19858 सिपाहियों की स्थानांतरण आदेश पर उच्च न्यायालय ने लगाया अंतरिम रोक ,राज्य के अलग अलग जिलों से विरमित किये गये सिपाहियों में संशय की स्थिति ,जिला से नो ड्यूज और एलपीसी ले चुके हें कई सिपाही।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के 19,858 सिपाहियों के एक जिले से दूसरे जिला बल में हुये स्थानान्तरण पर फिलहाल रोक लगा दी हें। चार सप्ताह बाद म इस मामले की सुनवाई होगी ।
इस मामले में पटना हाईकोर्ट में दायर की गई याचिकायों पर जस्टिस राजेश वर्मा ने सुनवाई करते हुए कहा हें कि निर्देश दिया हें कि चार सप्ताह के भीतर राज्य सरकार स्थिति स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करें। ग्रीष्मावकाश के बाद इस मामले में सुनवाई की जाएगी ।
एक जिला से दूसरे जिला के लिये कई सिपाही विरमित्
अधिवक्ता अवनीश कुमार की और से दायर की गई याचिकाओं में 5 मई को एक साथ 19858 सिपाहियों का स्थानान्तरण एक जिला से दूसरे जिला में कर दिया गया है।अधिवक्ता ने कहा हें कि बगैर किसी स्थानांतरण नीति के सिपाहियों का स्थानांतरण किया गया है।उनका यह भी कहना है कि वर्ष 2022 में पूर्व के स्थान्तरण नीति को समाप्त कर दिया गया।उसके बाद आज तक कोई नया स्थानांतरण नीति नहीं बनाई गई।इसके बावजूद 2010 से लेकर 2015 के बीच नियुक्त सिपाहियों के स्थानांतरण कर दिया गया।कहना हें कि राज्य सरकार ने बिना किसी नीति निर्धारण के यह तबादला किया हें जबकि हजारों सिपाही जिला में कार्यरत हें जिनका स्थानांतरण नहीं हुआ हें।चार सप्ताह बाद इसकी सुनवाई होगी।
अब सिपाही क्या करेंगे,पूर्व के जिलाबल या विरमित् जिला में ही योगदान करेंगे ?
इधर इस स्थानांतरण आदेश के बाद कई जिलों के एसपी /एसएसपी ने प्रतिदिन 30सिपाहियों का स्थानांतरण राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरित जिला बल में विरमित् करना शुरू कर दिये ,इस आदेश के आलोक में दूसरे जिला के लिये विरमित्त हुये कई सिपाहियों ने जिला बल से नो ड्यूज कराते हुये एलपीसी तक ले लिया हें।अब ऐसे में ये सिपाही क्या करेंगे।पूर्व के भांति जिला बल में योगदान देकर फिर से कार्य करेंगे ,या फिर स्थानांतरित जिला में योगदान देंगे।