आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में एमपी एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव पर इश्तेहार जारी किया है। दो बार गैर जमानतीय वारंट जारी होने के बावजूद कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर शनिवार को कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। साथ ही केस के अनुसंधान को इश्तेहार चिपकाने का भी आदेश जारी किया है। यह मामला वर्ष 2011 का जुड़ा हुआ है। विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव अपने पार्टी के प्रत्याशी परमेश्वर सिंह के पक्ष में चुनावी सभा संबोधित करने आए हुए थे।

पांडेपुर सहदौली में सभा के दौरान हुआ था विवाद दरौंदा थाना क्षेत्र के पांडेपुर सहदौली गांव में सभा करने के दौरान ही निर्धारित समय खत्म हो गया।

 

इस पर वहां मौजूद तत्कालीन अंचलाधिकारी शंकर महतो ने सभा को रोकने का प्रयास किया, लेकिन लालू यादव ने सभा बंद करने से इनकार कर दिया और अधिकारियों को उस समय फटकार भी लगाई। इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष अमरकांत झा ने लालू यादव से माइक छीन लिया। इसी पर विवाद बढ़ गया था। इस पर तत्कालीन अंचलाधिकारी ने दरौंदा थाने में एक आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आवेदन दिया। जिस पर 146/11 राज्य बनाम परमेश्वर सिंह व लालू यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर अंडर सेक्शन 188 आईपीसी एवं 9 ध्वनि विस्तारक अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी।

 

 

इस मामले की कोर्ट में सुनवाई के दौरान एमपी एमएलए कोर्ट ने 13 मई 2015 को पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी किया। इस पर भी लालू यादव कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद 10 मई 2019 को गैर जमानतीय वारंट जारी किया गया। गैर जमानतीय वारंट जारी होने के बावजूद पूर्व रेल मंत्री कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।

 

इस पर पुनः कोर्ट ने 16 अगस्त 2022 को गैर जमानतीय वारंट जारी किया। इसके बावजूद लालू यादव के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने 18 नवंबर 2022 को दरौंदा थाना अध्यक्ष पर शो कॉज किया। फिर भी की कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई। शनिवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 82 के अंतर्गत लालू यादव को फरार घोषित कर दिया गया। साथ ही पुलिस को इश्तहार चिपकाने का निर्देश दिया गया है। बताते चलें कि इस केस के विचारण के दौरान राजद प्रत्याशी परमेश्वर सिंह का 17 दिन सोमवार 2017 को निधन हो गया था।