मिथिलांचल में पारंपरिक जुड़ शीतल का धूम, बिरौल में लोगों ने कीचड़ से खेली होली, बुजुर्गों ने बच्चों के सिर पर पानी डालकर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की
दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
बिरौल, दरभंगा। मिथिलांचल का पारंपरिक त्योहार जुड़ शीतल मंगलवार को दरभंगा जिला के बिरौल, बेनीपुर,अलीनगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोगों, खासकर युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।जुड़ शीतल, जो कि मैथिल पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी आस्था और सम्मान का त्योहार है।
इस दिन लोग अपने घरों और आसपास के जल स्रोतों जैसे कुओं, तालाबों आदि की सफाई करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शीतला माता प्रसन्न होती हैं और पूरे वर्ष गांव में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।बिरौल के ग्रामीण इलाकों में इस त्योहार का एक विशेष आकर्षण ‘कीचड़ होली’ रही। सुबह से ही बच्चे और युवा टोलियों में निकल पड़े और एक-दूसरे को मिट्टी और कीचड़ लगाकर जुड़ शीतल की शुभकामनाएं दीं। यह परंपरा आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है। लोगों ने पारंपरिक लोकगीत गाए और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया। इस अवसर पर घरों में पारंपरिक व्यंजन बनाए गए। एक दिन पूर्व सोमवार को ‘सतुआनी’ मनाई गई थी, जिसमें लोगों ने सत्तू और विभिन्न प्रकार के मौसमी फलों का सेवन किया था। जानकारी के अनुसार जुड़ शीतल के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और लोग बासी भोजन (एक दिन पहले बना हुआ) करते हैं। यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान और ऊर्जा संरक्षण का संदेश देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों ने बच्चों के सिर पर पानी डालकर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।बिरौल में जुड़ शीतल का यह पारंपरिक आयोजन आपसी मेलजोल और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। आधुनिकता के इस दौर में भी लोगों ने अपनी जड़ों से जुड़े रहकर इस प्राचीन त्योहार को उसी उत्साह और परंपरा के साथ मनाया, जो इसकी पहचान है।स्थानीय लोगों में कैलाश चौधरी,अमर झा,राजेश सिंह, राजकुमार झा का कहना है कि यह त्योहार न केवल एक परंपरा है, बल्कि यह हमें प्रकृति के महत्व को समझने और उसका सम्मान करने की भी प्रेरणा देता है। कीचड़ होली का आनंद और बासी भोजन की परंपरा हमें सादगी और प्रकृति के करीब रहने का संदेश देती है। इस दौरान बिरौल के उछटी गांव में भव्य झांकी सजाई जाती है।
कुल मिलाकर, जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में जुड़ शीतल का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ, जो मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है।
