मधुबनी जिला के पांच बॉर्डर थाने में हुई पोस्टिंग के मामले में सवालों के घेरे में वरीय पुलिस पदाधिकारी ,शराब तस्कर को सह देने वाले पुलिस पदाधिकारी को बना दिया जाता हें थानेदार ,”कि पैसा बोलता हें “?
मधुबनी जिला के पांच बॉर्डर थाने में हुई पोस्टिंग के मामले में सवालों के घेरे में वरीय पुलिस पदाधिकारी ,शराब तस्कर को सह देने वाले पुलिस पदाधिकारी को बना दिया जाता हें थानेदार ,”कि पैसा बोलता हें “?
मधुबनी जिला के पांच बॉर्डर थाने में हुई पोस्टिंग के मामले में सवालों के घेरे में वरीय पुलिस पदाधिकारी ,शराब तस्कर को सह देने वाले पुलिस पदाधिकारी को बना दिया जाता हें थानेदार ,”कि पैसा बोलता हें “?
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
मधुबनी जिले में पांच थानेदारों की पोस्टिंग चर्चा का विषय बन गया हें,चर्चा यही कि 25लखिया पोस्टिंग हें ,जबकि समस्तीपुर और दरभंगा जिला के एसपी/एसएसपी जिला में योगदान दिये पुलिस पदाधिकारियों की पोस्टिंग के लिये उनकी जन्म कुंडली खंगाल रहें हें ताकि आने वाले चुनाव में बेहतर थानेदारों की पोस्टिंग हो,कई थाने खाली हो गये हें लेकिन समस्तीपुर और दरभंगा में पोस्टिंग अभी तक नहीं हुई हें।हाँ कुछ थानों में जेएसआई में पोस्टिंग जरूर हुई हें।
25लखिया बॉर्डर वाला जिला मधुबनी हें फिर जल्दबाजी क्यूँ ना हो ?बाहर जिला से आये पुलिस पदाधिकारियों का इंतजार ऐसे में क्यूँ किया जाय ।मजेदार बात यह हें कि दलाल सिपाही के आगे पैसों की चाहत में सभी वरीय पुलिस पदाधिकारी अंधे हो जाते हें ,वजह साफ हें कि इन पैसों की बंदरबाट नीचे से उपर तक होती हें।उपर बैठे पदाधिकारी भी सह दे जाते हें।यह सारा खेल अप्रत्यक्ष रूप में होता हें लेकिन कागजों के खेल का अवलोकन हो तों सारा भेद खुल जाएगा।
पांच थानेदारो की पोस्टिंग 8अगस्त को हुई हें ।इस पूरे पहलू में मजेदार बात यह हें कि दूसरे जिलों से बदलकर आये एक भी पदाधिकारियों की पोस्टिंग इन पांचों थाने में नहीं हुई। थानेदारो की इस पोस्टिंग में हरि ॐ कहने वाले और विकास कार्य में प्रगति लाने वालों की अहम भूमिका बताई जा रही हें ।
जिन थानेदारों की पोस्टिंग हुई हें इसमें पुनि मनोज कुमार को सकरी थाना ,पुनि अखिलेश कुमार को लौकहा थाना ,पुनि अनूप कुमार को लदनिया थाना ,पुनि रंजीत कुमार को हरलाखी थाना एवं पुअनि विकास कुमार को बासोंपट्टी थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी एसपी ने सौंपी हें या यूं कहें कि हरि ॐ और विकास की कृपा इन सब पर बरस पड़ी हें,पुलिस सूत्र बताते हें कि 20से 25लाख में इन थानों में पोस्टिंग हुई हें।
एक दो नहीं एक दर्जन से उपर पुलिस सूत्र बताते हें कि उक्त पांचों थानाध्यक्षों में अनूप कुमार की बात ही निराली हें।इन्हें लगातार बॉर्डर थाने की जवाबदेही मिलती रही हें,और वरीय पुलिस पदाधिकारी के सह के बाद यह पोस्टिंग हुई हें।
