भवन निर्माण विभाग के अधिकारी निविदा से पहले संवेदक से करा लेते हैं विभागीय काम ???ऐसे में टेंडर को रद्द करना उनकी मजबूरी ???विधायक के शिकायत पर विभाग की निगरानी टीम कर रही हैं मामले की जांच।
भवन निर्माण विभाग के अधिकारी निविदा से पहले संवेदक से करा लेते हैं विभागीय काम ???ऐसे में टेंडर को रद्द करना उनकी मजबूरी ???विधायक के शिकायत पर विभाग की निगरानी टीम कर रही हैं मामले की जांच।
भवन निर्माण विभाग के अधिकारी निविदा से पहले संवेदक से करा लेते हैं विभागीय काम ???ऐसे में टेंडर को रद्द करना उनकी मजबूरी ???विधायक के शिकायत पर विभाग की निगरानी टीम कर रही हैं मामले की जांच।
दरभंगा /
भवन निर्माण विभाग में टेंडर को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं ,सवाल- जवाब भी होते हैं ,पर मामला कागजों पर निपट जाता हैं ??वजह अनेकों हैं।
दरअसल विभाग में टेंडर की अनियमितता को लेकर ज्यादा शिकायत कुछ नाखुश संवेदक करते रहते हैं। इसी कड़ी में कई संवेदक केवटी के विधायक मुरारी मोहन झा से भी यह शिकायत की थी कि अभियंताओं द्वारा टेंडर में धांधली की जाती हैं ,टेंडर मनचाहे संवेदक को दिया जाता हैं इस कारण विभाग में बड़ी लूट खसौट हैं। इस शिकायत पर विधायक ने विभाग के सचिव को पत्र लिखकर इस अनियमितता की जांच कराने का अनुरोध किया और कहा कि अगर अनियमितता पायी जाती हैं तो संबंधित विभाग के अधिकारियों पर कारवाई की जाय।
विभागीय के सचिव के निर्देश पर निगरानी विभाग की एक सदस्यीय टीम पहुंच कर सर्किट हाउस, अधीक्षण अभियंता के आवासीय परिसर, ऑफिसर्स कॉलोनी सहित अन्य सरकारी भवन की जांच की हैं , हालांकि निगरानी विभाग के अधिकारी कुछ भी बताने से इंकार कर दिया । पत्रकारों के द्वारा पूछे गए सवालों पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। बता दें कि वर्ष 2022-23 में एक निविदा विभाग ने निकाली थी जिसमें 112 ग्रुप में कुल 5 करोड रुपए की राशि थी । लेकिन बताया जा रहा हैं कि निविदा को रद्द कर बिना निविदा के लगभग 3 करोड़ रुपए का विभागीय कार्य करवाया गया हैं , पुनः वित्तीय वर्ष 2023-24 में आवासों में रखरखाव के लिए आठ ग्रुप में करीब 20 लाख रुपए का निविदा निकाला गया।कहा जा रहा हैं कि उसे भी कार्यपालक अभियंता के अनुशंसा पर अधीक्षण अभियंता ने निविदा को रद्द कर दिया। दोनों वर्ष के निविदा को रद्द कर संवेदक के मिली भगत से अभियंताओ के द्वारा अनियमितता की गई हैं हालांकि सरकार का नियम हैं कि कोई भी विभागीय कार्य सरकार द्वारा तय राशि के भीतर कराया जाना हैं लेकिन
यहां सरकार के नियमों की अनदेखी की जाती हैं और टेंडर द्वारा कार्य नहीं कराकर विभागीय कार्य कराया जा रहा हैं यह नियम के अनुकूल नहीं हैं।
किस परिस्थितियो में यें अधिकारी अपनी मनमानी कर टेंडर को रद्द कराते हैं और विभागीय कार्य को करा देते हैं ,यह जांच का विषय हैं। हालांकि जांच में आयें निगरानी विभाग के अभियंता जगह-जगह जाकर जांच की है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कार्यपालक अभियंता के पद पर उपेंद्र कुमार पदस्थापित थे लेकिन उनका स्थानांतरण होने के बाद समस्तीपुर के कार्यपालक अभियंता राजीव कुमार दो-तीन महीने तक दरभंगा के प्रभार में रहे थे। वर्ष 2023 के जून महीने में कार्यपालक अभियंता के पद पर ब्रजेश कुमार ने योगदान दिया है। वही अधीक्षक अभियंता के पद पर रेनू अग्रवाल, सहायक अभियंता दिशभव साह व कनीय अभियंता अभिषेक कुमार पदस्थापित हैं। वही कार्यालय परिसर में उपस्थित संवेदकों का आरोप था कि अभियंताओं और मनचाहा संवेदक के द्वारा कार्य के नाम पर पैसे की लूट की गई है। कार्य गुणवत्ता पूर्वक नहीं कराने का आरोप लगाया है।
अब देखना हैं कि निगरानी विभाग से जांच के लिये अभियंता क्या वास्तविक रूप से जांच कर दोषी अभियंताओं पर कारवाई के लिये विभाग को पत्र लिखेंगे या फिर मामले को रफा दफा कर चलते बनेंगे ?
क्यूंकि कहा जा रहा हैं कि अक्सर जांच में आयें अभियंता मामले को रफा -दफा कर ही चले जाते हैं।
दरअसल सरकारी जीतने विभाग के भवनों की मरम्मती या रंग रोगन विशेष परिस्थितियों में होता हैं ऐसे वक्त में टेंडर कर कार्य आवंटित करने में समय लग जाता हैं इस कारण किसी ना किसी संवेदक से पहले कार्य करा लिया जाता हैं और बाद में टेंडर निकाला जाता हैं। ऐसी परिस्थियों में टेंडर के दौरान अगर उस संवेदक को काम आवंटित नहीं हुआ तो उसके द्वारा कराये गये काम का राशि उसे नहीं मिलेगा यही कारण हैं कि अभियंताओं को ऐसा करना पड़ता हैं लेकिन यह नियम विरुद्ध हैं। जांच में तो यह बात प्रमाणित हो सकता हैं लेकिन यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही हैं।
उदाहरण के तौर पर एक किसी आला अधिकारी की बदली हुई और दूसरे आलाधिकारी की यहां पोस्टिंग हुई। अब उस घर में रंग रोगन और मरम्मती तुरंत कराना हैं तो कैसे होगा ?जब तक टेंडर निकलेगा और कार्य आवंटित होगा तब तक पता चलेगा कई माह बीत गये। ऐसी परिस्थिति में कार्यपालक अभियंता या अन्य अभियंता किसी संवेदक से यह काम करवा लेते हैं और बाद में इसे मेनेज करते हैं ताकि उस अभियंता को उसके पैसे मिल जाय लेकिन इस आड़ में बड़ा कमीशन खोरी होता हैं।