डीजीपी का आदेश :नवनियुक्त दारोगा और जवान को पुलिस विभाग के किसी दफ्तर में नहीं करें प्रतिनियुक्त ,इसका सीधा असर पुलिस विभाग पर।पूरे पांच सालों तक थानों और पुलिस लाईन में पोस्टिंग कर लें फील्ड ड्यूटी।
डीजीपी का आदेश :नवनियुक्त दारोगा और जवान को पुलिस विभाग के किसी दफ्तर में नहीं करें प्रतिनियुक्त ,इसका सीधा असर पुलिस विभाग पर।पूरे पांच सालों तक थानों और पुलिस लाईन में पोस्टिंग कर लें फील्ड ड्यूटी।
डीजीपी का आदेश :नवनियुक्त दारोगा और जवान को पुलिस विभाग के किसी दफ्तर में नहीं करें प्रतिनियुक्त ,इसका सीधा असर पुलिस विभाग पर।पूरे पांच सालों तक थानों और पुलिस लाईन में पोस्टिंग कर लें फील्ड ड्यूटी।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
पुलिस विभाग के पुलिसिंग में बड़ा बदलाव होने की संभावना प्रबल हो गई हें। डीजीपी ने राज्य के सभी इकाई के एसपी /एसएसपी /डीआईजी /आईजी को पत्र के माध्यम से आदेश जारी करते हुये कहा हें कि पांच साल से पहले नवनियुक्त दारोगा एवं जवान की पोस्टिंग जिलों में की जाती हें तों डीजीपी की अनुमति अनिवार्य होगी।
कई जिलों में देखा जा रहा हें कि बिना सेवा संपुष्ट किये ही थानेदारी दे दी गई हें ,जिन्हें अबतक व्यावहारिक ज्ञान नहीं हें।ऐसे ही कई जवान हें जिन्हें कार्यालय में प्रतिनियुक्त कर सेवा लिया जा रहा हें।अब डीजीपी के नये आदेश के बाद ऐसे जवान और पुलिस पदाधिकारियों को उन जगहों से हटाया जा सकता हें और फील्ड के कार्यों में लगाया जाएगा।
राज्य में अपराध मुक्त समाज के लिये बिहार पुलिस प्रतिबद्ध हें ,इसके लिये पुलिस महानिदेशक ने नये आदेश जारी किये हें। इस आदेश के तहत सीधे भर्ती होकर दारोगा और सिपाही में आये पुलिसकर्मी अब चाहरदीवारी के भीतर नहीं बैठेंगे। इनकी पदस्थापन थानों और पुलिस लाईन में की जाएगी। पुलिस महानिदेशक का मानना हें कि जिलों में पदस्थापित नव नियुक्त पुलिसकर्मियों /पदाधिकारियों से जिला सायुध बल से इतर कार्यालय कार्य लिया जा रहा हें साथ ही विभिन्न इकाई एवं कार्यालयों में प्रतिनियुक्त एवं पदस्थापन किया जा रहा हें।
इसके कारण जिलो में विधि व्यवस्था एवं अन्य गतिविधियों के प्रभावकारी निष्पादन में काफी कठिनाई हो रही हें। पुलिस मुख्यालय को कई जिलों से शिकायत मिल रही थी कि नव प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों को गैर जरूरी दफ्तरों में बैठाया जाता हें इस कारण उसके ऊर्जा का दुरुपयोग हो रहा हें।
डीजीपी ने सभी जिला के एसपी /एसएसपी /डीआईजी /आईजी को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से आदेश जारी किया हें कि किसी भी नये पदाधिकारी को कम से कम पांच साल तक कार्यालय एवं विशेष इकाई में प्रतिनियुक्त नहीं किया जाय। कहा गया हें कि नये दारोगा /पुलिस कर्मी प्रशिक्षण लेकर आते हें तों CCTNS,केस डायरी ,कानून प्रक्रिया आदि कई कार्यों में लगा दिया जाता हें जो सही नहीं हें। डीजीपी ने कहा हें कि सीधे बहाल दारोगा एवं जवान को लॉ एंड ऑर्डर के व्यवस्था में देना उचित हें ,ताकि बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कार्यालयों में प्रतिनियुक्त करना उचित होगा जो पुलिस बल के दक्षता को बढ़ाएगा।
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