दरभंगा स्थित मद्य निषेध विभाग के काले कारनामे का सच ,शराब के साथ पकड़े गये नमक के बोरे को गोदाम में रखने के बजाय चोरी छिपे बेचने की कर दी तैयारी ?क्या जब्त शराब में भी किया जाता हैं ऐसा ही खेल ?
दरभंगा स्थित मद्य निषेध विभाग के काले कारनामे का सच ,शराब के साथ पकड़े गये नमक के बोरे को गोदाम में रखने के बजाय चोरी छिपे बेचने की कर दी तैयारी ?क्या जब्त शराब में भी किया जाता हैं ऐसा ही खेल ?
दरभंगा स्थित मद्य निषेध विभाग के काले कारनामे का सच ,शराब के साथ पकड़े गये नमक के बोरे को गोदाम में रखने के बजाय चोरी छिपे बेचने की कर दी तैयारी ?क्या जब्त शराब में भी किया जाता हैं ऐसा ही खेल ?
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा स्थित मद्य निषेध बिभाग के कर्मियों /पदाधिकारियों के काले कारनामे को लेकर पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।महज चंद रुपये अवैध रूप से कमाने को लेकर इस विभाग का घिनौना चेहरा सामने आया हैं।यहां तेनात कर्मियों /पदाधिकारी के इस हरकत के बाद विभाग के आला अधिकारी भी सकते हैं।
जानकारी के अनुसार 16जुलाई को मद्य निषेध विभाग की टीम ने नमक लदे बारह चक्का ट्रक में शराब को बरामद किया था इस दौरान भारी मात्रा में शराब के साथ विभाग ने नमक के बोरे को जब्त किया जो तकरीबन डेढ़ हजार बोरे से अधिक था।ट्रक पर लदे नमक को मद्य निषेध विभाग की टीम को अपने गोदाम या मालखाना में बारह चक्का गाड़ी से उतारकर रख देना चाहिये था ,मगर ऐसा नहीं हुआ।विभाग के कर्मियों ने चोरी छुपे इस नमक के बोरे को बेचने की तैयारी शुरू कर दी और बारह चक्का ट्रक से नमक उतारकर भाड़े के पीक -अप (407गाड़ी )और वहां पुलिस लिखा स्कार्पियो पर लादना शुरू कर दिया ,इस बीच इस खेल की जानकारी कुछ स्थानीय लोंगों को हुई ,स्थानीय लोंगों ने भी वहां आकर कई नमक के बोरे को लूटा और चलते बना ।पुलिस के मौजूदगी में वहां रखा जब्त नमक के बोरे को कैसे स्थानीय लोग लूटकर जा सकते हैं ?यह कहीं ना कहीं इन सभी के गलत आचरण को दर्शाता हैं।
यही नहीं स्थानीय लोंगों ने कुछ पत्रकारों को इस बाबत जानकारी दी।कई पत्रकार जब वहां पहुंचे तो मामला सामने आ गया।इसकी शिकायत सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार से की गई ,सहायक आयुक्त ने विभाग के एक पदाधिकारी को जांच में भेजा लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
सूत्रों पर अगर भरोसा करें तो बताया जा रहा हैं कि इस घटना से पहले एक पीक अप नमक को विभाग के अधिकारियों /कर्मियों ने बाजार में कहीं बेचा हैं यह दूसरा खेप था ,लेकिन पुख्ता सबूत नहीं रहने के कारण इस बात पर मुहर लगाना सही नहीं होगा ,लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता हैं कि शराब के साथ जब्त नमक को कैसे बेचने की हिम्मत इन कर्मियों ने जुटाई ?इनके इस कारनामे से ऐसा शक हो रहा हैं कि जब्त शराब के विनष्ट के दौरान भी इन अधिकारियों /कर्मियों के द्वारा कागजी खेल खेला जाता होगा और जब्त शराब को बेच दिया जाता होगा ,जो जांच का विषय हैं।
दस्तक 7का प्रयास हैं कि इस प्रकरण में जुड़े सभी कर्मियों /पदाधिकारियों का नाम सामने लाना ? फिलहाल यह मामला गंभीर हैं ,विभाग के आलाधिकारी को इस मामले की जांच कर दोषी कर्मियों /पदाधिकारियों पर कारवाई करना आवश्यक हैं ?
जांच में आयें पदाधिकारी पत्रकारों के सामने ऐसे गिर गिराने लगे कि पत्रकार भी अनदेखी कर वहां से धीरे धीरे निकल गये,लेकिन मामला संगीन हैं।विभाग के कर्मी /पदाधिकारी ऐसे हरकत करने लगेंगे तो सरकार की बदनामी होती हैं और विभाग पर भी काला धब्बा लगता हैं।