ईको सेंसेटिव जोन तय, 10 किमी दायरे में नए उद्योग लगाने पर लगी रोक,100 से अधिक बाघ रहेंगे।
बिहार की कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के देश का 59वां टाइगर रिजर्व बनने का रास्ता साफ हो गया है। वन विभाग द्वारा करीब 95 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्र सरकार द्वारा इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलेगा। यहां 100 से अधिक बाघ रहेंगे। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व करीब 58 बाघ हैं।
कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का ईको सेंसेटिव जोन के तौर पर चयन किया गया है। इसी महीने इसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। इसके 10 किमी दायरे में नए उद्योग लगाने पर रोक लगा दी गई है। वहीं एनटीसीए की गाइडलाइन पर बाघों के संरक्षण और प्रबंधन का काम शुरू कर दिया गया है। यह 1800 वर्ग किमी में फैला राज्य का दूसरा टाइगर रिजर्व होगा। वीटीआर 900 वर्गकिमी में फैला है।
चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरविंदर सिंह ने यह जानकारी दी। बाघों के लिए 500 वर्ग किमी जंगल को कोर जोन के लिए चिह्नित किया गया है। 1050 वर्ग किमी में बफर जोन चिह्नित किया गया है। बफर जोन में शेरगढ़ का किला, गांव सहित अन्य मंदिर और ऐतिहासिक स्थल हैं, क्योंकि बफर जोन में लोगों को आने-जाने की अनुमति दी जाती है। 100 से अधिक प्रजातियों के जंगली जानवर कैमूर से मध्य प्रदेश के जंगल तक करीब 300 किमी बाघ का कॉरिडोर है।
कैमूर अभयारण्य से यूपी, मध्यप्रदेश और झारखंड के टाइगर रिजर्व जुड़े होने से यहां बाघों का आना-जाना लगा रहता है। कैमूर अभयारण्य में 100 से अधिक प्रजातियों के छोटे-बड़े जंगली जानवर हैं। जब यह टाइगर रिजर्व घोषित हो जाएगा तो वीटीआर जंगल से निकलने वाले बाघों को रेस्क्यू करने के बाद यहां छोड़ा जाएगा। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से बाघ भटककर कभी-कभी ग्रामीण इलाके में पहुंच जाता है। मानव पर हमला कर देता है। वैसे बाघों को रेस्क्यू करके कैमूर भेजा जाएगा।
अभी रेस्क्यू करके राजगीर जू सफारी और पटना जू लाया जाता है। 2019 में दिखा पंजा, 2020 में बाघ को टहलते देखा गया कैमूर वन्यप्राणी अभ्यारण में 2019 में तिलौथू क्षेत्र में पहली बार बाघ के पंजों का निशान दिखा था, जिसकी देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की प्रयोगशाला में जांच हुई। वहीं 2020 में पहली बार बाघ को विचरण करते हुए कैमरा में कैद किया गया। बाघ दिखाई देने के बाद नेशनल टाइगर कंजवेंशन अथॉरेटी ने कैमूर वन्य क्षेत्र में बाघ और वन्यजीव संरक्षण के लिए हाथ आगे बढ़ाया था।
