आप सब की आवाज (आसा) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और कार्यशैली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के साथ वह लंबे समय तक काम कर चुके हैं। नीतीश बाबू जब शुरू में NDA में थे, तो उनका कुछ मुद्दों पर बिलकुल स्पष्ट मत था। उस जमाने में यूनिफॉर्म सिविल कोड, अनुच्छेद 370 और राम मंदिर के निर्माण जैसे मुद्दे थे।

उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य और बॉडी लैंग्वेज पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम तो उनके शुभचिंतक हैं। भगवान से कामना करते हैं कि मुख्यमंत्री जी स्वस्थ रहें। बिहार की जो सेवा उन्होंने की है, समाज की जो सेवा की है, उसको हम लोग सब याद रखते हैं।

 

वो स्वस्थ रहेंगे तभी तो आगे भी कुछ काम कर पाएंगे। नीतीश कुमार पहले एक रोल मॉडल थे, लेकिन अब उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नीतीश कुमार अब भी बिहार की सेवा करने में सक्षम हैं ? उन्होंने कहा कि यह फैसला नीतीश कुमार की पार्टी के लोगों और गठबंधन के सहयोगियों को करना है।

अल्पसंख्यकों को अनदेखा नहीं किया जा सकता

आसा अध्यक्ष ने नए वक़्फ कानून पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नया वक्फ कानून लागू तो हो गया है, लेकिन अब यह देखना होगा कि देश में इस क़ानून के प्रति एकरूपता दिखती है या नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में बहुमत महत्वपूर्ण है, लेकिन अल्पसंख्यकों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता।

 

भारत सरकार का संकल्प ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है। भारत विविधता में एकता वाला देश है, जहां कई धर्मों और भाषाओं के लोग रहते हैं। उनका मानना है कि ऐसे माहौल में सभी के लिए बराबर अवसर होना चाहिए और किसी को भी यह न लगे कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है।

रामनवमी पर हवन करते पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह।
महाराष्ट्र में भाषाई हिंसा की कड़ी निंदा

आरसीपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा की महाराष्ट्र के कुछ लोगों की यह सोच अच्छी नहीं है। भारत, एक बहुभाषी देश है। यहां हर चार किलोमीटर में भाषा बदल जाती है और यह देश सबका है। संविधान में महाराष्ट्र के लिए अलग और बिहार के लिए अलग प्रावधान नहीं हैं।

उन्होंने भाषाई आधार पर हो रही हिंसा के परिणामों की ओर इशारा करते हुए कहा की “महाराष्ट्र में जो उत्पादन हो रहा है, जितने कपड़े बन रहे हैं, जितने औद्योगिक उत्पाद हैं, अगर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग उन्हें खरीदना मना कर देंगे तो क्या अच्छा होगा ?

 

यह देश एक है, इसलिए इस प्रकार की घटनाएं नहीं होनी चाहिए।” पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की न सिर्फ निंदा की जानी चाहिए बल्कि जो लोग इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारतवर्ष एक है और एक रहेगा।”

आरसीपी सिंह ने रामनवमी के मौके पर कहा कि आज एक ऐतिहासिक और शुभ दिन है, जिसका सनातन धर्म में विशेष महत्व है। आज भगवान राम का जन्मदिन है, जिन्होंने रामराज्य की स्थापना की थी।

 

रामराज्य की परिकल्पना में किसी भी वर्ग, भाषा या खान-पान की परवाह किए बिना सभी लोगों के लिए समान अधिकार थे। उन्होंने लोकतंत्र की तुलना रामराज्य से करते हुए कहा कि लोकतंत्र में भी समता, समानता, भाईचारा, सामाजिक सद्भाव और सांप्रदायिक सौहार्द होना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों से अनुरोध किया कि वो इस दिन को संकल्प दिवस के रूप में मनाएं और समाज, प्रदेश और देश में रामराज्य की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास करें।

इस मौके पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुन्ना सिद्दीकी, राष्ट्रीय महासचिव प्रियदर्शी अशोक, महासचिव संजय सिन्हा, लता सिंह मौजूद रहें।