गौर गोविंद कुटीर चनौर में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया गुरु पूर्णिमा दिवस
गौर गोविंद कुटीर चनौर में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया गुरु पूर्णिमा दिवस
गौर गोविंद कुटीर चनौर में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया गुरु पूर्णिमा दिवस
मनीगाछी संवाददाता दरभंगा /
मनीगाछी प्रखंड क्षेत्र के चनौर गांव स्थित गौर गोविंद कुटीर में शिष्यों ने श्रद्धा पूर्वक गुरु पूर्णिमा दिवस मनाया।इस अवसर पर शिष्यों ने गुरु को परमेश्वर का स्वरूप मानते हुए उनके चित्रों पर माल्यार्पण किया।गौर गोविंद कुटीर में उपस्थित शिष्यों ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि पांच प्रकार के गुरुओं में प्रथम चेत्य या अंतर्यामी गुरु, दूसरा श्रवण गुरु, तीसरा शिक्षा गुरु, चौथा दीक्षा गुरु और पांचवा सद्गुरु होते हैं। उपास्यदेव का मूल मंत्र देने वाले दीक्षा गुरु हैं। जिससे भजन संबंधी शिक्षा ग्रहण किया जाए वे शिक्षा गुरु कहे जाते हैं। प्राय: दीक्षा गुरु और शिक्षा गुरु एक ही होते हैं। लेकिन दीक्षा गुरु के नहीं रहने या उनके निर्देश पर किसी शिक्षा गुरु से भजन संबंधी शिक्षा ग्रहण कर साधना मार्ग में साधक को आगे बढ़ने से लाभ होता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौर गोविंद कुटी चनौर में रविवार को आयोजित अष्टयाम संकीर्तन के उपरांत प्रवचन के दौरान बोलते हुए विरक्त संत श्रीचरण दास ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीगुरुदेव स्वरूपत: श्रीकृष्ण के भक्त हैं। लेकिन, शिष्य को अपने गुरुदेव को श्रीकृष्ण का आविर्भाव विशेष मानना चाहिए। स्वयं श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भागवत में कहा है कि हमसे पहले अपने गुरुदेव की पूजा करें। फिर हमारी पूजा करने से शिष्य को लाभ होगा। भक्ति शास्त्र के अनुसार श्रीगुरुदेव स्वरूपत: श्रीकृष्ण के प्रियतम भक्त हैं। ऐसे में शिष्य को श्रीकृष्ण में जैसी प्रीति करनी चाहिए, वैसी ही प्रीति श्रीगुरुदेव में करनी चाहिए। जैसे श्रीकृष्ण पूज्य हैं, श्रीगुरुदेव भी उसी प्रकार पूज्य हैं। श्रीकृष्ण गुरु रूप में भक्त के ऊपर कृपा करते हैं। स्वयं भगवान किसी को मंत्र दीक्षा नहीं देते। श्रीकृष्ण की शक्ति ही श्रीगुरुदेव के चित्त में आविर्भाव होकर शिष्य पर कृपा करती है। पंडित गुणानंद चौधरी ने कहा कि आज के ही दिन वेद को चार भागों में विभक्त करने वाले, महाभारत सहित संपूर्ण पुराणों के सार श्रीमद्भागवत की रचना करने वाले श्री वेदव्यासजी का जन्म हुआ था। आध्यात्मिक मार्ग में इसी दिन को गुरु पूर्णिमा मनाने का प्रचलन है। शिष्यगण बड़े ही श्रद्धा के साथ अपने गुरु का पूजन करते हैं। श्रीधर झा ने कहा कि गोरीया आचार्य में से एक प्रमुख श्री सनातन गोस्वामी का आज के ही दिन गोलोक गमन हुआ था। इसलिए गोरिया वैष्णव बड़े ही उत्साह के साथ आज सिर मुडा कर उनके तिरोभाव दिवस को धूमधाम से मनाते हैं। व्रज में इस पूर्णिमा को मुड़िया पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। मौके पर किशोरी मंडल, त्रिलोक कुमार मिश्र, छोटू, गोविंदजी, मंजरी कुमारी आदि ने बड़े मनोयोग से भजन कीर्तन किया। वहीं दूसरी ओर मकरंदा गांव में गुरु गौर कुंज में बड़े ही धूमधाम से गुरु पूर्णिमा मनाया गया संत किशोरी चरण दास के शिष्यों ने उनकी पूजा की और भंडारा का आयोजन किया गया। साथ ही क्षेत्र के कई गांव में यह उत्सव धूमधाम से मनाया गया।