सुपौल सदर अस्पताल में कार्यरत डीपीएम ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया तो थोड़ी देर बाद उनकी हेल्थ मैनेजर पत्नी ने पति की देखभाल के नाम पर त्यागपत्र सौंप दिया।
पहले पति फिर पत्नी ने दिया इस्तीफा, पावर कपल के नौकरी छोड़ने की कहानी फिल्मी है साल 1981 में बॉलीवुड की एक फिल्म आई थी। प्यासा सावन। इस फिल्म का एक गाना आज भी लोगों की जुबान पर है…तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, अंधेरों से भी मिल रही रोशनी है। इस गाने की चर्चा यहां इसलिए, क्योंकि सामान्य जीवन में पति-पत्नी सात फेरे लेने के बाद सात जन्मों तलक एक-दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खाकर दो जिस्म एक जान हो जाते हैं।
फिर उनमें से किसी एक का दुख दूसरे का और दूसरे का सुख अपना लगने लगता है। इन दिनों सुपौल जिले के स्वास्थ्य विभाग के दो वरीय अधिकारी दंपती भी एक बार फिर से इसी कसम को निभा रहे हैं। वह भी इस कदर कि एक ने स्वास्थ्य कारणों से नौकरी से इस्तीफा दिया तो दूसरे ने भी उनकी देखभाल का हवाला देकर नौकरी से त्याग पत्र दे दिया है।
यहां तक तो ठीक है कि पति का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा तो पत्नी उनकी देखभाल करेंगी, लेकिन नौकरी से त्याग पत्र देकर यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही। इसको लेकर शहरवासियों समेत स्वास्थ्य विभाग में भी चर्चा आम है। डीपीएम के सर्टिफिकेट फर्जी की सूचना पर बिठाई गई थी जांच दरअसल, सदर अस्पताल के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मिन्नतुल्लाह के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की सूचना पर जिला स्वास्थ्य समिति व जिला प्रशासन की ओर से जांच बैठा दी गई। इसके बाद स्वास्थ्य समिति ने डीपीएम के सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की मूल प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
खबर चर्चा में आने के बाद डीपीएम ने एक अगस्त की सुबह ही अवकाश पर चले गए थे। वहीं अब दो अगस्त को डीपीएम मिन्नतुल्लाह ने छुट्टी पर रहते हुए ही सिविल सर्जन सह सदस्य सचिव जिला स्वास्थ्य समिति सुपौल को उनके ऑफिसियल मेल पर त्याग पत्र लिख भेजा है। अपने त्याग पत्र में उन्होंने लिखा है कि, ‘मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है, जिसके कारण मैं कार्यालय कार्य करने में असमर्थ महसूस कर रहा हूं। उक्त के कारण मैं दिनांक 02 अगस्त 2025 के पूर्वाह्न में अपना त्यागपत्र भवदीय के समक्ष समर्पित कर रहा हूं।
डीपीएम पति के इस्तीफा देते हेल्थ मैनेजर पत्नी ने भी सौंपा त्यागपत्र इधर, पति के इस्तीफा देने के साथ ही डीपीएम की पत्नी सह अनुमंडलीय अस्पताल निर्मली की अस्पताल प्रबंधक निखत जहां प्रवीण ने भी दो अगस्त को सिविल सर्जन को उनकी ऑफीसियल मेल आईडी पर त्यागपत्र भेज दिया है। अपने त्याग पत्र में निखत ने लिखा है कि, मेरे पति का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, जिसके देखभाल हेतु मेरा उनके साथ रहना अति आवश्यक है। उक्त के कारण मैं दिनांक 02.08.2025 के पूर्वाह्न में अपना त्यागपत्र भवदीय के समक्ष समर्पित कर रही हूं।
गौरतलब है कि, निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल की अस्पताल प्रबंधक से भी जिला स्वास्थ्य समिति ने बीते 31 जुलाई को उनके सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद सिविल सर्जन ने अनुमंडलीय अस्पताल निर्मली के अस्पताल प्रभारी को अस्पताल प्रबंधक निखत जहां प्रवीण के सारे शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिये थे। इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि डीपीएम व अस्पताल प्रबंधक दोनों अपना इस्तीफा विभाग को सौंप देंगे।
क्या है पूरा मामला दरअसल, मेघालय के जिस चंद्र मोहन झा (सीएमजे) विवि से डीपीएम ने मैनेजमेंट की डिग्री ली थी, वह साल 2014 में ही कुप्रबंधन व अन्य कमियों के कारण बंद कर दिया गया था। साल 2014 में ही मेघालय सरकार ने कुप्रबंधन और अन्य कमियों के कारण विश्वविद्यालय को बंद करने का आदेश दिया था। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी साल 2025 में इस फैसले को बरकरार रखा है।
वहीं यूजीसी (विवि अनुदान आयोग) ने भी सीएमजे विश्वविद्यालय को फर्जी घोषित किया है और शिक्षा विभाग को इस मामले में कार्रवाई करने की सिफारिश की है। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कहीं डीपीएम के साथ-साथ उनकी पत्नी व निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल की अस्पताल प्रबंधक निखत जहां प्रवीण के शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी तो फर्जी नहीं हैं।
