दरभंगा के बिरौल में सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों पर, करोड़ों खर्च, जनता को फायदा नहीं।

दस्तक7मिडिया उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

सरकार आम लोगों के कल्याण के लिए हर साल करोड़ों रुपये की लागत से अनेकों योजनाएं बनाती है, जिनका लक्ष्य समाज के हर तबके को लाभ पहुंचाना होता है। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन अक्सर सवालों के घेरे में रहता है। दरभंगा ज़िले के बिरौल अनुमंडल क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां पंचायत और मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की प्रभावहीनता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद,आम जनता को इनका अपेक्षित लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।


बिरौल अनुमंडल से गुज़रने वाले किसी भी व्यक्ति को यहां की बदहाल सड़कें और अधूरा नाला का निर्माण कार्य आसानी से नज़र आ जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर निर्माण विभाग अथवा पंचायत मद से कई सड़कों के निर्माण और मरम्मत का काम किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि ज़्यादातर सड़कें या तो अधूरी पड़ी हैं या फिर कुछ ही समय में टूट-फूट गई हैं। ये सड़कें बरसात में और भी ज़्यादा खराब हो जाती हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों को कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है, जो उनकी रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करता है। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना और बुनियादी ढांचे का विकास करना है। लेकिन बिरौल में कई जगहों पर मनरेगा के तहत हुए काम या तो गुणवत्ताहीन हैं या फिर सिर्फ कागजों पर पूरे कर दिए गए हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार उन्हें यह भी नहीं पता होता कि उनके गाँव में मनरेगा के तहत कौन-सा काम चल रहा है या फिर उसका क्या लाभ मिलने वाला है। इससे फंड के दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगते रहे हैं। उन लोगों का मानना है कि ऐसे योजना को बंद कर देना चाहिए। पंचायत स्तर पर भी योजनाओं के क्रियान्वयन में कमियां साफ दिख रही हैं। नालियों का अधूरा निर्माण, पानी की निकासी की समस्या और सार्वजनिक स्थलों की बदहाली जैसी शिकायतें आम हैं। ये सभी समस्याएं स्थानीय लोगों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित करती हैं। सीपीएम माले नेता वैद्यनाथ यादव, रोहित सिंह, मनोज यादव सहित कई लोगों का मानना है कि जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो यह देखना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि इन योजनाओं का लाभ सही तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचे। जनता की बेबसी और उनकी समस्याओं को अनसुना करना एक बड़ी चुनौती है।

 

जब तक सरकार और प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं देंगे, तब तक करोड़ों रुपये की ये योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह जाएंगी और आम जनता बदहाली का जीवन जीने को मजबूर होगी। यह समय है कि नीतियों को जमीनी हकीकत के अनुरूप बनाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे।