बहेड़ा थाना में दर्ज कांड (138/23 )किसी खौफनाक कहानी से कम नहीं ,प्राथमिकी के कुछ घंटे बाद ही हुई थी अधिवक्ता की गिरफ्तारी ,अधिवक्ता ने कहा मैं कोई कुख्यात अपराधी नहीं ,आतंकवादी नहीं ,भू माफिया नहीं फिर एक दिन में ही कैसे हो गई गिरफ्तारी।अधिवक्ता ने कहा कि डीआईजी के व्यवहार से लगता हें कि अब मुझे जरूर मिलेगा न्याय ?

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

बहेड़ा थाना में दर्ज कांड 138/23मामले में डीजीपी के निर्देश पर मिथिला क्षेत्र के डीआईजी ने कांडों की समीक्षा की इस दौरान बेनीपुर के एसडीपीओ ,सदर एसडीपीओ ,बहेड़ा थाना के थानाध्यक्ष समेत इस कांड के आरोपी अधिवक्ता भी मौजूद थे।

मंगलवार को डीआईजी स्वप्ना गौतम मेश्राम ने इस कांड में पहली बार कांडों को लेकर समीक्षा की ,यही नहीं आरोपी को बुलाकर उनके पक्ष को भी जानने का प्रयास किया ,जबकि इससे पूर्व कई बार इस कांड के आरोपी अधिवक्ता ने तात्कालीन आईजी /डीआईजी को पत्र देते हुये कांडों की समीक्षा को लेकर आग्रह किया था लेकिन हर बार तात्कालीन डीआईजी /आईजी कांडों की समीक्षा नहीं कर अधिवक्ता के आवेदन को एसएसपी को अग्रसारित करते थे ,एसएसपी द्वारा उस आवेदन को ग्रामीण एसपी  ,ग्रामीण एसपी फिर उस आवेदन को डीएसपी के पास और डीएसपी उस आवेदन को थानाध्यक्ष के पास अग्रसारित कर देते थे और मामला जस का तस ?

कई महीने इस तरह बीत जाने के बाद डीजीपी विनय कुमार के निर्देश पर डीआईजी ने इस कांड के समीक्षा की तिथि तय की और आरोपी अधिवक्ता का भी पक्ष जाना।

आरोपी अधिवक्ता ने कहा कि कांड संख्या 138/23में मैं 52दिनों तक जेल में रहा ,इसका जिम्मेदार कौन हें ?मैंने कोई आपराधिक वारदात नहीं किया ,कोई घटना नहीं घटी,कोई आपराधिक चरित्र नहीं हें ,ना में कोई आतंकवादी था ना ही कोई अपराधी ,मैं भूमाफिया भी नहीं हूं।पहले मुझे पकड़ा गया फिर प्राथमिकी दर्ज हुई।मेरा कुसूर आखिर क्या था।26मार्च 23 की तिथि में यानि गिरफ्तारी के एक दिन पहले की तिथि में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और 27मार्च की तिथि में गिरफ्तारी हो गई और में 52दिन जेल में रहा।इसके अलावे अधिवक्ता सुशील चौधरी ने कहा कि में बुद्धिजीवी वर्ग से आता हूं ,पेशे से अधिवक्ता हूं लेकिन तात्कालीन डीएसपी ने बिना किसी साक्ष्य के कि यह कहते हुये दोनों पक्ष घटना के दिन न्यायालय परिसर में थे और पर्यवेक्षण टिप्पणी निकालते हुये कांड को सत्य करार दे दिया।सीसीटीवी का फुटेज उन्होंने नहीं निकाला और ना कोई ठोस साक्ष्य था ,यही नहीं पर्यवेक्षण के तिथि का दिन रविवार था जिस दिन न्यायालय बंद रहता हें ,ऐसे में तात्कालीन एसपी की मंशा समझा जा सकता हें।अधिवक्ता ने स्पष्ट कहा कि एसएसपी के मार्गदर्शन में यह घिनौना कहानी रचकर उन्हें फंसाया गया।अब एसएसपी किनके इशारे पर ऐसी घिनौनी घटना को अंजाम दिये यह वहीं बता सकते हें ,लेकिन इस पूरे प्रकरण और बाद में हुये अन्य कांडों में बेनीपुर के एसडीपीओ समेत दरभंगा सदर एसडीपीओ की भूमिका संदिग्ध हें।अधिवक्ता ने कहा कि मेडम आप पर विश्वास हें ,सारे पर्यवेक्षण रिपोर्ट आपके पास हें अगर उस प्रतिवेदन को ठीक से अवलोकन किया जाएगा तों रहस्यों से पर्दा उठ जाएगा।

यहां बता दे कि बहेड़ा थाना में दर्ज यह कांड एक खोफनाक कहानी हें ,जिसे लेकर एक सीरियल या फिल्म भी बनाया जा सकता हें ,वजह यही हें कि जिले के एक वरीय पुलिस की कार्यशैली अगर इस तरह की होती हें तों पूरा पुलिस महकमे से आम आदमी का विश्वास उठ जाता हें लेकिन सच्चाई भी यह हें कि अगर जिद्दी इंसान मिल जाय तों थानाध्यक्ष से लेकर डीजीपी तक अपनी गुहार लगाते लगाते उसे न्याय भी मिल जाता हें और इस कांड में यही उम्मीद अधिवक्ता सुशील चौधरी को हें।अधिवक्ता श्री चौधरी का स्पष्ट कहना हें कि डीजीपी विनय कुमार के रहते न्याय उन्हें जरूर मिलेगा यही नहीं दोषी पदाधिकारियों पर कारवाई भी होगी।