दरभंगा जिला के कई थानेदार, नहीं हैं थानेदारी करने के लायक ,जैसे -तैसे चल रहा हैं जिला ?कागजों पर चल रहा दिशा -निर्देश ,जमीनी हकीकत कुछ और ???????

दरभंगा /संजय कुमार राय

चुनाव खत्म होते ही दरभंगा जिला के तमाम थानों की पुलिस सुस्त पर गई ,कागजों पर दिशा निर्देश और उसका पालन करना भर रह गया हैं।

यही कुछ ही दिनों पहले की हम बात करें तो लोकसभा चुनाव ,सरकार का मकसद “शांति पूर्ण माहोल में हो चुनाव ” ,आयोग की मंशा भी यही ,एसपी बदले गये एसएसपी भी बदल दिये गये ,डीआईजी की भी पोस्टिंग हुई ,अपने पदों को लेकर सभी नये नये चेहरे ,जिला का फोर्स ,अर्धसैनिक बल ,सेना के जवान ,इन पदाधिकारियों के तेवर अलग।इन पुलिस पदाधिकारियों को बस एक डर था कि पुलिसिंग में कहीं कोई चूक ना जाएं जिससे चुनाव आयोग का कोपभाजन होना पड़े।
नये नये थानेदारों की पोस्टिंग , उम्मीद से ज्यादा उठा पटक ,पुराने पुलिस अधिकारी सभी बदल दिये गये। नया नया जोश जैसे कोई शेर दहाड़ रहा हो। लेकिन चुनाव खत्म होते ही जोश भी खत्म ,शेर वाली दहाड़ भी खत्म। चुनाव के बाद जवानों के जाते ही सभी थानाध्यक्ष भी सुस्त। कई थानेदार तो थाने के काबिल भी नहीं हैं ,इससे बढ़िया तो महिला पुलिस पदाधिकारी थानाध्यक्ष के रूप में थाना थाना चला रही थी ?तात्कालीन एसएसपी के कई गलत कार्यशैली के बावजूद भी कुछ थानेदार बेहतर थानेदारी कर रहें थे ।
चुनाव खत्म अब बात खत्म ?ऐसा लगता हैं कि शहर के पुलिसिंग में अचानक चक्का जाम हो गया ?सड़कों पर भी गौरव गाथाएँ सुनने को मिलती थी ,खुद को हरिश्चंद्र बताते थे लेकिन अब तो इनकी आवाज भी नहीं सुनाई देती हैं। दरभंगा जिला में यू कहें तो शांत जिला हैं, लेकिन छोटी मोटी घटनाएं होती हैं तो लोग व्याकुल हो जाते हैं ,और गोलियां चल जाय तो लोग परेशान हो जाते हैं। जिस थानेदार की जितनी शिकायत उसकी पहुंच आलाधिकारियों तक आसानी से बन जाती हैं इसका मतलब समझ में नहीं आता ?अगर कोई मतलब समझ में आता हैं तो पुराने दिनों की बातें यानि तात्कालीन पुलिस अधिकारियों की याद ताजा हो जाती हैं।

ठीक से दिवा गश्ती नहीं होती और रात्रि गश्ती तो भगवान भरोसे हैं। आप रात के बारह बजे के बाद सड़कों पर चलेंगे तो शायद ही पुलिस की गाड़ी या जवान कहीं आपको मिलेंगे।हाँ कहीं कहीं डायल 112की गाड़िया दिखाई पड़ती हैं लेकिन रात जब करवट लेती हैं तो यें 112की कुछ गाड़िया एनएच का शोभा बढ़ाने लगती हैं।दो बजे रात के बाद सड़क सुनसान।ऐसे में चोरी -डकैती के घटनाओं की संभावना बढ़ जाती हैं।

विशनपुर थाना क्षेत्र और सिमरी थाना क्षेत्र में हुई घटनाएं पुलिस के इसी उदासीनता को दर्शाता हैं।अगर ऐसा नहीं हैं तो 12किलोमीटर के शोभन बाईपास में एक तरफ विशनपुर और दूसरी तरफ सिमरी थाना यही नहीं कुछ अंश मब्बी थाना का हैं।अपराधी अपराध कर आराम से भाग निकलते हैं ?वजह साफ हैं कि इन रास्तों में गश्ती होती नहीं अगर होती भी हैं तो कभी कभार।
दरअसल ज्यादातर थानाध्यक्ष एक महीने में ही करोड़पति बनने की चाह रखते हैं और उसके पीछे भी लग जाते हैं।चर्चा हैं कि कई थानेदारों को शराब माफियाओं से तालमेल हैं। मधुबनी जिला से आयें थानेदार को थानेदारी मिलने के बाद से ही उसी काम में व्यस्त दिखाई पड़ने की सूचना मिल रही हैं वहीं समस्तीपुर जिला से आयें कुछ थानेदार इस जिला में  बेहतर कर रहें हैं।वजह साफ हैं कि समस्तीपुर के एसपी ने शराब मामले में संलिप्त कई थानेदारों पर कारवाई की थी लेकिन मधुबनी और दरभंगा के एसएसपी इस मामले में उदासीन हैं , नतीजतन इस जिला से आयें थानेदार की मंसूबा कमोवेश यही हैं।
थानेदारों की लापरवाही सामने आने पर भी कारवाई नहीं होती।चुनाव के दौरान लगातार शराब की बरामदगी ,हथियार की बरामदगी पुलिस ने की लेकिन इस दौरान भी कई थानाध्यक्ष ऐसे थे जिनकी उपलब्धि शून्य रही इसी से बहूत बातो का अंदाजा भी लगाया जा सकता हैं।
सूचना हैं कि समस्तीपुर जिला के कई अपराधकर्मी दरभंगा जिला में अपना रैन बसेरा बनाया हैं अगर थानेदारों की लापरवाही यही रही तो बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता,दरभंगा जिला की पुलिस को चुस्त -दुरुस्त रहने की जरूरत हैं।

जमीन कारोबार से जुड़े कई भूमाफियाओ का भी आपराधिक इतिहास रहा हैं और इन दिनों कोई ऐसा थाना नहीं जहां इन भूमाफियाओं की गहरी पैठ नहीं हो वजह भी साफ हैं ?इसके कारण कई लुच्चे -लफंगे का भी पैठ थानेदारों से हैं और छींट फुट घटनाओं का कारण भी यही हैं।