सम्मान और पुरस्कार से ऊपर थे मैथिली पुत्र प्रदीप : डाँ भीमनाथ झा, श्री सीतावतरण संपूर्ण महाकाव्य उत्तर और दक्षिण को एकीकृत करता है: रमेश
सम्मान और पुरस्कार से ऊपर थे मैथिली पुत्र प्रदीप : डाँ भीमनाथ झा, श्री सीतावतरण संपूर्ण महाकाव्य उत्तर और दक्षिण को एकीकृत करता है: रमेश
सम्मान और पुरस्कार से ऊपर थे मैथिली पुत्र प्रदीप : डाँ भीमनाथ झा,
श्री सीतावतरण संपूर्ण महाकाव्य उत्तर और दक्षिण को एकीकृत करता है: रमेश
दरभंगा /
लहेरियासराय स्थित स्वयं प्रभा निकुंज मे शुक्रवार को मैथिली पुत्र प्रदीप के पांचवा पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डाँ भीमनाथ झा ने कहा कि मैथिली पुत्र प्रदीप सम्मान और पुरस्कार से उपर हो गये थे। उन्होने वर्तमान पीढ़ी को मैथिली पुत्र प्रदीप को जानने के लिए उनकी संपूर्ण साहित्यिक विधाओं को एकत्रित करने की बात कही। डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए साहित्यकार श्री चंद्रेश ने कहा कि मैथिली पुत्र प्रदीप की हर विधा मे रचना प्रस्तुत है जो जनकंठ में बसा हुआ है। वही साहित्यकार रमेश ने कहा कि मैथिली पुत्र प्रदीप कृत श्रीसीतावतरण संपूर्ण महाकाव्य भारत को उत्तर से दक्षिण को एकत्रित करने की जरिया है। प्रो उदय शंकर मिश्र की संचालन में आयोजित कार्यक्रम को डॉ योगानंद झा, हीरेंद्र झा, राजेश सिंह ठाकुर, डॉ हरिनारायण ठाकुर, प्रवीण कुमार झा, हरी किशोर झा, एमएमटीएम कॉलेज के प्रिंसिपल उदय शंकर झा, विजय शंकर झा, मुन्नी मधु, कौशल झा समेत कई बक्ता ने अपना विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का आरंभ कुमारी अणिमा के द्वारा मैथिली पुत्र प्रदीप रचित जगदंबा अहीं अवलंब हमर, हे माय अहां बिनु आश ककर के गायन से किया गया। कार्यक्रम मे वासुकीनाथ झा, विद्या नंदन झा,अमर नाथ झा,चंदन कुमार झा,रजनीश कुमार झा, मनीष कुमार झा, संजय कुमार झा,शुषांत नंदन, माहेश्वरी नंदन समेत कयी लोग मौजूद थे।धन्यवाद ज्ञापन राम कुमार झा ने किया।
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