सूत्र बताते हें कि अनूप कुमार का स्थानांतरण मुजफ्फरपुर जिला से मधुबनी जिला के लिये किया गया था तों पुलिसकर्मियों में चर्चा थी कि इनपर मुजफ्फरपुर जिला में कई संगीन और बड़े आरोप लगे थे और इसी कारण इनका तबादला मधुबनी जिला हुआ था। लेकिन कुछ ही दिनों में इनकी पोस्टिंग जिले के सबसे “मालदार थाना जयनगर” में हो गई । जयनगर में तों पहले से विप्लव मचा हुआ था लेकिन यह थानेदार उन पर भी भारी गया। पुलिस सूत्र बताते हें कि जयनगर थाने के एक सिपाही को गोली लगी थी इस मामले को डीआईजी बाबू राम ने गंभीरता से लिया जिस कारण जयनगर थाना से इन्हें निलंबित कर दिया गया था।पुलिस सूत्र बताते हें कि शराब की धारा नेपाल से जयनगर तक बहाने के क्रम में इन्होंने एक शराब तस्कर गिरोह को काफी सपोर्ट किया था जो बड़े पैमाने पर तस्करी करता था और उसके कहने पर ही विरोधी खेमा का शराब पकड़ लिया। विरोधी खेमा इससे आजिज होकर पेंथर सिपाही पर गोली चला दिया ,जिससे सिपाही बुरी तरह जख्मी हो गया , आश्चर्य जनक बात तब हो गई जब सिपाही को गोली लगी तों सहयोगी शराब तस्कर का स्कार्पियो घटनास्थल पर ही मौजूद था , उसी स्कार्पियो से पुलिस जख्मी सिपाही को इलाज के लिये उठाकर अस्पताल ले गया। समझदार के लिये इतना इशारा काफी हें कि स्कार्पियो पहले से वहां क्यूँ मौजूद था? इस मामले को लेकर डीआईजी बाबू राम ने एसपी के माध्यम से थानेदार से स्पष्टीकरण पूछा था लेकिन मामले में कागजी खानापूर्ति हो गई और कहा जाता हें कि इस मामले में उनपर कोई विभागीय कारवाई नहीं हुई।अगर विभागीय कारवाई हुई रहती तों आज थानेदार नहीं बनते।
सूत्रों पर भरोसा करें तों पुनि अनूप की पोस्टिंग जयनगर थाने में 2नवंबर 23को हुई थी और 19जून 24को इसी मामले में कारवाई हो गई थी,इन्हें लाईन क्लोज किया गया था।ऐसे गंभीर मामलों में पुलिस विभाग में निलंबन और विभागीय कार्यवाही चलती हें,लेकिन इनपर विभागीय कारवाई नदारद। हरि ॐ की कृपा दृष्टि के कारण कुछ महीनों के बाद इनकी पोस्टिंग पुनः नेपाल बॉर्डर के थाना हरलाखी में 7मई 25को की जाती हें ,मगर तीन माह अभी बीते भी नहीं हें इनकी पोस्टिंग फिर से नेपाल बॉर्डर के लदनिया थाने में हो जाती हें। जैसे लगता हें कि हरलाखी थाने के दो साल का टारगेट इन्होंने तीन महीनों में ही पुरा कर लिया हो । ऐसा दिख रहा हें कि जयनगर में इनका कुछ ज्यादा ही जय -जय हें क्यूंकि हरलाखी जयनगर से ठीक बगल में पश्चिम तथा लदनिया ठीक पूरब हें जहां जहां इनकी पोस्टिंग हुई,ऐसा लगता हें कि बॉर्डर इलाके के सक्षम थानेदार यही हें।
अगर नियमों की बात करें तों सरकारी नियमानुसार थाने में पोस्टिंग के बाद दो साल तक उन्हें थानेदारी करनी हें इस बींच अगर उनपर कोई आरोप लगता हें और आरोप सिद्ध होता हें तों एसपी द्वारा कारवाई कर हटाया जा सकता हें लेकिन पुनि अनूप के मामले में ऐसा कुछ हुआ नहीं और उन्हें महज तीन महीना में ही हरलाखी से बदलकर लदनिया थाना में पोस्टिंग 8अगस्त 25 को हो जाती हें।यही नहीं सदर अंचल के पुलिस निरीक्षक अखिलेश कुमार का एक साल के करीब बीता ही हें और उन्हें लोकहा थाना में थानाध्यक्ष पद पर आसीन कर दिया गया।जिला में और भी कई पुनि हें जिन्हें पोस्टिंग नहीं किया गया हें जबकि कई पुनि ऐसे हें जो बेहतर पुलिसिंग करने में माहिर हें।
यूं कहें तों एक सिपाही का दिमाग और वरीय पुलिस अधिकारियों के कागजी खेल का पन्ना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में पर्याप्त हें।मधुबनी जिला में थानेदार कम वर्दी के रूप में शराब माफिया ज्यादा हें।पुलिस सूत्र बताते हें कि इसी कारण बॉर्डर इलाके सहित अन्य थानो की बोली लगती हें।
मधुबनी जिला में अप्रत्यक्ष रूप से कैसे कागजी खानापूर्ति कर अवैध पैसों की उगाही होती हें और प्रत्यक्ष रूप में पाक साफ हो जाती हें इसका नमूना कल दस्तक 7मीडिया प्रकाशित करेगा।