हाउसिंग कालोनी से हरिपट्टी गांव तक बन रहें नालों की ठेकेदारी के बीच गहरा राज हैं ?इस गहरे राज से आखिर पर्दा उठाएगा कौन ?बन रहें नालों के घटिया निर्माण को लेकर अब लोंगों के जुबान तक यह बात आ रही हैं कि करीब बीस करोड़ की योजना में ऐसे घटिया काम कैसे हो सकते हैं ?यह जांच का विषय हैं।
इस संबंध में एक ग्रामीण ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि उसे जब पता लगा कि यह योजना करीब बीस करोड़ का हैं तो उसने आरटीआई के तहत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा के कार्यपालक अभियंता से सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगी । उस ग्रामीण ने कहा कि दो बार मेरे द्वारा मांगी गई सूचना में  मुझे कार्यपालक अभियंता ने  कोई सूचना ही नहीं दिया। उसने बताया कि जब अधीक्षण अभियंता से सूचना मांगी तो उन्होंने कार्यपालक अभियंता पर दबाव बनाया। फिर कार्यपालक अभियंता ने करीब दो हजार रुपये जमा कराया। उक्त ग्रामीण ने बताया कि इसके बाद भी जो सूचना मुझे मिली उसमें कई पन्ने सादे थे। उसने कहा कि यही नहीं इसके तुरंत बाद कार्यपालक अभियंता समेत संबंधित पदाधिकारी बदल दिये गये।
उसने कहा कि मेरे द्वारा यह भी पूछा गया था कि महज चार किलोमीटर नाले के निर्माण का टेंडर करीब बीस करोड़ का कैसे हो गया। जिसका जवाब आज तक नहीं मिला।उन्होंने कहा कि इस सच्चाई को जानने के बाद ऐसा लग रहा हैं कि गड़बड़ तो कुछ हैं ?
लोग कह रहें हैं कि यह नाला बन रहा हैं या सरकारी पैसों का लूट खसोट हैं।
लोग अंदाजा लगा रहें हैं कि जब सड़क की ढलाई 18इंच मोटी एवं 25फिट चौड़ी बनाई जाती हैं तो भी चार या पांच किलोमीटर में निविदा की राशि इतनी बड़ी नहीं होती।इस योजना में तो चार पांच इंच की ढलाई भी नहीं हो रही हैं और चौड़ाई भी पच्चीस फिट नहीं हैं तो टेंडर की राशि बीस करोड़ कैसे हो गई।
जिलाधिकारी आवास से महज सटे कुछ ही दूरी पर चल रहें कार्यों को लेकर कई लोंगों ने आक्रोश जताते हुये यह जानकारी दी कि नाले का घटिया निर्माण कार्य डीएम के आवास के महज कुछ दूरी पर चल रहा हैं। स्थानीय लोंगों ने कहा कि काम के नाम पर खाना पूर्ती की जा रही हैं। लोग यह भी कह रहें थे कि इतने दिनों से काम चल रहा हैं कोई भी इंजीनियर देखने नहीं आते। शुरुआती दौर में इंजीनियर आये थे जब खुदाई का काम चल रहा था।
बता दें कि यह कार्य बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा के अधीन कार्य हैं।
अब लोंगों की मांग उठने लगी हैं कि इस नाले की गुणवत्ता की जांच हो ?साथ ही एस्टीमेट की भी जांच हो कि चार पांच किलोमीटर में बनने वाले इस नाले का प्राकलन राशि बीस करोड़ का कैसे हो गया ,यह बड़ा घोटाला हैं।
इस बाबत जानकारी के लिये  कार्यपालक अभियंता को फोन लगाते हैं तो वह  फोन नहीं उठाते।ऐसे में शक हैं कि गड़बड़ झाला तो जरूर हैं ,बस जांच की जरूरत हैं ॥