सदर अस्पताल के तत्कालीन आईसीयू इंचार्ज जीएनएम कर्मी आशीष शर्मा ने आत्महत्या कर ली। शव गुरुवार को शहर के थाना रोड स्थित किराए के कमरे में पंखे से लटका मिला। सूचना पर पहुंची नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंच शव को पंखे से निकाल, सदर अस्पताल ले आई। पुलिस ने मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। जिसमें उसने अपने परिवार के किसी सदस्य को परेशान नहीं करने की बात लिखी है।
आशीष राजस्थान के बारा जिला के रामेश्वर प्रसाद शर्मा के बड़े पुत्र थे। मौत पर आक्रोशित हुए अस्पताल के जीएनएम, एएनएम डीएस समेत प्रबंधन पर काम के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि अगर कोई स्टाफ वरीय अधिकारियों को शिकायत करते हैं तो उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता है। बता दें कि अवकाश समेत कई समस्याओं को लेकर समेत सदर अस्पताल के 90 से अधिक जीएनएम कर्मियों ने सीएस को लिखित रूप में शिकायत की थी।
घंटों चली वार्ता के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने डीएम को बताया कि वरीय अधिकारियों उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। 8 घंटे की जगह 24 घंटे काम लिया जाता है। परिवार में किसी आपात स्थिति में भी छुट्टी नहीं दी जाती। अगर कोई स्टाफ आवाज उठता हैं तो अधिकारी से लेकर कार्यालय के किरानी तक धमकी देते हैं। सर्विस बुक पर लाल कलम चला कैरियर बर्बाद करने की बात कहते हैं। घटना से आक्रोशित कर्मियों ने अस्पताल के द्वार पर दिया धरना स्वास्थ्य कर्मियों के धरने पर जानी की सूचना पर सदर एसडीएम संजीव कुमार और एसडीपीओ सदर वन राम कृष्णा अस्पताल पहुंचे।
लेकिन कर्मी डीएम को बुलाने की मांग पर अड़े रहे और गेट नहीं खोले। तब डीएम रिची पांडेय खुद उन्हें समझाने के लिए अस्पताल पहुंचे। जिन्हें देख कर्मियों ने गेट खोला। उसके बाद सीएस समेत स्वास्थ्य कर्मियों के साथ डीएम ने बंद कमरे में वार्ता शुरू की। पारिवारिक परेशानी को लेकर आशीष ने आत्महत्या की है। सुसाइड नोट में भी किसी तरह का आरोप नहीं लगाया गया है। मामले की जांच पुलिस अधिकारी कर रहे है। मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है।
– डॉ. सुधा झा, डीएस, सदर अस्पताल, सीतामढ़ी स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब उपाधीक्षक डॉ. सुधा झा ने निजी गार्डों को अस्पताल में बुला लिया। इससे नाराज कर्मी और आक्रोशित हो गए तथा डीएम को बुलाने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि वे तब तक काम पर नहीं लौटेंगे जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। जिसके बाद सभी कर्मी अपने वार्डों से निकल बाहर में निकल आए और हड़ताल का ऐलान कर दिया। और मुख्य द्वार को बंद कर धरने पर बैठ गए।
