होटल मालिक के देख रेख में फल फूल रहा हैं बालू खनन का धंधा ,कई जिला के पदाधिकारियों को समय पर पहुंच जाता नाजायज पैसा ,इन माफियाओं से थानेदार भी अछूता नहीं।
होटल मालिक के देख रेख में फल फूल रहा हैं बालू खनन का धंधा ,कई जिला के पदाधिकारियों को समय पर पहुंच जाता नाजायज पैसा ,इन माफियाओं से थानेदार भी अछूता नहीं।
होटल मालिक के देख रेख में फल फूल रहा हैं बालू खनन का धंधा ,कई जिला के पदाधिकारियों को समय पर पहुंच जाता नाजायज पैसा ,इन माफियाओं से थानेदार भी अछूता नहीं।
दरभंगा /संजय कुमार राय
शहर में अवैध खनन का धंधा बड़े पैमाने पर फल फूल रहा हैं ?खासकर मुजफ्फरपुर और मधुबनी जिला के नदियों से प्रत्येक दिन दरभंगा ,मधुबनी समस्तीपुर एवं अन्य जिलों के लिये लोवरलोड में बालू की कई ट्रकें एन एच 57से चल रही हैं और इन ट्रकों से एनएच से सटे थानेदार ,संबंधित जिला के डीटीओ एवं खनन विभाग के पदाधिकारी मालामाल हो रहें हैं इस कारण सरकार के राजस्व की चोरी हो रही हैं और प्रत्येक दिन लाखों रुपये का चुना सरकार को लगाया जा रहा हैं।
सूत्र बताते हैं कि मब्बी थाना स्थित एक होटल मालिक का इस धंधा में काफी नाम हैं इसे” मैनेज मास्टर “भी कहा जाता हैं। इस कारण यह होटल मालिक लाखों रुपये मासिक नाजायज रूप से कमाता हैं। होटल मालिक दबंग इतना हैं कि सूत्र बताते हैं कि कुछ दिन पहले खनन विभाग के पदाधिकारी के मुंह में पिस्टल घुसा दिया था और जान मारने की धमकी भी दी थी लेकिन खनन पदाधिकारी ने इस मामले में चुप रहना बेहतर समझा और किसी तरह की सूचना पुलिस को नहीं दी।एक वजह यह भी हैं कि इस होटल पर सरकारी दल के कई नेता का भी आना जाना हैं ॥
दरभंगा जिला के खनन पदाधिकारी समय समय पर इन माफियाओं के विरुद्ध अभियान चलाकर कारवाई करते हैं लेकिन मधुबनी मुजफ्फरपुर समस्तीपुर के खनन पदाधिकारी इस मामले में अनदेखी करते रहते हैं ।
सूत्र बताते हैं कि मब्बी स्थित उक्त होटल मालिक मुजफ्फरपुर समेत सभी जिला के संबंधित पदाधिकारियों से सांठ -गांठ कर तकरीबन चार से पांच सौ ट्रकों को प्रतिदिन हरी झंडी दिखाता हैं इसके एवज में सभी ट्रक मालिकों से पैसा लेता हैं और बताया जाता हैं कि सभी संबंधित पदाधिकारी को यही होटल मालिक पैसा पहुंचाता हैं ,जो मंथली फिक्स हैं। सिमरी थाना के एक पुलिस कर्मी का स्क्रीन शॉर्ट यही दर्शाता हैं। सभी थानेदार खुद पैसा नहीं लेकर इस काम में थाना के मुंशी ,प्राईवेट चालक या फिर थाना के अन्य सिपाही को लगा देता हैं। इनका काम हैं कि थानेदार द्वारा फिक्स की गई रकम को महीना खत्म होते ही वसूल करना । थाना के चालक, मुंशी ,या अन्य सिपाही पैसे वसूलकर थानेदार को दे देता हैं इसके एवज में ऐसे नाजायज काम कर रहें कर्मी को दो तीन हजार रुपये देकर मामले को इतिश्री कर देता हैं।
यही हाल कमोवेश अन्य विभाग के पदाधिकारियों का हैं। नाजायज पैसे के वसूली में अपने प्राईवेट चालक या फिर अपने विश्वासी कर्मी को लगा देता हैं और नाजायज पैसों के वसूली का रास्ता निकालकर धड़ल्ले से वसूली किया जाता हैं। ऐसे में कुछ ऐसे ट्रक मालिक भी हैं जो पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं।
बता दे कई किसान अपने खेतों का मट्टी काटकर पोखरा बनाते हैं और मट्टी को बेच देते हैं।इस मट्टी को मिट्टी से जुड़े कारोबारी खरीदकर अपने हाइवा से ढो कर अन्यत्र बेच देता हैं। इसपर भी पुलिस की नजर पैनी हो जाती हैं और पांच हजार रुपया प्रति ट्रक चालक को मासिक देने के लिये मजबूर करता हैं और नहीं देने पर सीजर लिस्ट बनाकर डीटीओ के पास भेंज देता हैं और डीटीओ साहब फाईन काट देते हैं।