एक तरफ सन्नाटा हैं ,दूसरी तरफ लोग जश्न मना रहें हैं। कुदरत का यह वास्तविक करिश्माई चेहरा हैं। एक तरफ कस्तूरबा गांधी के गरीब सेंकड़ों बच्चियां अपनी बिमारियों से कराह रही हैं वहीं दूसरी और इसे देख रेख की जिम्मा उठाने वाले प्रभारी चिकित्सा प्रभारी डॉ॰ प्रकाश सिंह के स्थानांतरण पर विराम लगने से इनके कार्यालय मे जश्न मन रहा हैं !जश्न इस बात का हैं कि बीस वर्षों से अधिक बरही स्थित स्वास्थ्य केन्द्र मे जमे हैं और सरकार ने फिर से इन्हें पदस्थापित कर दिया। सरकार ने भी अपने ही बनाए नियम को तोड़कर राज्य वासियों को पैगाम दें दिया हैं और अपनी कार्यशैली को जग जाहिर कर दिया हैं ?ऐसे मे भला इन बच्चियों का क्या दोष हैं।

हजारीबाग जिले के पद्मा स्थित कस्तूरबा गांधी स्कूल मे पढ़ने वाली कई छात्राएं बीमार चल रही हैं लेकिन इनकी सुधि लेने वाला कोई भी चिकित्सक नहीं हैं। इन बच्चियों के आंखों मे संक्रमण ,कमजोरी के कारण चक्कर आना ,कमजोरी होना आदि हैं। लेकिन इन बातों से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को क्या लेना देना हैं ?

 

इस बात का खुलासा तब हुआ जब पद्मा केन्द्र मे पदस्थापित डॉ॰ नेन्सी प्रिया कस्तूरबा गांधी विद्यालय मे औचक निरीक्षण के दौरान पहुंची। इस विद्यालय मे पढ़ रही छात्राएं डॉ॰ नेन्सी प्रिया को देखकर उस वक्त खिल गई जब उन्हें पता चला कि कोई डॉक्टर इस केन्द्र मे उन्हें देखने आई हैं। इन बच्चियों के आंखों मे एक आशा की किरण जगी और इन आंखों की आशाओं को डॉ॰ नेन्सी प्रिया ने पूरा भी किया। ये बच्चियां डॉ॰ नेन्सी के पास बारी बारी से आकर अपनी व्यथा सुनाई ,उनके साथ हो रही शारीरिक कष्ट को बताया।डॉ॰ नेन्सी ने बारी बारी से सभी को दवा देकर आश्वस्त कराया ,कहा मे आऊंगी और बार बार आऊंगी जब तक आपकी बीमारियां खत्म नहीं हो जाती।
दरअसल इस केन्द्र पर आरबीएस के अमन कुमार की डयूटी इन बच्चियों को देख रेख के लिये हैं लेकिन ये अपने डयूटी के प्रति लापरवाह हैं बच्चियों को देखने आते ही नहीं या फिर यू भी कह सकते हैं कि अनुमंडलीय अस्पताल मे वर्षों से जमे प्रभारी चिकित्सा प्रभारी डॉ॰ प्रकाश ज्ञानी के इशारों पर ये अपनी डयूटी बजाते हैं ?


भारत सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्रामीण इलाके के गरीब बच्चों को मुफ्त मे पढ़ाई के अलावे उनके रहने सहने खाने पीने के लिये कस्तूरबा गांधी विद्यालय की नींव देश भर मे रखी थी। इस केन्द्र के बेहतर संचालन का जिम्मा राज्य सरकार के पास हैं इसके लिये भारत सरकार पर्याप्त धन भी खर्च करती हैं ताकि अनुसूचित जाति ,जनजाति ,पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक वर्ग के बच्चियों को उच्च शिक्षा मिल सके। इसकी देख रेख के लिये स्थानीय स्तर पर चिकित्सकों की भी डयूटी प्रत्येक जगह पर लगाई गई हैं ताकि कोई भी बच्चियां बीमार नहीं रह सके। लेकिन पद्मा स्थित इस विद्यालय मे कोई भी चिकित्सक सुधि लेने तक नहीं जाते।
स्कूल की कई बच्चियों ने बताया कि इस विद्यालय मे हमें देखने के लिये या चिकित्सा सुविधा देने के लिये पूर्व मे कोई चिकित्सक नहीं आते थे। बच्चियों ने कहा कि कुछ महीनों से डॉ॰ नेन्सी आती हैं और हर बच्चियों का हाल चाल जानती हैं और यहां आकर इलाज भी करती हैं।