भूकम्प के पूर्वानुमान को मलेशिया में समझाएंगे डॉ राजनाथ,
संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र ने बढ़ाया गौरव,

अमेरिकी संस्था द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जुटेंगे कई नामचीन ज्योतिषी,

वैश्विक मंच पर चार दिनों तक ज्योतिष परंपरा को डॉ राजनाथ देंगे मुख्य स्वर।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /

प्राच्य विद्या के चर्चित केंद्र कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के लिये एक बहुत बड़ा गौरव का विषय है कि यहां के एक पुराने छात्र व शोधार्थी रहे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा आगामी 29 जुलाई से 02 अगस्त 2025 तक मलेशिया में आयोजित ‘ श्री सुब्रमण्यम एस्ट्रोलॉजिकल एंड स्पिरिचुअल कन्वोकेशन ‘ में मुख्य अतिथि वक्ता होंगे। इससे भी खास बात यह है कि इंटरनेशनल वैदिक एस्ट्रोलॉजी फेडरेशन (अमेरिका) द्वारा आयोजित इस भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वभर के ख्यातिप्राप्त ज्योतिष के जानकार व आध्यात्मिक मनीषी भी भाग लेंगे और उनके बीच डॉ झा भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं के वैदिक पूर्वानुमान विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करेंगे। जाहिर है ऐसे गूढ़ विषय पर मुख्य फोकस रखने से वैश्विक मंच पर भारत की वैदिक वैज्ञानिक दृष्टि को मजबूती मिलेगी और इसका पूरा श्रेय डॉ झा को जाएगा। इसके अलावा मलेशिया के सम्मेलन के दौरान ज्योतिष विद्या में निहित लौकिक एवं पारलौकिक चेतना पर भी उनके द्वारा एक सारगर्भित व्याख्यान दिया जाएगा।

उक्त जानकारी देते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी निशिकांत ने बताया कि डॉ राजनाथ झा ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान, पटना के निदेशक भी हैं और वे पूर्व में भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बिहार की समृद्ध ज्योतिषीय परंपरा को भरपूर प्रतिष्ठा दिला चुके हैं। एक सवाल के जवाब में डॉ झा कहते हैं कि बिहार आर्यभट्ट, वराहमिहिर और हेमांगद ठाकुर जैसे महान ज्योतिर्विदों की भूमि रही है। हमारी वैदिक परंपरा में निहित ज्योतिषीय ज्ञान ने विश्व को नई दिशा दी है। यदि आज भी बिहार में शोध और अध्ययन हेतु वेधशालाओं तथा संसाधनों की समुचित व्यवस्था हो तो यह प्रदेश पुनः ज्योतिष के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

नैक टीम ने भी की थी तारीफ

बता दें कि नैक टीम ने 2016 में जब संस्कृत विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया था तो ज्योतिष विभाग में टीम सदस्यों के समक्ष डॉ झा ने भूकम्प के पूर्वानुमान पर अपनी विवेचनाओं से सभी को चौका दिया था। वैदिक गणनाओं और खगोलीय संकेतों के आधार पर उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व सूचना को परखने व समझने की जरूरत बताते हुए उसे वैज्ञानिक संभावनाओं से मेल कराने की वकालत की थी। टीम सदस्यों ने उनके तर्कों व गणनाओं की तारीफ की थी। मलेशिया में आयोजित सम्मेलन में वे इसी विषय को वैदिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे।

संस्कृत विश्वविद्यालय से ली है डॉक्टरेट की उपाधि

बता दें कि पंडित केदारनाथ झा के सुपुत्र डॉ राजनाथ झा मूलतः मधुबनी के दीप गांव के निवासी हैं । उन्होंने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के गणित-ज्योतिष विभाग से वर्ष 1998 में आचार्य (पोस्ट-ग्रेजुएट) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए उत्तीर्ण की। साथ ही, उन्होंने शलाका परीक्षा में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। तत्पश्चात उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त की। इनके निर्देशन में ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान में भूकंप पूर्वानुमान के अतिरिक्त कैंसर, नेत्र रोग, मानसिक रोग एवं स्वास्थ्य-ज्योतिष जैसे विषयों पर भी शोध किया जा रहा है।