जनता कोशी महाविद्यालय मनाया मुंशी प्रेमचंद की 144वीं जयंती।

दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी कथा साहित्य के शिल्पकार मुंशी प्रेमचंद की 144वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष समारोह का केंद्रीय विषय था –प्रेमचंद के साहित्य में दलित जीवन और चिंतन। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सूर्य नारायण पांडे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य ‘अभिजात्य’ को तोड़ता है और ‘दलित’ को मुखर करता है। उन्होंने शोषित वर्ग को साहित्य का नायक बनाया।उन्होने सद्गति और ठाकुर का कुआं जैसी कहानियों के माध्यम से सामाजिक चेतना को रेखांकित किया। हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राम शेख पंडित ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि “प्रेमचंद पर अम्बेडकर के वैचारिक प्रभाव और गांधी से उनका सृजनात्मक टकराव दलित साहित्य को नई दिशा देता है। उन्होंने गोदान, कफन, सद्गति जैसी रचनाओं का विश्लेषण करते हुए प्रेमचंद को सामाजिक क्रांति का संवेदनशील दृष्टा कहा।मंच संचालन हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ.शंभू पासवान ने किया।उन्होंने प्रेमचंद को उद्धृत करते हुए कहा जब तक समाज में शोषण है, तब तक साहित्य को केवल मनोरंजन नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रतिरोध का औजार बनना चाहिए।डॉ.आबिद करीम (उर्दू विभाग)प्रेमचंद के ‘गोदान’ में हिन्दुस्तान का छलकता हुआ दिल मौजूद है।”उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने उर्दू-हिन्दी में शोषित समाज की संवेदना को जिस तरह उकेरा, वह आज भी प्रासंगिक है। डॉ.शारदा देवी (राजनीति विज्ञान विभाग) प्रेमचंद ने यथार्थ को साहित्य का सौंदर्य बनाया उन्होंने गहनों और राजाओं को नहीं, भूख और अन्याय को लिखा।डॉ. गोपाल कुमार (समाजशास्त्र विभाग) प्रेमचंद ने स्त्रियों को केवल करुणा की वस्तु नहीं, आत्म-सम्मान और विचार की धुरी के रूप में प्रस्तुत किया।डॉ.प्रियंका (दर्शनशास्त्र),प्रेमचंद के पात्रों की वैचारिक संघर्ष यात्रा को समझाया और कहा कि “वो लेखक नहीं, विचारधारा थे। डॉ.राधा (रसायन विभाग),उन्होंने प्रेमचंद की वैज्ञानिक दृष्टि और समाजशास्त्रीय यथार्थ को उनके लेखन में खोजा।डॉ.दिलीप कुमार (राजनीति विज्ञान),प्रेमचंद को दलित चेतना का जनसाहित्यकार बताया। डॉ. शिवकुमार (संस्कृत विभाग),प्रेमचंद की रचनाओं को संस्कृत परंपरा से जोड़ते हुए सामाजिक मूल्यों की व्याख्या की। डॉ.आरती (वनस्पति विज्ञान विभाग)धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उन्होंने कह”प्रेमचंद ने वृक्षों की तरह समाज के उपेक्षित वर्गों को सींचा- उनका साहित्य न्याय का बीज है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं में किरण कुमारी,मो.ईशा, सोनी कुमारी, ऋतु कुमारी, नीतीश कुमार, सुभाष कुमार, मंतोष कुमार, कुलदीप कुमार आदि ने प्रेमचंद की ठाकुर का कुआं, सद्गति, कफन जैसी रचनाओं में दलित जीवन और सामाजिक विषमता पर प्रभावशाली वक्तव्य दिए।