मोरों थाना क्षेत्र के पटोरी गांव में होलिकादहन /होली के दिन हवा में चलाई गई गोली के मामले में प्राथमिकी दर्ज ,कहा गांव में दहशत फैलाने के उदेश्य से अपराधियों ने चलायी दो तीन राउंड गोलिया ,एसएसपी ने जांच का जिम्मा सदर अंचल के पुलिस निरीक्षक को दिया। 

दस्तक 7मीडिया ,संजय कुमार राय 

मोरों थाना क्षेत्र के पटोंरी गांव में होलिका दहन /होली के दिन अपराधियों के द्वारा हवा में चलाई गई ताबड़तोड़ 35-40राउंड फायरिंग के मामले में मोरों थानाध्यक्ष ने अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध प्राथमिकी (23/25)दर्ज की हें।

दर्ज प्राथमिकी में कहा गया हें कि सोशल मीडिया पर चली खबर के आलोक में जांच की गई हें। थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी में कहा हें कि पटोरी गांव के कुछ लोंगों ने बताया कि होली के दिन दो -तीन राउंड फायरिंग जैसे आवाज सुनाई पड़ी हें लेकिन किसके द्वारा और किन कारणों से फायरिंग हुई हें यह पता नहीं चल पाया हें। थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी में यह भी दर्शाया हें कि अज्ञात अपराधियों द्वारा दहशत फैलाने की मंशा से फायरिंग की घटना कारित किया हें। अवैध हथियार से फायरिंग करना संज्ञय अपराध की श्रेणी में आता हें। फायरिंग होने से गांव में दहशत और डर का माहौल हें कभी भी किसी के साथ अप्रिय घटना हो सकती हें।

यहां बता दे कि दस्तक 7मीडिया ने इस खबर को घटना के 15दिनों बाद यानि 26मार्च को गुप्त सूचना के आधार पर प्रकाशित किया था।लेकिन यह जिम्मेदारी पत्रकार से ज्यादा स्थानीय थानाध्यक्ष की बनती थी ,इस मामले में होली के दूसरे दिन ही खोखा बरामद कर प्राथमिकी दर्ज कर देना चाहिये था लेकिन थानाध्यक्ष द्वारा ऐसा नहीं किया गया जो उनके लापरवाही को दर्शाता हें खासकर आपराधिक मामले में तों तुरंत संज्ञान लेना चाहिये था।

हालांकि दस्तक 7मीडिया में खबर छपते ही दरभंगा के वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेडडी जलारेडडी ने तुरंत संज्ञान में लिया और जांच का जिम्मा सदर अंचल के पुनि अनोज़ कुमार को दिया। पुनि श्री कुमार ने घटना स्थल पर जाकर कई ग्रामीणों से बात की लेकिन ग्रामीणों ने गांव में उन्हें कुछ नहीं बताया ,बाद में कुछ ग्रामीणों ने फोन पर उन्हें सूचना दी और दस्तक 7मीडिया में छपी खबर का समर्थन किया। आनन फानन में थानाध्यक्ष ने 28मार्च 25को प्राथमिकी दर्ज की

प्राथमिकी में यह  बात स्वीकार की गई हें कि दो तीन गोली चलने जैसी आवाज ग्रामीणों को सुनाई दी और गोली दहशत फैलाने के लिये चलाई गई।यहां बता दे कि कोई दिवाली का दिन भी नहीं था कि लोग पटाखा फोड़ता ,होली का दिन था।

जिस शराब तस्कर प्रभात के बारे में खबरों में चर्चा की गई थी ,वह चर्चित शराब तस्कर हें और समस्तीपुर जिला से आकर दरभंगा जिला के मोरों थाना क्षेत्र में रहकर शराब के धंधे को बड़े रूप में अंजाम दे रहा हें,जो जगजाहिर हें और सभी ग्रामीण परेशान हें लेकिन उसकी दबंगई इतनी कि डर से कोई बोलने को तैयार नहीं।

चर्चा यह भी हें इसके एवज में वह कई थानेदारों को पैसा देता हें और कई थानेदार उसके इशारे पर चलता हें। मोरों ,पटोरी आदि गांवों में कई दर्जन उसके गुर्गे भी हें।सूत्र बताते हें कि इस इलाके के अलावे समस्तीपुर एवं  दरभंगा जिला के कई थाना क्षेत्रों में भी इसका भेंडर हें जो होम डिलीवरी में माहिर हें।इसपर दर्जनों मुकदमे दर्ज हें और शराब तस्करी में महारत हासिल हें।

होली के दिन गोली चलाने का मकसद ही दहशत फैलाना था क्यूंकि होलिकादहन के दिन इसके गुर्गे के चार चक्का वाहन के शीशे पर कुछ लड़कों ने मट्टी फेंक दिया था फिर क्या था। गाड़ी पर सवार बदमाशों ने दो युवकों को अपने साथ चकमेहसी लेकर चला गया था । इसके बाद पटोरी गांव के आधा दर्जन से ज्यादा लोग चकमेहसी थाना क्षेत्र के प्रभात के घर पहुंचे ,वहां सभी ग्रामीणों से बॉन्ड भराया गया फिर दोनों लड़कों को आजाद किया इसे अपहरण भी कह सकते हें ।उसी दिन  देर शाम करीब बीस से अधिक मोटरसाईकिल पर सवार एवं दो चक्का गाड़ी से सभी पटोरी गांव पहुंचा और होलिका दहन के दिन ताबड़तोड़ चार पांच राउंड गोली हवा में फायर कर चला गया बात यही नहीं रुकी होली के दिन फिर इसी रूप में आकर 30-35राउंड गोली हवा में चलाया और हल्ला करते चला गया। इस घटना के बाद पूरा गांव दहशत में हो गया और कोई भी कुछ बताने से साफ इनकार कर दिया । दो दिन लगातार पटोंरी गांव में गोली चली और थानाध्यक्ष को इसके 15दिन बाद तक पता नहीं चला और पता तब चला जब किसी पत्रकार ने खबर छापी। ऐसे में कहा जा सकता हें कि थानेदार को महज डेढ़ किलोमीटर में हुई घटना की जानकारी नहीं मिलती हें तों थाना में बने रहने का क्या औचित्य हें।अपराधी हें ,तों ही वर्दी हें, नहीं तों वर्दी किस काम का।कई सवाल ऐसे हें कि मोरों थाना के इर्द गिर्द घूम रहें हें।

थानाध्यक्ष पायल भारती ने इस मामले को लेकर पूछने  पर कहा था कि उनके जानकारी में यह मामला नहीं हें फिर दो तीन राउंड फायरिंग की बात ही सही आखिर गोली तों चली।ऐसे में सवाल यही हें कि गोली चलने के दिन आपके तंत्र ने सूचना क्यूँ नहीं दिया ?और आपको कैसे पता नहीं चला ।ग्रामीण तों आज भी कह रहें हें कि सारी बातों की जानकारी मोरों थानाध्यक्ष को थी पर प्राथमिकी दर्ज भी करती तों केसे।सब गोलमाल हें।