हथुआ में अभियान की स्थिति जानी। यहां बीएलओ मतदाताओं से फॉर्म भरवा कर ले रहे हैं। अधिकतर फॉर्म बिना दस्तावेज के जमा किए जा रहे हैं। मतदाताओं ने बताया कि बीएलओ दस्तावेज बाद में लेने की बात कह रहे हैं। अभी केवल माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और हस्ताक्षर लेकर फॉर्म जमा कर रहे हैं। बीएलओ का कहना है कि फॉर्म को जल्दी डिजिटाइज कर विभाग को रिपोर्ट देंगे। बाद में दस्तावेज अपलोड किए जाएंगे। बता दें कि एनुमरेशन फॉर्म में मतदाता को नाम, पता, फोटो, इपिक नंबर, आधार नंबर, जन्म तिथि, मोबाइल नंबर, माता-पिता का नाम जैसी जानकारी देनी होती है। साथ में हाल का फोटो लगाना अनिवार्य है।

सीवान मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण का कार्य हो रहा है। लेकिन इस दौरान कई तरह की अनियमितता सामने आ रही है। बीएलओ कई घरों में नहीं पहुंच रहे है, जहां पर जा रहे है वहां पर रिसीविंग भी नहीं मिल रही है। नतीजतन मतदाता सूची से नाम कटने की स्थिति में बिना रिसीविंग मतदाता दावा भी नहीं कर सकेंगे।

 

कारण कि इस दौरान वे साक्ष्य के तौर पर यह भी नहीं दिखा पाएंगे कि उनके द्वारा फॉर्म भरकर बीएलओ को दिया गया था, कारण कि दावा करने के दौरान मतदाता से रिसीविंग फॉर्म की मांग की जाएगी। बीएलओ द्वारा किए गए कार्य की जब ग्राउंड रिपोर्ट की गई तो कई तरह के चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है। इस तरह लगता है कि यह बीएलओ के लिए एक बोझ हो गया है। सीवान सदर विधान सभा क्षेत्र के बूथ संख्या 220 पर अमरनाथ श्रीवास्तव, आकाश कुमार, निभा कुमारी समेत कई मतदाताओं का नाम दर्ज है। लेकिन इनके घर बीएलओ पुनरीक्षण कार्य करने के लिए बीएलओ या पर्यवेक्षक नहीं गया।

 

लेकिन मतदाता नाम का सत्यापन हो गया है। आकाश कुमार ने जब खुद ऑन लाइन सत्यापन के लिए प्रयास किया तो पता चला कि उनका और उनके परिजनों के नाम का सत्यापन हो गया है। उन्होने इस बारे में ऑनलाइन विस्तृत जानकारी हासिल करने का प्रयास किया तो ओटीपी नहीं आ रहा है। यानि की बीएलओ ने घर बैठे सत्यापन कर दिया और उसमें मोबाइल नम्बर भी दूसरे का डाल दिया है।

कई ग्रामीणों को इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं अभियान की निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है। स्थानीय लोगों को पूरा सहयोग मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ड्राइव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है। इसका उद्देश्य है कि पात्र मतदाता वोट देने से वंचित न रहे और फर्जी नाम हटाए जा सकें। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मतदाता पुनरीक्षण और उसके महत्व की पूरी जानकारी नहीं है। कई ग्रामीणों को इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई है। सरकार की ओर से भी अब तक आम लोगों को इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।