बिरौल को नगर परिषद बनाने की फिर से होने लगी है मांग, सात वर्ष पूर्व मंत्री परिषद की बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग ने बिरौल को नगर परिषद घोषित करने की स्वीकृति प्रदान की थी। अधिसूचना जारी के बाद स्थानीय प्रशासन ने कर दी अनदेखी।

उत्तम सेनगुप्ता/दरभंगा

लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही दरभंगा जिला के बिरौल को नगर परिषद बनाने की मांग फिर से होने लगी है। जबकि राज्य सरकार की ओर से 21 अगस्त 2017 दिन सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में नगर विकास एव आवास विभाग ने बिरौल को नगर परिषद घोषित करने की स्वीकृति प्रदान की थी।उसके बाद राज्यपाल स्तर से विधिवत अधिसूचना जारी की गई। जिसमें कृषि क्षेत्र को छोड़कर कर सुपौल पंचायत के वार्ड 3 से 15 तक,परहट वार्ड 4 एवं 5,फकीरना के 4 एवं 5,डुमरी पंचायत के वार्ड 3से 6 एवं 8,अफजला के 1 से 9 तक,उछटी 1,2,3,6,7,8,हाटी अंश 11 से 14,पोखराम के अजरकवे गोविंदपुर वार्ड 1और दक्षिणी कसरोर करकौली अंश को शामिल किया गया है। बिरौल को नगर परिषद में शामिल किये जाने के बाद सरकारी प्रक्रिया में तेजी आई और बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव देवेन्द्र प्रोज्जवल के द्वारा 23 अगस्त 2017 को भेजे पत्रांक/न.वि.(गठन)-05-2017,5551 के आलोक में उस समय के जिलाधिकारी ने अपने ज्ञा.पा-1103 के माध्यम से बीडीओ बिरौल एवं एसडीओ को आवश्यक कार्यार्थ करने का निर्देश दिया था। बावजूद तत्कालीन बीडीओ ने सरकार एवं जिलाधिकारी के उक्त आदेश से संबंधित संचिका को अनदेखी करते हुए कुछ जनप्रतिनिधियों के दबाव में आकर वर्ष 2020 में आननफानन में अफजला पंचायत जिसका आधा हिस्सा कृषि क्षेत्र अंतर्गत आता है उसे नगर पंचायत बिरौल का दर्जा दिला दिया गया। लेकिन बिरौल के तीन हिस्से तथा एक हिस्से जिसकी आधा आबादी कृषि क्षेत्र अंतर्गत आता है उसे नगर पंचायत का दर्जा देना स्थानीय लोगों के गले से आज तक नहीं उतर रहा है। और वर्ष2017 में तत्कालीन तीन-तीन एसडीओ के द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन के आधार पर बिरौल नगर परिषद का दर्जा देने की मांग लोग फिर से मुख्यमंत्री से कर रहे हैं। मालूम हो कि 2017 में बिरौल को नगर परिषद बनाने की मांग को लेकर मंत्री संजय झा एवं मंत्री मदन सहनी ने मंत्री परिषद से स्वीकृति दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।