दरभंगा जिला में एक ऐसा गांव भी ,जो कोयले की जलती आग पर चलकर मुहर्रम के दिन मनाते हे मातम ,कोई ब्लेड से सीना चीर लेता तो कोई तलवार से माथा
दरभंगा /संजय कुमार राय
खून से लथपथ ,कोयले की तपतपाती आग पर चलकर मातमी जुलूस ,जुलूस में शामिल सिया समुदाय के लोग ,फिर भी चेहरे पर कोई शिकन नहीं। यह गांव कहीं और नहीं दरभंगा जिला के एपीएम थाना क्षेत्र का चंदनपट्टी गांव हे जहां मुहर्रम के मातमी जुलूस को देखकर लोंगों के रोंगटे खड़े हो जाते हे। कोई ब्लेड से अपना सीना चीर रहा होता हे तो कोई तलवार से अपने सिर को लहूलुहान कर लेता हे। ऐसा कर इमाम हुसैन एवं उनके साथियों के शहादत पर गम का इजहार सभी करते हे।
चंदनपट्टी गांव से जुलूस निकलकर इमामबाड़ा से तजिया ,अलम ,जुल्फेंकार एवं निशान के साथ नौहा मातम मनाते हुये निकला ,या हुसैन -या हुसैन का आवाज एक साथ बुलंद कर चल रहें थे। आसपास के लोंग इसे देख रहें थे। जो राहगीर जा रहें थे ठमक गये। दो घंटे से ऊपर के बाद जंजीरी मातम करते हुये शांतिपूर्ण तरीके से इमामबाड़े में दाखिल हो गये।इस गांव का नजारा मुहर्रम के अवसर पर कुछ अलग ही होता हे जो कम दिखाई पड़ता हे ॥वास्तव में मुहर्रम के दिन का अर्थ यही हे ,और लोग मातम मनाते हे।
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