नेपाल में हो रही लगातार बारिश के कारण कनकई नदी का जलस्तर बढ़ गया है। किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड में कनकई नदी के कटाव से प्रभावित पत्थरघट्टी पंचायत के बालुबारी सहित अन्य गांवों में कटावरोधी कार्य शुरू हो गया है। रविवार को भी यह कार्य जारी रहा।

प्रशासन की इस पहल से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है। लेकिन बांस-बल्लों के सहारे हो रहे अस्थायी कटावरोधी कार्य को लेकर संशय भी बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इस तरह के कार्य से नदी के कटाव को लंबे समय तक रोका जा सकेगा या नहीं। प्रशासन के अनुसार, जल्द ही बालू भरे बैगों से भी कटावरोधी कार्य शुरू किया जाएगा।

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से निकलकर दिघलबैंक प्रखंड से होकर बहने वाली कनकई नदी हर साल बाढ़ और कटाव का कहर बरपाती है। इस बार पत्थरघट्टी पंचायत सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां बालुबारी गांव में कटाव के कारण दो दर्जन से अधिक परिवार विस्थापित हो चुके हैं।

बांस के बल्लियों के सहारे मरम्मत करते लोग।

25 परिवार विस्थापित

बचे हुए परिवार भी नदी की तेज धारा और अस्थायी कटावरोधी कार्यों के कारण पलायन की तैयारी कर रहे हैं। कनकई नदी ने इस बार बालुबारी के अलावा गुवाबारी, बच्चा गुवाबारी और दोदरा गांवों को भी अपने निशाने पर लिया है। बालुबारी में दो दिनों में 25 परिवार विस्थापित हुए हैं।

अन्य गांवों में भी नदी जगह-जगह कटाव कर रही है। शनिवार से कटाव की रफ्तार में कमी आई है और प्रशासन ने कटावरोधी कार्य शुरू किया है। लेकिन इस कार्य की प्रभावशीलता मानसून और नदी के उफान पर निर्भर करेगी।

नदी के उफान में आने से कई घरों को खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी फिर से उफान पर आई तो स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रशासन की ओर से ठोस और दीर्घकालिक उपायों की मांग बढ़ रही है, ताकि हर साल होने वाले इस संकट से निजात मिल सके।