बिहार के मधुबनी जिला का एक थानेदार ,जो सड़क दुर्घटना एवं अन्य दुर्घटनाओं में हुई मौत पर करा देते हें समझौता ,कोई प्राथमिकी नहीं ,सनहा के भरोसे करते हें थानेदारी ? कर देते हें फैसला ऑन द स्पॉट ?

दस्तक 7मीडिया  /संजय कुमार राय 

मधुबनी जिला के अरेर थाना के थानाध्यक्ष इन दिनों पुलिसिया कार्यशैली को लेकर काफी चर्चित हें। थानाध्यक्ष के पद पर रहते हुये पुलिस के नियमों को ताख पर रख देती हें और जो मनमर्जी करती हें।ऐसा लगता हें कि इन्हें वरीय पुलिस पदाधिकारियों का डर ही नहीं हें। दुर्घटना से संबंधित ऐसे दो मामले हें जिसे मधुबनी के एसपी ने भी संज्ञान लिया हें ,एसपी ने अरेर थाना के थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण भी पूछा हें और पांच दिन के भीतर जवाब देने को कहा हें लेकिन पांच दिन के बदले 11दिन बीत गये अबतक मधुबनी एसपी द्वारा कारवाई नहीं की गई हें। यहां बता दे कि इसी थाना क्षेत्र के पकरौली गांव में ट्रक की ठोकर से एक व्यक्ति की मौत सड़क दुर्घटना में हुई थी ,इसे लेकर  ट्रक मालिक और पीड़ित परिवार में अरेर थानाध्यक्ष ने समझौता करा दिया और प्राथमिकी दर्ज करना उचित नहीं समझा ,स्वाभाविक हें पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया होगा,ऐसे में मृतक परिवार को सरकारी सहायता राशि कैसे मिलेगी ,इसका जिम्मेदार कौन ?

इस मामले में जानकारी मिलने पर डीएसपी ने थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण पूछा और इसकी लिखित सूचना मधुबनी एसपी को 13मार्च 25को दे दी।
यातायात पुलिस उपाधीक्षक द्वारा 23मार्च 25को बेनीपुर अंचल कार्यालय में सड़क दुर्घटना से मृत्यु संबंधित कांडों की समीक्षा की गई एवं विस्तृत जानकारी के लिये लौटतें क्रम में अरेर थाना पहुंचे ,थाना दैनिकी का अवलोकन किया। इस दौरान 13मार्च 25को हुई दुर्घटना के मामले में पाया कि सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु का सनहा 0397दर्ज किया गया हें और थाना अध्यक्ष की उपस्थिति में जो समझौता हुआ हें उसका सनहा नंबर 04808दर्शाया गया हें और समय भी दर्शाया गया हें। इसी अवलोकन के क्रम में पुलिस उपाधीक्षक की नजर सनहा संख्या 0673पर पड़ी जिसमें दर्शाया गया हें कि ग्राम नरही स्थित गोल्ड ईंट भट्टा में पांच लोंगों के जख्मी हो जाने और इलाज के क्रम में एक आदमी के मृत्यु हो जाने की बात अंकित की गई हें। इस बाबत भी यातायात उपाधीक्षक सुजीत कुमार ने मधुबनी के एसपी को पत्र लिखा।
मधुबनी के एसपी ने यातायात डीएसपी के पत्र के आलोक में 5दिनों के भीतर अरेर थाना अध्यक्ष से स्पष्टीकरण की मांग करते हुये कहा कि मनमाने तरीके से स्वेच्छाचारिता दिखाते हुये प्राथमिकी दर्ज नहीं करना अत्यंत ही गंभीर मामला हें।एसपी ने थानाध्यक्ष को दिये पत्र में कहा हें कि आपके द्वारा थाना कार्यों में रुचि नहीं ली जा रही हें ,तथा उक्त घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेकर वरीय पदाधिकारी को गुमराह किया हें जो आपके कर्तव्य के प्रति लापरवाही ,कर्तव्यहीनता ,स्वेच्छाचारिता ,आदेश उलंघन का परिचायक हें।