प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर पटना जिला में दो थानेदार निलंबित ,एसएसपी ने की कारवाई। दरभंगा जिला में प्राथमिकी नहीं दर्ज करने वाले थानेदार पर नहीं होती कारवाई ?
दरभंगा /संजय कुमार राय
पटना जिला में थानेदार द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं किये जानें के मामले में वरीय पुलिस अधीक्षक ने दो थानेदार को निलंबित कर दिया हैं। इस कारवाई के बाद पटना जिला के थानेदारों में हड़कंप हैं,लेकिन दरभंगा जिला में इससे इतर हैं ,अंग्रेजों के रौब में थानेदार द्वारा प्राथमिकी नहीं दर्ज की जाती हैं।कुछ थानेदार अंग्रजों के सलिखे पर आज भी थानेदारी कर रहें हैं और वरीय पुलिस पदाधिकारी मूक दर्शक बने रहते हैं ?कहीं ऐसा तो नहीं कि थानेदार के संरक्षण में कोई बिचौलिया हावी हो और वह बैठकर सिटी बजा रहा हो ?अगर ऐसा नहीं हैं तो ऐसे मंसूबा पालने वाले थानेदार पर दरभंगा जिला में कारवाई क्यू नहीं ?
प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर दो थानेदारों को पटना के एसएसपी ने किया निलंबित।
पटना जिला में शारीरिक शोषण को लेकर रामकृष्ण नगर थानाध्यक्ष को एक पीड़िता ने अपनी व्यथा दर्शाते हुये न्याय के लिये आवेदन दी थी लेकिन चार दिन बीत जानें के बाद रामकृष्ण नगर के थानाध्यक्ष पुनि कृष्ण चंद्र भारती द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इस बात की शिकायत पीड़िता ने एसएसपी से की ,एसएसपी ने सदर एसडीपीओ 2को इस मामले में जांच कर प्रतिवेदन देने को कहा। सदर एसडीपीओ ने इस मामले में थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण पूछा ,संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एसएसपी ने थानाध्यक्ष पुनि कृष्ण चंद्र भारती को सस्पेंड कर दिया।
वहीं दूसरी और एक दैनिक समाचार ने प्राथमिकी दर्ज नहीं करने को लेकर बेउर थानाध्यक्ष के विरुद्ध खबर छपी ,एसएसपी ने इस खबर के आलोक में जांच करवाते हुये दोषी पाये जानें पर बेउर थाना के थानाध्यक्ष पुनि सुनील कुमार को निलंबित कर दिया।पीड़ित के आवेदन पर बेउर थाना के थानाध्यक्ष ने नौ दिन बीत जानें के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं किया था।इस आलोक में निलंबित कर दिया गया।
प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये दर -दर की ठोकरें खा रहें हैं शिक्षक।
लेकिन दरभंगा जिला की कुछ अलग ही कहानी हैं।
यहां दो महीने तक एक शिक्षक बहादुरपुर थाने का चक्कर लगाते रहें लेकिन बहादुरपुर थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। शिक्षक वीरेंद्र सिंह थक हारकर बुधवार को सिटी एसपी से शिकायत की हैं।शिक्षक वीरेंद्र सिंह के साथ करीब पांच लाख की ठगी हुई हैं इसी मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराने बहादुरपुर थाना गये थे।दो महीने तक जब थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की तो उन्होंने इसकी शिकायत सिटी एसपी से करते हुये अनुरोध किया हैं कि उनके आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर की जाय।
रोजगार सेवक के पिटाई के मामले में भी दर्ज नहीं हुई प्राथमिकी।
वहीं बहादुरपुर प्रखंड में मनरेगा के रोजगार सेवक की पिटाई मुखिया पति द्वारा कार्यालय में घुसकर कर दिया गया लेकिन न्याय के लिये थाना पर गये रोजगार सेवक के आवेदन पर बहादुरपुर थाना के थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की।बहादुरपुर थाना के थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने यह कहते हुये रोजगार सेवक को थाना से विदा कर दिया कि अपने वरीय पदाधिकारियों से आवेदन पर अनुमोदन कराकर लाइये।अगर इस बीच रोजगार सेवक के साथ कोई भी घटना घटी तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ?ऐसा लग रहा हैं कि अब किसी बच्चे के साथ मारपीट की घटना घटेगी तो उसके बाप से अनुमोदन कराकर थाने में देना पड़ेगा तब प्राथमिकी दर्ज होगी ?

