किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड के पथरघट्टी पंचायत में कनकई नदी का जलस्तर बढ़ने से कटाव तेज हो गया है। शुक्रवार को नदी के उफान ने बालूबारी गांव में कई परिवारों के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे ग्रामीण अपने घरों को खुद तोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं।
लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से बालूबारी वार्ड संख्या 8 में कई घर नदी में समा गए हैं। इससे गांव में दहशत का माहौल है। पथरघट्टी पंचायत के पूर्व वार्ड सदस्य साकिर आलम उर्फ शकील ने बताया कि बारिश के बाद कनकई नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।
गांवों में कटाव का खतरा
इससे बालूबारी, छोटा गोवाबारी, ग्वालटोली और दोदरा जैसे गांवों में कटाव का खतरा मंडरा रहा है। बालूबारी में कई परिवारों के घर नदी की भेंट चढ़ गए हैं। ग्रामीण अपनी मेहनत से बनाए आशियानों को खुद तोड़ रहे हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि कुछ सामान बचा सकें।
कटाव निरोधी कार्यों की मांग
कटाव की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से बोल्डर पिचिंग जैसे कटाव निरोधी कार्यों की मांग की है। वे चाहते हैं कि इससे गांव को बचाया जा सके। फिलहाल, ग्रामीण अपने स्तर पर बांस की पाइलिंग के जरिए कटाव रोकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है।
खेती योग्य जमीनें भी हुई बर्बाद
कनकई नदी के रौद्र रूप ने न केवल घरों को नष्ट किया है, बल्कि खेती योग्य जमीनों को निगल लिया है। गांव में भय और अनिश्चितता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव निरोधी कार्य नहीं किए गए, तो पूरा गांव नदी में समा सकता है।
बिना सरकारी सहायता आपदा से निपटना मुश्किल
स्थानीय प्रशासन से ग्रामीणों ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि बिना सरकारी सहायता के इस आपदा से निपटना मुश्किल है। प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास और कटाव रोकने के ठोस उपाय करने चाहिए। इससे ग्रामीणों का जीवन और आजीविका सुरक्षित हो सकेगी।
