मधुबनी पेंटिंग साड़ी पहनकर वित्त मंत्री ने संस्कृति व कलाकारों का सम्मान किया–आरके जायसवाल।
मधुबनी पेंटिंग साड़ी पहनकर वित्त मंत्री ने संस्कृति व कलाकारों का सम्मान किया–आरके जायसवाल।
मधुबनी पेंटिंग साड़ी पहनकर वित्त मंत्री ने संस्कृति व कलाकारों का सम्मान किया–आरके जायसवाल।
दस्तक7मिडिया,नई दिल्ली।
शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश किया। यह साड़ी मधुबनी दौरे के समय पद्मश्री दुलारी देवी उन्हें वो साड़ी भेंट की थी।
मधुबनी पेंटिंग, जिसे मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है, लोक कला की एक पारंपरिक और जटिल शैली है जो भारत के बिहार के मिथिला क्षेत्र से उत्पन्न हुई है। इस कला रूप की विशेषता इसके जीवंत रंग, ज्यामितीय पैटर्न और प्राकृतिक रंगों का उपयोग है। मधुबनी पेंटिंग अक्सर हिंदू पौराणिक कथाओं, प्रकृति और दैनिक जीवन के दृश्यों को दर्शाती हैं। यह पीढ़ियों से आम तौर पर मिथिला क्षेत्र के लोगों द्वारा बनाई जाती हैं। बीते कुछ वर्षों से यह उपेक्षा का शिकार रही है, लेकिन अब सरकार द्वारा कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत कर व पद्मश्री दुलारी देवी द्वारा भेंट की गई मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश करना स्वभाविक रूप में ऊर्जा वर्धक है, लेकिन अभी सरकार से बहुत कुछ अपेक्षित है।मधुबनी कला का इतिहास और उत्पत्ति की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति रामायण के दौरान हुई थी, जब राजा जनक ने कलाकारों को अपनी बेटी सीता के विवाह को चित्रित करने का कार्य सौंपा था।वहीं इसकी खोज 1934 में विलियम जी आर्चर नामक एक ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारी द्वारा की गई थी। एक बड़े भूकंप से हुए नुकसान का निरीक्षण करते समय उनकी नजर बिहार में घरों की भीतरी दीवारों पर लगी इन पेंटिंग्स पर पड़ी। मूलतः यह कला शुभ अवसरों पर मिट्टी की दीवारों या मिट्टी की जमीन पर बनाई जाती थी और अगले दिन उसे मिटा दिया जाता था। नतीजतन, ये कलाकृतियां संरक्षित नहीं रह सकीं। फिर जब क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ा तो अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड ने मधुबनी जिले की महिलाओं से जीविकोपार्जन हेतु कैनवास, कागज या कपड़े पर चित्रकारी करने का आग्रह किया। तब से चित्रकला विभिन्न तरीकों से विकसित हुई है।विश्वभर में मिलने वाली मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियां मधुबनी जिले में ही मुख्य रूप से बनाई जाती है। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में मधुबनी पेंटिंग के कलाकार है जो विभिन्न क्षेत्रों में पेंटिंग बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। मिथिला पेंटिंग के कुछ प्रसिद्ध कलाकार दुलारी देवी, रांटी की महासुन्दरी देवी, गोदावरी दत्ता, बउआ देवी, जगदंबा देवी, सीता देवी, गंगा देवी व संजय जायसवाल आदि देश में विख्यात है। वित्त मंत्री द्वारा मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनने पर मधुबनी पेंटिंग कलाकारों, मिथिलांचल सहित मिथिला चित्रकला संस्थान व कलाकारों में खुशी की लहर है। नई दिल्ली से हमारे सहयोगी ई.आर के जायसवाल की रिपोर्ट।
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