नेपाल के धनुषा जिला के फलवडीया ,जनकनन्दिनी 1 के स्थायी रहने वाला था।इनके दुकान का नाम भगवती कोस्ट स्टोर्स था । इन्हें मदिरा वितरक का लाइसेंस प्राप्त था ,इस लाइसेंस के तहत नेपाल मे वह मदिरा बेचता था ।लेकिन गोइत ने जयनगर अनुमंडल मे एक कपड़े की दुकान खोलकर वहां से पूरे बिहार मे नेपाल निर्मित शराब का बिक्री करता था, गौरव सोफी नेपाली शराब के नाम से आज के दिनों में भी चर्चित हैं और बिहार के जिलों में आज भी चोरी छिपे बिक ही रहा हें।
ऐसे शराब माफिया के बारे में एसडीपीओ ने पर्यवेक्षण में लिखा कि व्यापारिक द्वेष के कारण एवं प्रति स्पर्धा एवं राजनीति के कारण उनके विरोधी द्वारा पिता नन्द किशोर गोइत और उनके दोनों बेटे नवीन गोइत और सुनील गोइत को एक साजिश के तहत कांड मे नाम दे दिया गया हैं ,इन तीनों का खराब चरित्र नहीं हैं और कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हैं इसीलिये सभी बेगुनाह हैं।
अब यही एक सवाल हें ,एसडीपीओ द्वारा छापेमारी के दौरान शराब बरामद होना ,एसडीपीओ के निर्देश पर थाना के प्राथमिकी में शराब माफिया को नामजद करना फिर पर्यवेक्षण टिप्पणी में उसे बेगुनाह बताना इतनी बातें कैसे संभव हें ?
इस मामले को लेकर कई प्रतिनिधियों ने शोर मचाना शुरू किया ,सोशल मीडिया पर भी खबर चली इसके बाद मधुबनी के तात्कालीन एसपी सुशील कुमार ने डीएसपी के प्रतिवेदन को दरकिनार करते हुये तीनों के विरुद्ध कांड को सत्य करार दिया ,इस कारण जो जनप्रतिनिधि इस मामले को उठाया था उसके विरुद्ध झूठा मुकदमा कराकर एसडीपीओ ने जेल भेजवा दिया।एसडीपीओ की इस गलत कार्यशैली को लेकर तत्कालीन एसपी ने किसी वरीय पदाधिकारी को पत्र नहीं लिखा।हाँ दस्तक 7मीडिया ने जब इसे प्राथमिकता से उजागर किया तों जानकारी मिली कि तत्कालीन एडीजी मुख्यालय जे एस गंगवार ने इस मामले को प्रमुखता से लिया और आईजी के माध्यम से इसकी जांच मधुबनी के तात्कालीन एक डीएसपी को दिया लेकिन अपने सहयोगी डीएसपी के विरुद्ध उन्होंने भी जांच प्रतिवेदन में कुछ नहीं लिखा।हालांकि तात्कालीन डीएसपी का कहना हें कि उन्हें कोई जांच नहीं मिला।
मजेदार बात तों अब यह हें कि जिस निगरानी विभाग को इन्हें ट्रेप करना चाहिये था अब वे निगरानी विभाग का शोभा बढ़ा रहें हें।
यहां बता दे कि महज चार पांच सालों का मधुबनी जिला के बॉर्डर इलाकों के थानों में शराब मामले से जुड़े या फिर एससी /एसटी मामलों से जुड़े मामलों का ठीक से वरीय पदाधिकारी अवलोकन कर ले तों सभी राज खुल जाएंगे।
खुद पकड़कर एफआईआर कराना ,कांड में आरोपी बनाना फिर शराब माफिया को क्लीन चिट देना यही तों कागजी घोड़ा हें।
यह लाइसेंस नन्द कुमार गोइत का हैं जो नेपाल से निर्गत हैं और बाप बेटा सभी मिलकर दुकान को चलाता था।
कोतवाली थानाध्यक्ष नीतीश ने संभाला पद भार ,कहा कानून संगत लोंगों का थाना पुलिस करेगी स्वागत ,कानून विरोधी काम करने वाले या तों उनका इलाका छोड़ दे ,या फिर जाएंगे जेल।
गुड़िया हत्याकांड को लेकर उठने लगी हें मांग ,शिवाजी नगर के तत्कालीन थानाध्यक्ष पर भी हो हत्या का मुकदमा ,हत्यारे को जल्द पकड़े पुलिस ,निलंबन और विभागीय कारवाई पर्याप्त नहीं ?