कैमूर के भगवानपुर प्रखंड के 1400 फीट ऊंचे पहाड़ी पर मुसहरवा बाबा का देश का एक अनोखा मंदिर है। जो पहाड़ पर आने वाले लोगों की रखवाली करते हैं।
इस पहाड़ी से होकर गुजरने वाले लोग इस मंदिर के पास रुकते हैं अपनी यात्रा कुशल की दुआ मांगते हैं और लड्डू पेड़ा की जगह पर बीड़ी चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे यात्रा सकुशल बितती है और बाधाएं दूर हो जाती है। इस अनोखी मान्यता के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जो भक्त बीड़ी नहीं चढ़ाते हैं वह दान पेटी में बीड़ी चढ़ाने के लिए पैसे डाल देते हैं । लोगों का मानना है कि अधौरा पहाड़ी पर जाने के लिए घाटी चढ़ना पड़ता है और अगर लोगों को सुरक्षित जाना है तो मुसहरवा बाबा के यहां माथा टेक कर ही आगे बढ़ना है अगर नहीं किया तो अमंगल होना निश्चित है। मंदिर में बीड़ी चढ़ाते लोग।
मंदिर में बीड़ी चढ़ाते लोग। मुसहरवा बाबा के यहां बीड़ी चढ़ाते हैं लोग कैमूर के दीपक कुमार गुप्ता ने बताया, ‘तेलहाड़ कुंड घूमने के लिए जा रहा हूं।
बीच में बीड़ी वाले बाबा पड़ते हैं जो मुसहरवा बाबा के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि इधर से जाते समय अगर बीड़ी चढ़ा दिया जाए तो कल्याण हो जाएगा और सफर सही से कट जाएगा।’ उत्तर प्रदेश के खलिहारी के गोपाल जैसवाल बताते हैं, ‘हम UP से भभुआ जा रहे हैं। जहां पहाड़ की घाटी से नीचे उतरना है उससे पहले ही एक मुशहरवा बाबा का मंदिर है। यात्रा कुशल से बीते इसलिए मुसहरवा बाबा के यहां बीड़ी चढ़ाने की प्रथा है। इसलिए यहां माथा टेक रहे हैं कि हमारा यात्रा सफल हो जाए।’ कैमूर स्थित मुसहरवा बाबा का मंदिर।
कैमूर स्थित मुसहरवा बाबा का मंदिर। बीड़ी नहीं चढाने पर होता है अमंगल मंदिर के पुजारी बुढा कहार बताते हैं, ‘हमलोगों के होश से पहले का मंदिर बाप दादा के जमाने से है। पहाड़ की चढ़ाई के ऊपर खूंटी गांव के पास मूसहरवा बाबा का मंदिर है। जहां लोग आते हैं बीड़ी चढ़ाते हैं जिससे उनकी यात्रा सफल से बीतती है। बीड़ी नहीं चढाने पर अमंगल हो जाता है।’
