किशनगंज के टेढ़ागाछ प्रखंड के चिल्हनियां पंचायत में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। वार्ड संख्या 5 के इस आदिवासी बाहुल्य गांव में पक्की सड़क नहीं है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी नदारद हैं।

स्थानीय निवासी ललित मुर्मू ने बताया कि बरसात में कीचड़ भरे रास्ते से आवागमन मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण महिला सविता सोरेन ने बताया कि उनके घर तक शौचालय योजना नहीं पहुंची है। बच्चों को शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ता है।

सरकार से नियुक्त विकास मित्र न तो नियमित संपर्क करते हैं और न ही सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं। इस कारण यहां के लोग सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। सरकार महादलित और आदिवासी समुदायों के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। शिविर लगाकर जनसमस्याएं सुनी जाती हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है।

शौचालय और उप स्वास्थ्य केंद्र की मांग

ग्रामीणों ने शनिवार को सरकार और प्रशासन से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है। मुकेश हेम्ब्रम, मुन्नी मृर्मा, सोम मुर्मू सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से स्कूल, सड़क, आंगनवाड़ी केंद्र, शौचालय और उप स्वास्थ्य केंद्र की मांग की है। साथ ही, विकास मित्र की जवाबदेही तय करने और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने की मांग की है।