दरभंगा जिला में ट्रेफिक व्यवस्था और नगर निगम की लापरवाही को लेकर कई सवाल उठ रहें हैं। सड़क जाम की समस्या से लोग परेशान हैं लेकिन इस समस्या का हल निकालने के लिये कोई भी पदाधिकारी सक्रिय नहीं हो रहें हैं इस कारण यह समस्या एक चुनौती बन गई हैं। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वाहनों की अत्यधिक वृद्धि हो गई हैं और सड़कों की चौड़ाई दशकों पुरानी हैं। जाम लगने का यह बहूत बड़ा कारण हैं।
वहीं दूसरी और इन्हीं सड़कों के दोनों तरफ लोग दुकानें सड़कों पर खड़ी दिये हैं। तरह तरह के ठेले लगा रहें हैं। सड़क पर ही दुकानें सज जाती हैं। हर दुकान के आगे दूकानदार सड़क अतिक्रमण कर बैठ जाते हैं। डीएम कार्यालय के सामने मोटरसाइकिल और चार चक्का वाहन सज जाती हैं। लहेरियासराय थाना समेत एसडीपीओ कार्यालय के गेट पर चारों तरफ से दुकानें सज जाती हैं। जिस सड़क में आप चले जाये यही स्थिति उत्पन्न दिखाई देती हैं।
अब सवाल उठता हैं कि इसे अतिक्रमणमुक्त कौन कराएगा। थानेदार कहते हैं कि यह काम ट्राफिक पुलिस का हैं। ट्रेफिक पुलिस कहता हैं कि ठेले को हटाने का काम नगर निगम का हैं।
इस बीच जिलाधिकारी का आदेश दम तोड़ता दिखाई पर रहा हैं। ऐसे में इसकी जवाबदेही किसकी हैं यह तो जिला प्रशासन को ही तय करना पड़ेगा।
डीएम का शख्त आदेश था कि समाहरणालय और कोर्ट के बीच एक भी मोटरसाइकिल या चार चक्का वाहन खड़ी नहीं हो। इस आदेश के बाद कुछ दिनों तक बड़े जोर शोर से यातायात डीएसपी के नेतृत्व में अवैद्य पार्किंग में लगाये गये वाहनों को उठाया गया ,यही नहीं जुर्माना भी लगाया गया लेकिन कुछ दिनों के बाद अब डीएम का आदेश भी धूल फांक रहा हैं।
दोनार चौराहा से लेकर गुमटी के आगे तक दुकानदार एवं अवैध पार्किंग के कारण यातायात व्यवस्था थम जाती हैं। बेता चौक ,लोहिया चौक आदि कई स्थानों पर यही हाल हैं। रेलवे स्टेशन से दोनार जानें वाली सड़कों पर तो सब्जी बाजार ही सज गया। कई कारण हैं जो जाम के समस्या का पूरक हैं।
कई कर्मियों के जेब में हर माह इस मद से लाखों की वसूली होती हैं लेकिन इससे निजात पाने के लिये जिला प्रशासन कोई कदम नहीं उठाता। लहेरियासराय टावर से लोहिया चौक होते हुये बस स्टेंड तक सौ से अधिक ठेले और दुकान हैं जो सड़कों पर हैं। बताया जा रहा हैं कि हर महीने इनसे एक बड़ी रकम वसूल की जाती हैं।
लहेरियासराय थानाध्यक्ष कुमार कीर्ति ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में यातायात प्रभारी या उनके पदाधिकारियों की यह जवाबदेही हैं। इस टाल मटोल की नीति में वास्तव में कौन जिम्मेदार हैं ?