सुन भाई चाचा ,हाँ भतीजा के फिल्म का असर मोरों थाने पर ?
अपराधियों में डीजीपी का भय ,अपराध से अर्जित संपति को बेच रहें हें अपराधकर्मी ,जिला स्तर के वरीय पुलिस अधिकारी इस मामले में  हें उदासीन  ?डीजीपी के दिये निर्देशों के डर से अपराधियों ने बेचा एक जेसीबी और पांच ट्रेक्टर।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

बिहार के डीजीपी के निर्देश का भले ही जिला स्तर पर या क्षेत्र स्तर पर पुलिस पदाधिकारी लापरवाही बरत रहें हो लेकिन उनकी कहीं बातों का खौफ अपराधियों में जरूर हें। अपराध से अर्जित सम्पतियों को अपराधी नष्ट करने में जुट गये हें ,खासकर वह सम्पति जिसमें चार चक्का व अन्य वाहन हें , जिसे खरीदकर अपराधी लोंगों के नजर में आ गये हें।
जी हाँ हम बात कर रहें हें बिहार के पुलिस महनिदेशक विनय कुमार के बारे में ,जिन्होंने योगदान के तुरंत बाद एक संदेश बिहार पुलिस को दिया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस के पदाधिकारी जो अपराध से अर्जित संपति हें अब उसे भी एटेच कर सकते हें,और कारवाई कर सकते हें।उन्होंने निर्देश दिया था कि इस प्रावधान को शख्ती से लागू करना हें और थाना स्तर से यह कारवाई शुरू होगी । थाना स्तर के पदाधिकारी एक दो अपराधियों को चिन्हित कर हर माह सूची बनाएंगे और कारवाई की दिशा में काम करेंगे।

डीजीपी के इस आदेश का असर भले ही थानास्तर पर अनुपालन नहीं हो रहा हो लेकिन इसका भय अपराधियों में दिख रहा हें।

इन दिनों मोरों थाना समेत कई क्षेत्रों में शराब तस्करी को बड़े पैमाने पर अंजाम दे रहें प्रभात चौधरी के बारे में चर्चा हो रही हें कि उसने अपना एक जेसीबी और पांच ट्रेक्टर  बेच दिया हें। उसे डर लगने लगा कि पुलिस उसपर कारवाई कर सकती हें।

सूत्रों पर भरोसा करें तों यह नेक ज्ञान उसके गांव के एक चाचा अवधेश कुमार चौधरी ने उसे दी जिसका शत प्रतिशत शराब तस्कर प्रभात ने पालन किया और अपना नामी -बेनामी सभी वाहन बेच दिया।

अब सवाल हें कि शराब माफिया प्रभात चौधरी के कथित चाचा  अवधेश चौधरी कौन हें ?तों ग्रामीणों का कहना हें कि उसका चाचा मोरों थाना में ही पदस्थापित दरोगा अवधेश कुमार चौधरी हें। सूत्र बताते हें कि समस्तीपुर जिला के चकमेहसी थाना के नीमा चकहैदर गांव के राम चंद्र चौधरी के पुत्र अवधेश प्रसाद चौधरी हें और इसी गांव के संजय चौधरी का पुत्र प्रभात चौधरी हें। दोनों में चचेरा चाचा और भतीजे का रिश्ता बताया जा रहा हें। ग्रामीण बताते हें कि यह भी कारण रहा कि शराब की तस्करी में मोरों थाना पुलिस का उसपर वरदहस्त रहा और वह खुलेआम दादागिरी कर शराब जैसे अवैध कारोबार को  अंजाम देते रहा। इस कारण मोरों थाना पुलिस की मोटी कमाई होती रही और पुलिस अनदेखी करती रही।

प्रभात की दादागिरी इतनी कि इसके खिलाफ पटोरी समेत आसपास के ग्रामीण बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहें हें। यहां तक की पटोरी गांव के स्व मदन चौधरी के यहां हवा में चलायी गई गोलियों के खोखे आस पास के पड़ोसी अपने घरों में रखे हें लेकिन कोई एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं हें। ग्रामीण कहते हें प्रभात का पुलिस प्रशासन पर कब्जा हें या फिर बोलने की जो हिम्मत करेगा उसे वह गोली मार देगा ,भय के कारण लोग कुछ भी बोलने से परहेज कर रहें हें। अब ऐसी परिस्थिति में पुलिस कारवाई कैसे करेगी यह पुलिस ही बता सकती हें।

ऐसे में यह भी देखना आवश्यक होगा कि चकमेहसी के थानेदार डीजीपी के आदेशों का पालन किया हें या नहीं ?चकमेहसी थाना के थानेदार के द्वारा अपराध से अर्जित सम्पति के मामले में अपनी सूची में प्रभात का नाम अंकित किया  हें या नहीं ,अगर समस्तीपुर एसपी को थानेदार द्वारा अब तक सूची में  प्रभात का नाम नहीं दर्शाया गया होगा तों चकमेहसी के थानेदार की भी भूमिका उतनी ही संदिग्ध हें और यह जांच का विषय हें क्यूंकि चकमेहसी और कल्याणपुर थाने में आधे से ज्यादा दर्जन मुकदमे प्रभात के विरुद्ध दर्ज हें जो शराब तस्करी से जुड़े हुये हें।

ग्रामीण कहते हें कि होली /होलिकादहन के दिन पटोरी गांव में चली दर्जनों राउंड गोली के मामले में  पुलिस को सभी बातों की जानकारी हें लेकिन चाचा और भतीजे की जोड़ी से पुलिस स्थिर बनी रहती हें और खुलेआम शराब का धंधा इस इलाके में चल रहा हें वह भी बड़े पैमाने पर।

हालांकि मोरों थानाध्यक्ष पायल भारती इन आरोपों से इनकार कर रही हें ,वहीं दारोगा अवधेश चौधरी का कहना हें कि ग्रामीणों के द्वारा लगाया जा रहा आरोप बेबुनियाद और निराधार हें,पुलिस और अपराधी में बहुत अंतर हें और हम अपराधियों के साथ अपराधियों के जैसा ही बर्ताव करते हें।