दरभंगा

दरभंगा में” एम्स “को लेकर राजनीति सरगर्मी चरम पर हैं। पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप लगा रहें हैं।

ऐसे में दरभंगा के विकास की कोई बात करता हें तो यह बेईमानी हें।इन दिनों प्रधानमंत्री का एक बयांन चर्चाओ में जोर पकड़ा कि दरभंगा में एम्स बन गया हें और कई लोग वहां कार्य भी कर रहें हें। फिर क्या था ,बिहार के मुख्यमंत्री का ब्यान आ गया ,इन्होंने कहा कि डीएमसीएच परिसर का इलाका व्यस्त जगहों में एक था और जमीन भी कम पर रही थी इसलिये शोभन बाईपास पर एम्स का निर्माण होना ही सही हें और जान बूझकर केन्द्र सरकार इस परियोजना को लटका दिया हें।अब प्रधानमंत्री के बातों को गौर करें तो उन्होंने जो कहा उसके मुताबिक डीएमसीएच में मट्टी का भराई हो गया ,ऊर्जा भवन बन गया ,एम्स के डाईरेक्टर की नियुक्ति हो गई ,कई ऐसे काम हें जो हो गये थे ।

इसी बीच एनडीए की सरकार इंडिया हो गयी।मुख्यमंत्री ने एम्स का स्थानांतरित करते हुये शोभन कर दिया और कई कारण बताते हुये प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेज दिया।अब एनडीए के इंडिया हो जानें के बाद केन्द्र सरकार कैसे मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करती,फिर जो होना था वहीं हुआ।हालांकि देखा जाय तो पर्याप्त जगह होने के कारण एम्स के लिये उपयुक्त जगह शोभन  हें। कई जिलों के लोग यहां आसानी से आ जा सकते हें जब्कि डीएमसीएच व्यस्त इलाका हें।  शोभन में एम्स के प्रस्ताव के बाद इलाके के लोंगों में खुशी हुई।कई भूमाफिया जमीन खरीदने लगे। किसान को भी फायदा हुआ जमीन ऊंची दामों पर बिकने लगे। अचानक बात होने लगी कि एम्स का निर्माण शोभन में नहीं होगा। केंद्रीय टीम ने कहा कि एम्स निर्माण के लिये शोभन बाईपास सही जगह नहीं हें। बीस -पच्चीस फिट खाई हें।

इन तमाम बातों को एक एक कर आप देखेंगे तो अब एम्स बस राजनीतिक मुद्दा हें जिसे भुनाने में बीजेपी और महागठबंधन के लोग एड़ी चोटी एक कर दिये हें। लोकसभा चुनाव 2024में होना हें और इसी लोकसभा को लेकर वोट की राजनीति चरम पर हें।
राजनीति एक ऐसा व्यवसाय हें जहां दुकानदारी सिर्फ वोट से होती हें और इसे पक्ष में करने के लिये आरोप -प्रत्यारोप जरूरी हें और इतना जरूरी हें कि सुदूर के गांव से लेकर बच्चे के जुबान पर यह बातें आ जाएं और चौक चौराहों पर चर्चा का विषय बन जाय। आप अक्सर देखेंगे बस एक नेता कुछ बोला  नहीं बस दूसरा नेता उस बात को लपक लेता हें और गदर मचाने लगता हें । नेताओं की दुकानदारी आरोप प्रत्यारोप हें।
क्षेत्र का बिकास कैसे हो ,किस तरह से हो इससे स्थानीय नेताओं को कोई मतलब नहीं हें ,इन्हें वोट से मतलब हें।
अभी लोकसभा चुनाव तक यह चर्चा और जोर पकड़ेगी ,नतीजा कुछ नहीं निकलेगा। यह एम्स राजनेताओं के भेंट चढ़ गया। किसी नेताओं की इक्षा शक्ति में यह बात नहीं हें कि एम्स अगर दरभंगा में कहीं बनता हें तो ज्यादा लाभ दरभंगावासियों को ही हें। एम्स के मुद्दे पर सभी स्थानीय नेताओं को नेतागिरी नहीं कर बल्कि इसे स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि दरभंगा के अलावे पूरा मिथिलांचल को इसका लाभ मिल सके। यही नहीं शहर के बाहर अगर कहीं एम्स बनता हें तो हर्ज क्या हें ,दरभंगा का विस्तार होगा ,ग्रामीण इलाके का उद्धार होगा। इसके बनने के लिये दलगत राजनीति कितना उचित हें ?एम्स के निर्माण में केन्द्र सरकार निर्णय लेती हें तो फायदा आमलोगों को ही होगा और स्वाभाविक हें कि लोंगों की नजर में केन्द्र सरकार ही रहेगी  और इसका प्रतिफल भी केन्द्र सरकार को मिलेगा। ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार को राज्य सरकार के प्रस्ताव पर सहमति देना चाहिये और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिये ,अवरोधक नहीं बनना चाहिये क्यूंकि जनता सब देख रही हें और इसका दुष्प्रभाव भी पर सकता हें।