प्रताड़ना मामले में एपी गुप्ता की मुश्किलें बढ़ीं

जांच कमेटी ने दूसरी बार की सुनवाई

छात्राओं के आरोपों से स्तब्ध रहे कमेटी सदस्य
सप्ताह भर के भीतर आरोपी भी रखेंगे अपना पक्ष
दरभंगा।

काफी फजीहत के बाद हाल ही में लनामिवि के उप परीक्षा नियंत्रक (सामान्य पाठ्यक्रम) से हटाए गए हिंदी विभाग के प्रध्यापक डॉ आनंद प्रकाश गुप्ता की मुश्किलें घटने का नाम ही नहीं ले रहा है। विभाग की पीजी छात्राओं द्वारा डॉ गुप्ता पर लगाये गए कई तरह की प्रताड़नाओं के मामले में आज दूसरी बार कमेटी ने जांच की। यह महज इत्तेफाक ही कहा जायेगा कि
इसी चार अगस्त को जब परीक्षा विभाग में उग्र छात्रों व डॉ गुप्ता के बीच मारपीट व गालीगलौज के साथ तीखी झड़प हो रही थी तो वहीं दूसरी ओर उसी वक्त उत्पीड़न मामले की पहली सुनवाई भी चल रही थी। आज गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आंतरिक शिकायत कमेटी यानी आई सी सी सदस्यों की बैठक हुई जिसमें उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीजी की करीब आधा दर्जन छात्राएं उपस्थित हुईं और अपनी पीड़ा को समिति सदस्यों के समक्ष रखा। बता दें कि हिंदी विभाग की कई छात्राओं ने डा0 गुप्ता समेत अन्य प्रध्यापक पर मानसिक प्रताड़ना, डराने व धमकाने समेत अन्य गम्भीर आरोप लगाते हुए कुलपति से शिकायत कर रखी है और उसी आलोक में आई सी सी सदस्यों द्वारा जांच चल रही है। वहीं,अगले सप्ताह तक आरोपी डॉ गुप्ता को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। आज की जांच में समिति सदस्य पीजी विभाग की डॉ आभा रानी सिन्हा, डॉ मंजू राय, डॉ पुनिता झा समेत शोधार्थी श्वेता झा, छात्रा प्रतिनिधि सिमरन,समाजसेवी मुकेश कुमार झा व मो0 जमाल मुख्य रूप से शामिल रहे।

छात्राओं के बयां से स्तब्ध रहे सदस्य

विश्वविद्यालय मख्यालय के प्रशासनिक भवन में उक्त मामले की हुई जांच के बारे में न तो कमेटी सदस्य और न ही पीड़ित छात्राओं ने ही खुलकर बताया। पक्ष रखने आयीं दो छात्राओं ने नाम न छापने की शर्त पर परिसर के बाहर बताया कि कुलपति को दिए आवेदनों में उल्लेखित सारे आरोपों को हमसभी ने सही व सत्य ठहराया। साथ ही कुछ ऐसी कुछ भद्दी टिप्पनियों के बारे में भी सदस्यों को बताया गया जिसे सार्वजनिक करने में लज्जा महसूस हो रहा है। समिति सदस्यों ने हमलोगों की बातों को काफी गम्भीरता से लिया है। आरोपों को सुनकर समिति सदस्य स्तब्ध थे। छात्राओं ने खुलासा किया कि उनलोगों ने हिंदी विभाग के खत्म हो चुके शैक्षणिक माहौल को भी दुरुस्त करने की गुजारिश की है। लगे हाथ छात्राओं ने यह भी आगाह किया कि अगर उनलोगों को यहां से उचित न्याय नहीं मिला तो वे लोग कुलाधिपति के समक्ष अपना पक्ष कलमबंद कराएंगे।

पूर्व की रिपोर्ट पर तबज्जो नहीं

हिंदी विभाग की छात्राओं व यहां के तत्कालीन सहायक प्रध्यापक डॉ अखिलेश कुमार के मामले में इसी तरह का मामला सामने आया था और इसको लेकर गठित आई सी सी सदस्यों ने जांच कर जो रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को 03 सितम्बर 2022 को सौंपी थी उसपर एकदम अमल नही किया गया। शायद कमेटी की अनुशंसा को गम्भीरता से लिया जाता तो आज हिंदी विभाग में यह अराजकता पैदा नहीं होती। उस समय कमेटी ने स्पष्ट अनुशंसा की थी कि विभाग की शैक्षणिक व प्रशासनिक माहौल को बेहतर रखने के लिए यहां के शिक्षकों का अन्यत्र फेरबदल यानी सामूहिक तबादला कर दिया जाय। बाबजूद इसके, सिर्फ डॉ अखिलेश कुमार का तबादला एलकेवीडी कालेज, ताजपुर, समस्तीपुर कर दिया गया और शेष यथावत रह गए। आईसीसी सदस्यों ने छात्रओं को भी कक्षा करने व अनुशासन में रहने की हिदायत दी थी।