उन्होंने कहा कि दो-तीन बाद पदाधिकारी के साथ समीक्षा बैठक है, जिसमें वह इस मुद्दे को उठाएंगी। जरूरत पड़ी तो लोकसभा में भी मामला को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां अधीक्षक नहीं हैं, जबकि उपाध्यक्ष को भी बार-बार कॉल किया गया तो उन्होंने आने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि वह जनप्रतिनिधि हैं और सरकारी सेवाओं में जनता को क्या मिल रहा है यह देखने का उनका हक है। वह गायब डॉक्टर से लेकर उपाधीक्षक समेत सभी लोगों से लिखित स्पष्टीकरण पूछेंगी। दिल्ली में रहने के दौरान मिल रही थी सदर अस्पताल की शिकायत
निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शांभवी ने बताया कि जब वह दिल्ली में थी तो सदर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर लगातार उनके पास फोन पहुंच रहे थे। जब वह दिल्ली से लौटी है तो यहां की व्यवस्था देखने के लिए पहुंची थी। यहां की व्यवस्था काफी खराब है, बेड पर चादर नहीं है, वार्ड में डॉक्टर नहीं है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह पानी लगा है। ऐसी स्थिति में इलाज करने के लिए पहुंचने वाले मरीज ही खुद इंफेक्शन के शिकार हो जाएंगे तो उनका ट्रीटमेंट कैसे हो पाएगा।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी वार्ड की भी स्थिति खराब नजर आई। कहीं भी मरीज को प्रॉपर ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। पीकू वार्ड में मरीज तो हैं पर डॉक्टर नहीं है। वार्ड के सामने पूरा जल-जमाव लगा हुआ है।
