साइबर सिटी की समस्या को लेकर मानवाधिकार फोरम ने मंत्रालय को लगाई गुहार।
साइबर सिटी की समस्या को लेकर मानवाधिकार फोरम ने मंत्रालय को लगाई गुहार।
साइबर सिटी की समस्या को लेकर मानवाधिकार फोरम ने मंत्रालय को लगाई गुहार।
दस्तक7मिडिया गुरुग्राम;
शहर की जर्जर होती सड़कों, जलभराव, ट्रेफ़िक और गंदगी की समस्या के समाधान को लेकर मानवाधिकार एक्शन फोरम के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व समाजसेवी ईं आरके जायसवाल ने शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार से पत्र लिखकर गुहार लगाई है। पत्र में लिखा है की देश की “आधुनिक साइबर सिटी” की स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है। शहर के सड़कों की हालत खस्ता है, जलनिकासी का अभाव है, और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्थिति न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि नागरिकों की जान-माल को भी गंभीर खतरे में डाल रही है। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, स्ट्रीट लाइटें बंद हैं और बरसात में गलियों में जलभराव से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। मच्छरों का प्रकोप और बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं।
साथ ही पत्र को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सचिव व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अग्रेसीत करते हुए लिखा है की शहर को सबसे ज़्यादा लक्ज़री कारों वाला शहर व सबसे ज़्यादा टैक्स चुकाने वाले शहरों में शामिल इस मशहूर साइबर सिटी का ज़िम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं हैं। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है की शहर के लोगों का आर्थिक नुक़सान तो है ही लोग मानसिक व शारीरिक रूप अस्वस्थ हो रहे हैं, साथ ही भारी राष्ट्रीय नुक़सान भी निश्चित तौर पर है। इस शहर के गगनचुंबी इमारतों में विश्वभर के हज़ारों कंपनियों मुख्यालय मौजूद है। वहीं एक उदाहरण देते हुए लिखा है की जहाँ शहर के ही सबसे नामी डेवलपर द्वारा बनाये गए गोल्फ रोड से निगमों द्वारा तैयार किए गए कोई भी अन्य सड़क की तुलना की जाए तो निगम की सड़कें आधे से भी कम अवधि में टूट जाती है। यह घटिया निर्माण कार्य व गुणवत्ता को दर्शाता है तथा भ्रष्टाचार को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने इन सभी मुद्दों को संज्ञान में लेकर संबंधित विभागों को निर्देशित करने व सड़कों के कार्य की गुणवत्ता को तकनीकी तौर पर जाँच की मांग कि है और निरीक्षण हेतु एक उच्च स्तरीय टीम भेजने का भी आग्रह किया गया है ताकि शहर की बुनियादी समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके।