राजघाट -सत्ती घाट पथ का कब होगा जीर्णोद्धार ,तीन वर्ष बीतने के बाद भी सड़क का निर्माण अब तक नहीं ?सरकारी मापदंडों का संवेदक नहीं कर रहें हैं पालन।
राजघाट -सत्ती घाट पथ का कब होगा जीर्णोद्धार ,तीन वर्ष बीतने के बाद भी सड़क का निर्माण अब तक नहीं ?सरकारी मापदंडों का संवेदक नहीं कर रहें हैं पालन।
राजघाट -सत्ती घाट पथ का कब होगा जीर्णोद्धार ,तीन वर्ष बीतने के बाद भी सड़क का निर्माण अब तक नहीं ?सरकारी मापदंडों का संवेदक नहीं कर रहें हैं पालन।
बेनीपुर /बिरौल
बेनीपुर पथ प्रमंडल के अन्तर्गत सत्तीघाट -राजघाट पथ वर्षो से अपने खास्ता हाल पर आशु बहा रहा हैं! इस कारण पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू सरकार के जनप्रतिनिधियो को काफी खड़ी खोटी स्थानीय लोंगों ने सुनाई थी। हाल के दिनों में हुये लोकसभा के चुनाव में भी लोंगों का गुस्सा चरम पर था ! परिणामस्वरूप विधान सभा चुनाव के बाद सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ लेकिन प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि कार्य स्थल पर सड़क निर्माण से संबंधित बोर्ड तक नहीं लगाया गया है!सड़क को बनाते हुये तीन वर्ष बीत गये अब कितने वर्षों में यह सड़क बनकर तैयार होगी यह तो विभागीय पदाधिकारी ही बता सकते हैं।
सड़क निर्माण में एप्रोच पथ निर्माण के लिए विभाग द्वारा अलग से आबंटन दिया जाता है लेकिन पुल निर्माण स्थल पर एप्रोच पथ तो दिया गया लेकिन वह महज खानापूर्ति है!मिट्टी करण का आलम यह है कि सड़क किनारे स्थित गाँव बालों की जिंदगी दूभर हो गई है!ना पानी का छिड़काव, ना मिट्टी के खनन का कोई आदेश,?संवेदक द्वारा सड़क निर्माण के कोई मापदंड का अनुपालन नहीं हो रहा है? विभागीय पदाधिकारी राज्य सरकार की नौकरी या निगरानी के बदले कंस्ट्रक्शन कंपनी के चाटुकारिता में लगी हैं फलत: कार्य प्रारंभ के तीन वर्ष बाद भी सड़क का हाल ढाक के तीन पात जैसी हैं!अगले साल विधान सभा चुनाव भी सामने हैं लेकिन पदाधिकारियों द्वारा कार्य को पूर्ण कराने का प्रयास नहीं किया जा रहा हैं। इस संबंध में पुर्व मंत्री डॉ अशोक कुमार ने विभागीय मंत्री से पत्राचार कर कार्य की गुणवत्ता की जांच कर यथा शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया है!अब देखना होगा कि क्या बेनीपुर पथ प्रमंडल की चाटुकारिता पर लगाम लगता है कि नहीं?मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण कराने का निर्णय लिया, लेकिन कार्यपालक अभियंता ने इस कार्यादेश को मज़ाक बना दिया है।
अब बरसात होने वाली हैं ,सड़कों का हाल बेहाल हैं।वर्षा होने पर इस इलाके के लोंगों को चलना भी मुश्किल हो जाएगा ऐसे में सवाल यही हैं कि एक साल के भीतर बनने वाली सड़क के तीन वर्ष बीत गये आखिर और कितने वर्ष इस सड़क के बनने में लगेगी ?ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर हैं ऐसे में समय रहते सड़क नहीं बना तो अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
होटल मालिक के देख रेख में फल फूल रहा हैं बालू खनन का धंधा ,कई जिला के पदाधिकारियों को समय पर पहुंच जाता नाजायज पैसा ,इन माफियाओं से थानेदार भी अछूता नहीं।
बिहार : बिहार में बीजेपी नेताओं ने की 56 सभाएं, मोदी-शाह की टीम के सामने राहुल-खरगे का प्रचार रहा पस्त