बाल मजदूरी रोकने के लिए सर्व प्रथम गरीबी को मिटाना होगा,जिससे गरीब परिवार आर्थिक उपार्जन के लिए अपने बच्चों को मजदूरी के लिए नहीं भेजेगा, उन्हें अपने बच्चों को सुयोग्य नागरिक बनाने के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं रहता है– नटवर मिश्र।

उत्तम सेनगुप्ता/दरभंगा

सरकार के लाख प्रयास के बावजूद बाल मजदूरी को समाप्त नहीं किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभाग में पदस्थापित अधिकारी को पुरे ईमानदारी के साथ सरकार के गाइडलाइन का अनुपालन करना होगा। लेकिन ऐसा नहीं होता है,क्यों कि इनके कार्य शैली से निजी स्वार्थ की बू आती है। तभी तो क्षेत्र में सैकड़ों जगहों पर बाल मजदूर होटल, मोटर, मोटर गैरेज के अलावा घरेलू कार्य में लगे हुए हैं। ऐसे में जिला प्रखंड क्षेत्र से बाल मजदूर मुक्त कराने की बात कहना बेईमानी होगी।जानकारी के अनुसार बाल मजदूरी अधिनियम 1986 के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को जोखिमपूर्ण रोजगार में नहीं लगाना चाहिए। बाल श्रमिकों को ऐसा कार्य दिया जाना चाहिए जिस कार्य से उनके श्रम का आंकलन किया जा सके। बाल श्रमिक के विषय को लेकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता नटवर कुमार मिश्र का कहना है कि बाल मजदूरी रोकने के लिए सर्व प्रथम गरीबी को मिटाना होगा, जिससे गरीब परिवार आर्थिक उपार्जन के लिए अपने बच्चों को मजदूरी के लिए नहीं भेजेगा। इसके अलावा संबंधित विभाग के अधिकारियों को अपने कार्य के प्रति संवेदनशील रहना होगा। गरीब परिवार के लोगों के बीच शिक्षा का प्रचार प्रसार कर बाल मजदूरी पर विराम लगाया जा सकता है। क्योंकि अशिक्षित लोग बाल मजदूरी को नहींं समझता है। उन्हें अपने बच्चों को सुयोग्य नागरिक बनाने के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं रहता है। बाल श्रम पर विराम लगाने का एक सुलभ उपाय यह भी है अगर आम लोग बच्चों से काम करना बंद कर दें। तब जाकर इस पर अंकुश लग सकता है। इसी दौरान एक 13 वर्षीय एक बालक को बिरौल-हाटी मुख्य मार्ग पर टोटो चलाते देख अधिवक्ता श्री मिश्र ने कहा कि एक ओर बाल श्रमिक को मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा है। दुसरी ओर ये बाल श्रमिक जो जोखिम भरा कार्य मुख्य सड़क पर किसी रोक टोक के गैर कानूनी रूप से वाहन चला रहा इस बाल श्रमिक को देखने की फूर्सत किसी को नहीं है।