मदर्स डे पर रोहतास की दिव्यांग अंकिता ने मां-पिता के योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि जिम्मेदारियों को निभाना आपसे सीखा है.

 

रोहतास: मंजिल उन्हीं को मिलती हैं, जिनकेसपनों में जानहोती है. पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है. इन पंक्तियों को सार्थक किया है रोहतास की दिव्यांग महिला अधिवक्ता अंकिता कुमारी. इन्होंने शारीरिक कमी, ​समाज की हिकारत भरी नजरें और लोगों की इग्नोरेंस को पीछे छोड़ खुद को उस मुकाम पर पहुंचाया, जहां लोग अपनी बेटियों को इनसे सीखने की हिदायत देते हैं.

अधिवक्ता के संघर्ष-जोश और जुनून की कहानी: अधिवक्ता पद दिव्यांग महिला अंकिता कुमारी कहती हैं कि हमारा समाज दिव्यांगों को बेबस, लाचार और कमजोर समझता है. लोग फिजिकली डिसेबिलिटी को मेंटल डिसेबिलिटी मानकर दिव्यांगों को बेचारों की तरह ट्रीट करना शुरू कर देते हैं. शारीरिक दिव्यांगता के चलते हिकारत भरी नजरों से देखा जाना और इग्नोर किया जाना आम बात है. उस पर भी अगर लड़की दिव्यांग है तो फिर उसे किस-किस दौर से गुजरना पड़ सकता है, इसे मेरे लिए शब्दों में बयां करना मुश्किल है.

इंजेक्शन के साइड इफेक्ट से टूटा दुखों का पहाड़: सासाराम की रहने वाली अंकिता को बचपन में ही जब वह 5 साल की थी तो इंजेक्शन लगाने के दौरान साइड इफेक्ट की वजह से एक पैर ने काम करना बंद कर दिया. ऐसे में पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि अंकिता एक लड़की थी और लड़की जब दिव्यांग हो जाए तो मां-बाप के लिए यह किसी बड़ी पीड़ा से काम नहीं होती लेकिन फिर भी अंकिता ने हार नहीं मानी और एक प्रण लिया कि वह किसी तरह काबिल बनकर एक मजबूर नहीं बल्कि मजबूत लड़की साबित होगी खुद के पैरों पर खड़ी हो कर जमाने को दिखा कर रहेगी.

मां-पिताजी बने मेंटर:अंकित के मिडिल क्लास फैमिली में उनकी मां धर्मशीला देवी व पिता सत्यनारायण पाल ने हौसला बढ़ाया तो संघर्ष करते हुए आगे बढ़ी. अंकिता के हौसला अफजाई में उनके माता-पिता दोनों शामिल थे. उन्होंने वादा किया कि तुम अपनी पढ़ाई जारी रखी और बेटियों के लिए एक मिसाल बनो बस यही अरमान लिए अंकित ने पढ़ाई जारी रखा.

माता-पिता बेटी का हौसला बढ़ाया: अंकिता के माता-पिता उस वक्त परेशान हो गए जब बेटी की शादी की चिंता सताने लगी. वह जहां भी जाते हैं लोग दिव्यांग अंकिता को देखकर ही नाक भाव सिकुड़ने लगता. अब ऐसे में भी एक बार फिर माता-पिता ने बेटी का हौसला बढ़ाया. अंकित बताती है कि वह तो लगभग टूट सी चुकी थी लेकिन मां और पिताजी ने जिस तरह से उन्हें अहसास कराए कि वह खुद की बदौलत कुछ कर सकती हैं तो यही चीज उनके दिमाग में भर गई और ठान लिया कि वह कभी मजबूर नहीं होगी.

2020 में मिली लॉ की डिग्री:अंकित की शादी डेहरी के रहने वाले देवनाथ पाल से हुई और इसके बाद पति सहित ससुराल वालों का भी भरपूर प्यार मिला जिससे अंकिता का हौसला और बढ़ता चला गया. उन्हें 2020 में लॉ की डिग्री मिल गई और वह अधिवक्ता बन गई.

बच्चों को IAS-IPS बनाने का है सपना:शादी के 2 साल बाद उन्हें दो बच्चे भी हुए वह बताती हैं कि बच्चों की परवरिश में काफी कठिनाइयों का दौर गुजरा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी आज सपना है कि दोनों बच्चों को पढ़ा लिखा कर आईपीएस और आईएएस बनाएं.

पति और ससुराल में मिल रहा साथ:वह बताती है कि जब वह ऐसे देहरी अनुमंडल कोर्ट में अंकिता कुमारी प्रैक्टिस करती हैं, लेकिन प्रैक्टिस के दौरान जब उन्हें कोर्ट जाना पड़ता है तो पति उनके साथ लेकर जाते हैं, लेकिन कभी पति के न रहने की वजह से उन्हें पैदल भी जाना पड़ता है.

“लोगों के ताने को कभी भी परवाह नहीं की और वह अपने आप को एक सशक्त महिला समझते हुए आज अनुमंडल कोर्ट में प्रैक्टिस करती हूं और घर का सारा खर्च भी संभालती हैं. मेरे दो बच्चे हैं दोनों बच्चों को पढ़ा लिखा कर आईपीएस और आईएएस बनाने का सपना है.”- अंकिता कुमारी, अधिवक्ता, डेहरी अनुमंडल कोर्ट

11 मई को मदर्स डे: मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है. भारत समेत दुनिया भर में 11 मई रविवार को धूमधाम से मदर्स डे मनाया जा रहा है. आज का दिन मां के नाम समर्पित होता है.