यातायात थाना में थानाध्यक्ष और अनुसंधानक की  मनमर्जी से कांडों के अनुसंधान में होता हें लीपापोती ,कांड के नामजद अभियुक्तों को बचाने में कर देते हें शातिर दिमाग का इस्तेमाल ,न्यायालय को भी पढ़ा देते हें झूठ का पाठ,चालक बन जाता हें खलासी।कहते हें ना अंधेर नगरी और चौपट राजा।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

एक कहावत हें “अंधेर नगरी ,चौपट राजा “और यह कहावत यातायात पुलिस पर सटीक बैठ रही हें।

जी हाँ ,यातायात थाने से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही हें। दुर्घटना के एक मामले में नामजद चालक के बजाय किसी दूसरे चालक ने न्यायालय में अपना ड्राईविंग लाईसेंस प्रस्तुत कर जमानत ले लिया हें ,न्यायालय के कारवाई में  पुरजोड़ समर्थन यातायात थानाध्यक्ष कुमार गौरव समेत अनुसंधानक ने भी किया हें।इस कारण यातायात पुलिस पर सवाल उठना लाजमी हें।

पुलिस के इसी गलत कार्यशैली को लेकर विभाग कटघरे में खड़ा हो जाता हें।इस मामले में अनुसंधानक समेत थानाध्यक्ष पर सवाल खड़े हो रहें हें। प्राथमिकी के अनुसार  नामजद चालक को जमानत लेना चाहिये था लेकिन इस मामले में दुर्घटना में घटना को कारित करने वाले चालक को यातायात थाने की पुलिस ने बाइज्जत बरी कर दिया हें।घटना में ट्रक चला रहा चालक कोई और था लेकिन जमानत किसी और चालक ने ली हें।ऐसे में यातायात थानाध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता की कार्यशैली संदेह के घेरे में हें।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पतौर थाना क्षेत्र के अनारकोठी के पास 28फरवरी 25की रात एक भारी वाहन की ट्रक (BR06GC-6992)ने एक मोटरसाईकल सवार को ठोकर मार दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस बाबत परिजन अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र के हाजीपुर किरण पट्टी निवासी सूरज सहनी के पुत्र राम नारायण सहनी ने अपने भाई की ट्रक से हुई मौत को लेकर यातायात थाना में मामला (32/25)दर्ज कराया।प्राथमिकी में स्पष्ट कहा गया कि समस्तीपुर जिला के रोसड़ा थाना क्षेत्र के देवनपुर गांव निवासी राम विलास यादव का पुत्र लालबाबू यादव ट्रक को चला रहा था जिसने साढ़े नौ बजे के करीब रात मेरे भाई बनारसी सहनी को ठोकर मारा जिससे उसकी मौत हो गयी।

इस मामले में चर्चा में बात आ रही हें कि जिस चालक का नाम यानि लालबाबू यादव को प्राथमिकी में अभियुक्त बनाया गया था दरअसल उसके पास ड्राईविंग लाईसेंस नहीं था। पुलिस महकमे में ही चर्चा हें कि इस मामले में यातायात पुलिस  के थानाध्यक्ष और अनुसंधानक ने किसी दूसरे चालक को न्यायालय में प्रस्तुत कर जमानत दिला दिया हें।

चुकी घटना पतौर थाना क्षेत्र के अनार कोठी में हुई थी और सूचना मिलने पर पतोड़ थाना की पुलिस ने ट्रक को खदेड़कर पकड़ा था ,इस दौरान पतोंर पुलिस ने ट्रक समेत ट्रक चला रहें चालक को पकड़ा था जो गाड़ी चला रहा था।पतोंर थाना की पुलिस ने चालक और ट्रक को यातायात पुलिस के सुपुर्द कर दिया था।पतोर थाना अध्यक्ष शिव नारायण ने इस बाबत पूछने पर बताया कि उन्हें सूचना जब मिली थी तों ट्रक और चालक को खदेड़कर पकड़ा था और  यातायात पुलिस के हवाले कर दिया था।लेकिन चर्चा हें कि ट्रक के साथ पकड़े गये चालक को यातायात थाने की पुलिस ने थाना लाते ही छोड़ दिया था।

इधर यातायात थाना में दर्ज हुई इस प्राथमिकी 32/25के वादी मृतक के भाई राम नारायण सहनी ने बताया कि जो चालक पकड़ा गया था उसका नाम लालबाबू यादव ही हें।राम नारायण ने कहा कि उसे भी इस बाबत पता चला हें और वह इसकी शिकायत वरीय पुलिस अधीक्षक से करेगा।

इधर यातायात थानाध्यक्ष कुमार गौरव का कहना हें कि ट्रक के साथ पकड़ाया चालक वास्तव में चालक नहीं था वह खलासी था।ट्रक चालक नईमुद्दीन था जो घटना होने के बाद फरार हो गया था ,इस मामले में नईमुद्दीन ने न्यायालय से जमानत ली हें।उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने यही कहा कि नईमुद्दीन वास्तव में चालक था और लालबाबू खलासी था।

लेकिन वास्तविकता यह हें कि लालबाबू यादव गाड़ी चला रहा था जिसके पास ड्राईविंग लाईसेंस नहीं था ,सूत्र बताते हें कि इस कारण ट्रक मालिक ने यातायात थाना को मेनेज किया और लाइसेसी चालक को न्यायालय में प्रस्तुत कर लालबाबू को खलासी और नईमुद्दीन को चालक बनाते हुये जमानत ले लिया।

यहां दूसरे पहलुओं को देखा जाय तों जिस चालक ने न्यायालय से जमानत लिया हें वह उत्तर प्रदेश राज्य के बिलासपुर जिला अंतर्गत केमरी थाना क्षेत्र के मौजूंउल्लाहकर  गांव निवासी अब्दुल हामिद का पुत्र तबीजूउद्दीन हें।ट्रक मुजफ्फरपुर जिले का और चालक उत्तर प्रदेश राज्य का ?यह बात हजम करने लायक भी नहीं हें।लेकिन ट्रक मालिक का अपना अंदाज और यातायात पुलिस की शातिराना दिमाग काबिले तारीफ जरूर हें।इस प्रकरण के मामले में निष्पक्ष जांच हो तों यातायात पुलिस के कारनामो पर कारवाई तों जरूर हो जाएगी।

इधर न्यायालय परिसर के कुछ वकीलों से इस संबंध में बात हुई तों इनका कहना हें कि ऐसे कई मामले हें जिसमें चालक कोई और हें  ,लेकिन लाईसेंस नहीं रहने पर दूसरे लाइसेसी चालक को न्यायालय में प्रस्तुत कर जमानत दिला दिया जाता हें।