अमर ने कहा- जो काबिलियत पर विश्वास रखते हैं, वही मंजिल पाते हैं।

जो अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते हैं,वे ही अक्सर मंजिल तक पहुंचते हैं। प्रसिद्ध शायर के इस पंक्ति को अररिया रेणुमाटी के लाल अमर आनंद ने आत्मसात करते हुए कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। रानीगंज के लक्ष्मीपुर निवासी जगदीश यादव और रामवती देवी के पुत्र अमर आनंद किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।

 

 

वे न सिर्फ गायिकी के क्षेत्र में देशभर में अपना झंडा बुलंद किए हुए हैं बल्कि अपने परिवार को भी एक माला में पिरोकर रखने के लिए भी जाने जाते हैं। बचपन से गीत गाने की ललक एवं विभिन्न ग्रामीण स्तर पर नाच ड्रामा और अन्य उत्सवों पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले अमर आनंद जादुई आवाज के बादशाह बन गए हैं। 1998 में साक्षरता अभियान के कला जत्था टीम सदस्य के रूप में गांव गांव जाकर महिलाओं,वृद्धों,पुरु षों को पढ़ेगी हरिया,पढ़ेगी रजिया तब साक्षर होगा जिला अररिया गाकर लोगों तक अपनी प्रतिभा तक पहुंचाई।इसके बाद ऐतिहासिक मां खड़ेश्वरी काली मंदिर में भजन गाकर लोगों के दिल में अमर बस गए। अमर आनंद के कई भाई हैं।

सुर संग्राम रियलिटी शो बना टर्निंग प्वाइंट अमर आनंद आज के दौड़ में बिहार कला संस्कृति विभाग के बड़े कलाकार के तौर पर जाने जाते हैं। अमर के जीवन का टर्निंग प्वाइंट वर्ष 2009 में महुआ चैनल पर प्रसारित होने वाला रियलिटी शो सुर संग्राम साबित हुआ। सिर्फ इस शो का हिस्सा बने बल्कि काफी प्रसिद्धि भी पाई। रियलिटी शो के दौरान मुंबई में उदित नारायण जी के साथ एक फिल्म में गाने का मौका मिला फिल्म का नाम था किसना कईलस कमाल था।